ग्रीनलैंड टैरिफ: सोना-चांदी चमकेंगे, भारतीय शेयर मार्केट में बढ़ेगी हलचल

Jan 19, 2026 06:02 am ISTDrigraj Madheshia हिन्दुस्तान टीम
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ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यदि ग्रीनलैंड मुद्दे पर सहयोग नहीं मिला तो अमेरिका नाटो के कुछ यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगा सकता है। इस संभावित फैसले का असर सिर्फ अमेरिका और यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव सोना-चांदी की कीमतों से लेकर भारतीय शेयर बाजार तक दिख सकता है।

ग्रीनलैंड टैरिफ: सोना-चांदी चमकेंगे, भारतीय शेयर मार्केट में बढ़ेगी हलचल

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर एक बार फिर वैश्विक राजनीति और बाजारों में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यदि ग्रीनलैंड मुद्दे पर सहयोग नहीं मिला तो अमेरिका नाटो के कुछ यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगा सकता है। इस संभावित फैसले का असर सिर्फ अमेरिका और यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव सोना-चांदी की कीमतों से लेकर भारतीय शेयर बाजार तक दिख सकता है। भारतीय शेयर बाजार में निकट भविष्य में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। हालांकि, लंबी अवधि में भारत के लिए नए व्यापारिक अवसर भी उभर सकते हैं।

ग्रीनलैंड विवाद और टैरिफ की धमकी

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने डेनमार्क समेत नाटो के कई सदस्य देशों पर टैरिफ लगाने की बात कही है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और पहले भी ट्रंप इसे खरीदने की इच्छा जता चुके हैं। अब इस मुद्दे को लेकर व्यापारिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जा सकती है। अगर यह टैरिफ लागू होते हैं, तो वैश्विक व्यापार तनाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

सोना-चांदी पर क्या होगा असर

भू-राजनीतिक तनाव बढ़ते ही निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। ऐसे में सोना और चांदी हमेशा पहली पसंद बनते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की टैरिफ धमकी से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ेगी, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आ सकती है। डॉलर में कमजोरी आने की स्थिति में भी कीमती धातुओं को समर्थन मिलता है। भारत में भी इसका असर दिख सकता है और घरेलू बाजार में सोना-चांदी महंगे हो सकते हैं।

भारतीय शेयर बाजार में बढ़ सकती है अस्थिरता

ट्रंप के टैरिफ ऐलान से अगर यूरोप और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ता है, तो इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अल्पकाल में भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। खासकर आईटी, मेटल, ऑटो, फार्मा, टेक्सटाइल और जेम्स-ज्वेलरी जैसे सेक्टरों पर दबाव आ सकता है, जो वैश्विक व्यापार और निर्यात पर काफी हद तक निर्भर हैं।

कुछ सेक्टरों को मिल सकता है फायदा

हालांकि, हर असर नकारात्मक नहीं होगा। अगर यूरोपीय देश अमेरिका से आयात कम करते हैं, तो भारत के लिए नए व्यापारिक अवसर खुल सकते हैं। इसके अलावा, भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता इस स्थिति में तेजी पकड़ सकता है। यदि यह समझौता आगे बढ़ता है, तो भारतीय निर्यातकों को लंबे समय में फायदा मिल सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत

विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि निवेशक फिलहाल सतर्क रहें। अल्पकाल में बाजार में उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता। सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना-चांदी में रुचि बढ़ सकती है। लंबी अवधि के निवेशक मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान दें और घबराहट में फैसले न लें।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया:-लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 6 साल से बिजनेस टीम का अहम हिस्सा हैं। दृगराज को पत्रकारिता में 21 वर्षों का लंबा अनुभव है। इन्होंने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी स्पेशल खबरों से खास पहचान बनाई है। शेयर मार्केट, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी पर विशेष पकड़। मैथ्स से ग्रेजुएट, मास कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस में पीजी डिप्लोमा। दृगराज, रिसर्च और एनॉलिस के जरिए मार्केट डेटा को आसान भाषा में 'कुछ अलग' पाठकों तक पहुंचाते हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले साढ़े सात साल तक हिन्दुस्तान अखबार में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा सहारा समय, दैनिक जागरण, न्यूज नेशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

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