
NPS में ऐतिहासिक सुधार: बैंक स्थापित कर सकेंगे पेंशन फंड, शुल्क-निकासी के नियम भी बदले
NPS Historic Reforms: भारत के पेंशन क्षेत्र में व्यापक सुधारों से NPS को नई दिशा मिली है। बैंकों को पेंशन फंड स्थापित करने की अनुमति, निवेश प्रबंधन शुल्क में परिवर्तन, और निकासी नियमों में लचीलापन प्रमुख बदलाव हैं। जानें कैसे ये सुधार ग्राहकों के लिए फायदेमंद साबित होंगे।
भारत के पेंशन परिदृश्य को नया रूप देने के लिए, पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) को मजबूत करने, फंड प्रबंधन में भागीदारी बढ़ाने और शासन व पारदर्शिता सुधारने के लिए व्यापक सुधारों को मंजूरी दी है।
बैंकों को मिली नई भूमिका
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस बदलाव की सबसे बड़ी बात यह है कि अब अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक स्वतंत्र रूप से एनपीएस परिसंपत्तियों के प्रबंधन के लिए पेंशन फंड स्थापित कर सकेंगे। यह मौजूदा मानदंडों से एक बड़ा बदलाव है, जो बैंकों की भागीदारी को सीमित करते थे। पीएफआरडीए का कहना है कि इससे पेंशन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा गहराएगी, नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और न्यासी देखरेख मजबूत होगी।
नए ढांचे के तहत केवल अच्छी पूंजी और मजबूत वित्तीय स्थिति वाले बैंकों को ही पेंशन फंड का प्रायोजक बनने की अनुमति दी जाएगी। पात्रता नेट वर्थ, बाजार पूंजीकरण और वित्तीय मजबूती जैसे मानदंडों पर निर्भर करेगी, जो भारतीय रिज़र्व बैंक के मानदंडों के अनुरूप होंगे। विस्तृत पात्रता मानदंड और परिचालन दिशा-निर्देश जल्द ही अधिसूचित किए जाएंगे और ये नए प्रवेशकों और मौजूदा पेंशन फंड दोनों पर लागू होंगे।
एनपीएस ट्रस्ट के बोर्ड में हुए बदलाव
निगरानी और शासन को मजबूत करने के लिए, पीएफआरडीए ने एनपीएस ट्रस्ट के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज का पुनर्गठन किया है और एक कठोर चयन प्रक्रिया के बाद तीन प्रतिष्ठित पेशेवरों को शामिल किया है।
नए ट्रस्टी: दिनेश कुमार खारा (भूतपूर्व अध्यक्ष, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया), स्वाति अनिल कुलकर्णी (भूतपूर्व कार्यपालक उपाध्यक्ष, यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी) और अरविंद गुप्ता (सह-संस्थापक, डिजिटल इंडिया फाउंडेशन)। खारा को एनपीएस ट्रस्ट बोर्ड का अध्यक्ष नामित किया गया है, जिससे भारत के 11 लाख करोड़ रुपये के एनपीएस पारिस्थितिकी तंत्र में मजबूत शासन और न्यासी जवाबदेही आने की उम्मीद है।
एनपीएस फंड प्रबंधन शुल्क में बदलाव
एक अन्य बड़े बदलाव में, पीएफआरडीए ने 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी, पेंशन फंडों के लिए निवेश प्रबंधन शुल्क (आईएमएफ) की संरचना को संशोधित किया है। इसका उद्देश्य भारत की पेंशन लागत संरचना को वैश्विक मानकों के साथ जोड़ते हुए ग्राहकों के हितों की रक्षा करना है।
