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ओला के सीईओ के खिलाफ कर्मचारी की आत्महत्या का मामला, हाईकोर्ट ने दी राहत

ओला के सीईओ के खिलाफ कर्मचारी की आत्महत्या का मामला, हाईकोर्ट ने दी राहत

संक्षेप:

बेंगलुरु पुलिस ने ओला इलेक्ट्रिक के संस्थापक और सीईओ भाविश अग्रवाल तथा कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी सुब्रत कुमार दास के खिलाफ एक कर्मचारी की आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है।

Mon, 20 Oct 2025 07:29 PMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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बेंगलुरु पुलिस ने ओला इलेक्ट्रिक के संस्थापक और सीईओ भाविश अग्रवाल तथा कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी सुब्रत कुमार दास के खिलाफ एक कर्मचारी की आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। मृतक के. अरविंद (38 वर्ष) ओला इलेक्ट्रिक में एक "होमोलोगेशन इंजीनियर" के रूप में कार्यरत थे। वहीं, ओला इलेक्ट्रिक ने इस एफआईआर को चुनौती देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया है। कंपनी ने बयान जारी कर कहा है कि हाईकोर्ट ने उसके और उसके अधिकारियों के पक्ष में सुरक्षात्मक आदेश (प्रोटेक्टिव ऑर्डर्स) पारित किए हैं। पुलिस ने बताया है कि मामले की आगे की जांच जारी है।

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क्या-क्या लगे आरोप

अरविंद ने 28 सितंबर को अपने बेंगलुरु स्थित आवास पर जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। उनके द्वारा छोड़े गए 28 पन्नों के एक हस्तलिखित नोट में मुख्य रूप से निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं...

कार्यस्थल पर उत्पीड़न: अरविंद ने नोट में कार्यस्थल पर लगातार हो रहे मानसिक उत्पीड़न की बात कही है।

वेतन और भत्तों का न मिलना: उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने उनका वेतन और अन्य देय भत्ते रोक दिए थे, जिससे उन्हें गंभीर तनाव हुआ।

संदिग्ध लेन-देन: अरविंद की मृत्यु के दो दिन बाद, 30 सितंबर को उनके बैंक खाते में ₹17.46 लाख की एक राशि ट्रांसफर की गई। परिवार ने इस लेन-देन को "संदिग्ध" बताया है और कंपनी प्रतिनिधियों द्वारा इसके बारे में स्पष्टीकरण न दे पाने पर आपत्ति जताई है।

अरविंद के भाई, अश्विन कन्नन की शिकायत के आधार पर, सुब्रतपुरा पुलिस स्टेशन में 6 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 (आत्महत्या का दुष्प्रेरण) और धारा 3(5) (सामान्य इरादा) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

ओला इलेक्ट्रिक का पक्ष

ओला इलेक्ट्रिक ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंपनी ने अरविंद के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई। कंपनी का कहना है कि अरविंद ने अपने तीन साल से अधिक के कार्यकाल के दौरान कभी भी उत्पीड़न या कोई अन्य शिकायत दर्ज नहीं कराई। साथ ही, उनकी भूमिका में कंपनी के शीर्ष प्रबंधन के साथ सीधा संपर्क शामिल नहीं था।

पारिवारिक सहायता: कंपनी ने परिवार को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए अरविंद के खाते में उनका पूर्ण और अंतिम निपटान (फुल एंड फाइनल सेटलमेंट) भेजने की बात कही।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia
टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल मिलाकर 20 साल का अनुभव। एचटी डिजिटल से पहले दृगराज न्यूज नेशन, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, सहारा समय और वॉच न्यूज एमपी /सीजी में रिपोर्टिग और डेस्क पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। स्पेशल स्टोरीज,स्पोर्ट्स, पॉलिटिक्स, सिनेमा, स्पोर्ट्स के बाद अब बिजनेस की खबरें लिख रहे हैं। दृगराज, लाइव हिन्दुस्तान में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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