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दरों में कटौती के बावजूद नवंबर में जीएसटी कलेक्शन 2 लाख करोड़ के पार जाने की उम्मीद

दरों में कटौती के बावजूद नवंबर में जीएसटी कलेक्शन 2 लाख करोड़ के पार जाने की उम्मीद

संक्षेप:

नवंबर महीने का कलेक्शन अक्टूबर की बिक्री को दर्शाएगा, जो जीएसटी दरों में कटौती के पूरी तरह से लागू होने का पहला महीना था। इसलिए, राजस्व में मजबूती की उम्मीद की जा रही है। नवंबर के राजस्व के आंकड़े 1 दिसंबर को जारी होंगे।

Nov 20, 2025 06:55 am ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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सरकार के आंतरिक आकलन के मुताबिक, भारत का जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) राजस्व नवंबर महीने में फिर से मजबूत होने वाला है। इससे सितंबर महीने में की गई कर दरों में कटौती का केंद्र और राज्यों की आय पर पड़ने वाला असर सीमित रहने की उम्मीद है। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था में मजबूत मांग और बढ़ते करदाता आधार की वजह से राजस्व का यह रुझान बना रहेगा।

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कैसा रहा अब तक का सफर?

अप्रैल से सितंबर के बीच सकल जीएसटी प्राप्तियों में सालाना 9.8% की औसत वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन अक्टूबर महीने में यह गिरकर सिर्फ 4.6% रह गई। हालांकि, सरकारी आकलन से जुड़े दो लोगों का कहना है कि नवंबर महीने में यह वृद्धि फिर से बढ़कर 10% के मजबूत स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। इससे मासिक राजस्व प्राप्तियां लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती हैं।

अक्टूबर में वसूली कम क्यों हुई?

जीएसटी की प्राप्तियां एक महीने बाद आती हैं, यानी अक्टूबर में मिला राजस्व सितंबर महीने की बिक्री को दर्शाता है। एक सूत्र ने बताया कि अक्टूबर का 1.96 लाख करोड़ रुपये का राजस्व इस रुझान को दिखाता है कि लोगों ने सितंबर की शुरुआत में बड़े खर्चे वाली खरीदारी को रोके रखा और बाद में दरों में कटौती का फायदा उठाने के लिए महीने के आखिरी दिनों में खरीदारी की। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि लोगों को 3 सितंबर से ही पता था कि जीएसटी दरों में कटौती 22 सितंबर से प्रभावी होगी।

अब आगे क्या होगा?

नवंबर महीने का कलेक्शन अक्टूबर की बिक्री को दर्शाएगा, जो जीएसटी दरों में कटौती के पूरी तरह से लागू होने का पहला महीना था। इसलिए, राजस्व में मजबूती की उम्मीद की जा रही है। नवंबर के राजस्व के आंकड़े 1 दिसंबर को जारी होंगे।

सरकार क्या मानती है?

वित्त मंत्रालय की एक समीक्षा में अनुमान जताया गया था कि जीएसटी सुधार से उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर टैक्स का बोझ कम होगा, जिससे घरेलू मांग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इन सुधारों में मुख्य रूप से जीएसटी की चार-स्तरीय प्रणाली को सरल बनाकर मुख्य रूप से 5% और 18% के दो स्लैब में बदलना शामिल था, जबकि लग्जरी और सिन गुड्स (जैसे तंबाकू) पर 40% का विशेष दर बरकरार रखा गया।

राजस्व पर क्या असल असर पड़ेगा?

मजबूत जीएसटी वसूली की यह प्रवृत्ति सरकार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 4.4% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगी। एक व्यक्ति ने बताया कि कर दरों में कटौती के बाद अभी तक किसी भी राज्य सरकार ने केंद्र के सामने राजस्व को लेकर कोई चिंता नहीं जताई है। व्यवसायों ने भी जीएसटी रेट्स में कमी का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाया है, जिससे खपत को बढ़ावा मिला है।

करदाता आधार भी बढ़ रहा है

केंद्र सरकार को उम्मीद है कि आसान जीएसटी पंजीकरण जैसे सुधारों की वजह से करदाता आधार भी तेजी से बढ़ेगा। 1 नवंबर से, सरकार ने 'कम जोखिम वाले आवेदकों' के लिए स्वचालित जीएसटी पंजीकरण की सुविधा शुरू की है, जहां तीन दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन हो जाता है। जीएसटी के 2017 में शुरू होने के बाद से, पंजीकृत करदाताओं के मामले में भारत का अप्रत्यक्ष कर आधार लगभग 6.39 मिलियन से बढ़कर 15.1 मिलियन से अधिक हो गया है, जो औपचारिकरण और कर अनुपालन में सुधार को दर्शाता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

एक चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म के सीनियर पार्टनर राजत मोहन के मुताबिक, 22 सितंबर की दरों में समझदारी के बाद जीएसटी वसूली के रुझान साफ दिखाते हैं कि अर्थव्यवस्था ने कर दरों में कटौती को बिना राजस्व प्रवाह में कोई बड़ी रुकावट के सोख लिया है। उन्होंने कहा कि वास्तव में, कलेक्शन मजबूत बना हुआ है, जो घरेलू मांग की गहराई और जीएसटी ढांचे की बढ़ती दक्षता को रेखांकित करता है। उनका मानना है कि एक मध्यम और अनुमानित कर ढांचा अनुपालन और विकास दोनों को बढ़ावा दे सकता है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia
टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल मिलाकर 20 साल का अनुभव। एचटी डिजिटल से पहले दृगराज न्यूज नेशन, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, सहारा समय और वॉच न्यूज एमपी /सीजी में रिपोर्टिग और डेस्क पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। स्पेशल स्टोरीज,स्पोर्ट्स, पॉलिटिक्स, सिनेमा, स्पोर्ट्स के बाद अब बिजनेस की खबरें लिख रहे हैं। दृगराज, लाइव हिन्दुस्तान में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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