HDFC बैंक पर बड़ी कार्रवाई! CEO और CFO पर लगा ₹1-1 लाख का जुर्माना, जांच में खुली पोल

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • HDFC बैंक ने MSRDC डिपॉजिट व्यवस्था से जुड़े मामले की आंतरिक जांच पूरी होने के बाद अपने CEO, CFO और ग्रुप हेड-रिटेल एसेट्स पर ₹1-1 लाख का जुर्माना ठोका है
  • बैंक के अनुसार अधिकारियों की ओर से Business Overreach हुआ था, लेकिन किसी तरह की गलत मंशा या निजी लाभ का कोई सबूत नहीं मिला
HDFC Bank
HDFC बैंक पर RBI की बड़ी कार्रवाई।

देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक HDFC बैंक ने अपने ही कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। बैंक ने अपने CEO, CFO और ग्रुप हेड-रिटेल एसेट्स पर ₹1-1 लाख का जुर्माना लगाया है और साथ ही उन्हें चेतावनी पत्र (Warning Letter) भी जारी किया है। यह फैसला महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) से जुड़े डिपॉजिट मामलों की आंतरिक जांच पूरी होने के बाद लिया गया। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

बैंक ने क्या बताया?

बैंक ने बताया कि यह मामला 2017 और 2021 में MSRDC के साथ किए गए डिपॉजिट अरेंजमेंट से जुड़ा था। इस पूरे मामले की जांच बैंक के स्वतंत्र निदेशकों की विशेष अनुशासन समिति (Special Disciplinary Committee of Independent Directors) ने की। जांच के बाद समिति ने पाया कि अधिकारियों की ओर से "बिजनेस ओवररीच" (Business Overreach) हुआ था, यानी कारोबार बढ़ाने की कोशिश में कुछ ऐसे कदम उठाए गए, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों से पूरी तरह मेल नहीं खाते थे।

कहीं कोई धोखाधड़ी तो नहीं?

हालांकि, बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में किसी भी अधिकारी द्वारा निजी लाभ (Personal Enrichment), धोखाधड़ी या गलत मंशा (Mala Fide Intent) का कोई सबूत नहीं मिला, यानी अधिकारियों ने खुद के फायदे के लिए कोई गलत काम नहीं किया, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली RBI के नियमों से अलग हो सकती थी।

इसी वजह से बैंक के बोर्ड ने सख्त लेकिन सीमित कार्रवाई करने का फैसला लिया। CEO, CFO और ग्रुप हेड-रिटेल एसेट्स पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया गया, जबकि मामले से जुड़े अन्य कर्मचारियों को केवल चेतावनी पत्र जारी किए गए।

HDFC बैंक का कहना है कि यह कार्रवाई बैंक में बेहतर गवर्नेंस, पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन (Compliance) सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। बैंक ने दोहराया कि उसके लिए RBI के नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए आंतरिक प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जाएगा।

इस घटनाक्रम से यह साफ है कि बड़े संस्थानों में भी नियमों के पालन को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाता। भले ही किसी अधिकारी की मंशा गलत न हो, लेकिन अगर प्रक्रिया नियामकीय मानकों से अलग पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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