नए आईएमएफ में सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र के ग्राहकों के लिए स्लैब-आधारित, भिन्न शुल्क व्यवस्था लागू की गई है। सरकारी क्षेत्र के लिए दरें अपरिवर्तित रहेंगी, जबकि गैर-सरकारी क्षेत्र में शुल्क निम्नानुसार तय होंगे:
· 25,000 करोड़ रुपये तक की संचित निधि (एयूएम) पर: 0.12%
· 25,000 से 50,000 करोड़ रुपये के एयूएम पर: 0.08%
· 50,000 से 1,50,000 करोड़ रुपये के एयूएम पर: 0.06%
· 1,50,000 करोड़ रुपये से अधिक एयूएम पर: 0.04%
यह संरचना मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (एमएसएफ) के तहत योजनाओं पर भी लागू होगी, जहां प्रत्येक कॉर्पस को अलग से गिना जाएगा।
वार्षिक नियामक शुल्क (एआरएफ) 0.015% पर अपरिवर्तित रहेगा, जिसमें से 0.0025% राशि एसोसिएशन ऑफ एनपीएस इंटरमीडिएरीज़ (एएनआई) को दी जाएगी ताकि पीएफआरडीए के मार्गदर्शन में देशव्यापी जागरूकता और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम चलाए जा सकें।
निकासी और एग्जिट के नियमों में लचीलापन
पीएफआरडीए ने दिसंबर 2025 से प्रभावी, एनपीएस निकासी और एग्जिट नियमों में संशोधन किया है ताकि ऑल सिटिज़न मॉडल और कॉर्पोरेट सेक्टर (सीएस व एमएसएफ) के गैर-सरकारी ग्राहकों के लिए लचीलापन बढ़ाया जा सके। प्रमुख बदलावों में अनिवार्य वार्षिकी को घटाकर 20% करना, कॉर्पस के खिलाफ लोन की अनुमति देना और लॉक-इन अवधि हटाना शामिल है।
लॉक-इन नहीं: प्रवेश/निकास आयु सीमा 85 वर्ष तक। सामान्य निकासी के लिए वेस्टिंग: 15 साल या 60 वर्ष की आयु (ऑल सिटिज़न) या सेवानिवृत्ति (कॉर्पोरेट)।
सामान्य निकासी (गैर-सरकारी)
8 लाख रुपये से कम कॉर्पस: 100% एकमुश्त, सिस्टमैटिक लम्प सम विड्रॉल (एसएलडब्ल्यू), या सिस्टमैटिक विड्रॉल (एसयूआर)।
8 से 12 लाख रुपये कॉर्पस: अधिकतम 6 लाख रुपये एकमुश्त + बाकी राशि एसयूआर (न्यूनतम 6 साल) या कम से कम 20% वार्षिकी।
12 लाख रुपये से अधिक कॉर्पस: अधिकतम 80% एकमुश्त + कम से कम 20% वार्षिकी।
समय से पहले निकासी: अधिकतम 20% एकमुश्त + कम से कम 80% वार्षिकी। (5 लाख रुपये तक: 100% एकमुश्त)।
मृत्यु की स्थिति में: नॉमिनी को 100% एकमुश्त (या वार्षिकी/एसएलडब्ल्यू/एसयूआर)।
60 साल के बाद ज्वाइन करने या जारी रखने पर
इसमें कोई वेस्टिंग अवधि नहीं होगी। सामान्य निकासी के नियम समान रहेंगे (12 लाख रुपये तक के कॉर्पस पर 100% एकमुश्त मिल सकता है)। सेवानिवृत्ति के बाद एनपीएस जारी रखने की सुविधा स्वचालित रहेगी।
कॉर्पस पर लोन और आंशिक निकासी
लोन: बैंकों से स्वयं के योगदान का 25% तक लोन लिया जा सकता है, जिस पर कॉर्पस गिरवी रखी जाएगी।
आंशिक निकासी: स्वयं के योगदान का 25% तक।
60 वर्ष से पहले: जीवनभर में 4 बार, प्रत्येक में 4 साल का अंतराल।
60 वर्ष के बाद: असीमित बार, प्रत्येक में 3 साल का अंतराल।
उद्देश्य: घर खरीद/निर्माण (एक बार, बशर्ते पहले कोई घर न हो), गंभीर बीमारी का इलाज (परिवार), लोन चुकाना।





