नए लेबर कोड से बढ़ेगी ग्रेच्युटी, क्या है नया फॉर्मूला, किस पर कितना पड़ेगा असर?
Gratuity Rule Change 2026: देश में लागू नए लेबर कोड्स के बाद ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों में अहम बदलाव हुआ है। इससे ग्रेच्युटी के कैलकुलेशन पर सीधा असर पड़ेगा। इसका फायदा कर्मचारियों को मिलेगा, क्योंकि अब पहले के मुकाबले ज्यादा ग्रेच्युटी मिलने की संभावना बढ़ गई है।

Gratuity Rule Change 2026: देश में लागू नए लेबर कोड्स के बाद ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों में अहम बदलाव हुआ है। सबसे बड़ा बदलाव ‘वेतन’ की परिभाषा में किया गया है, जिससे ग्रेच्युटी के कैलकुलेशन पर सीधा असर पड़ेगा। इसका फायदा कर्मचारियों को मिलेगा, क्योंकि अब पहले के मुकाबले ज्यादा ग्रेच्युटी मिलने की संभावना बढ़ गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये नियम 21 नवंबर 2025 से लागू माने जाएंगे।
5 साल की सेवा का नियम कायम
हालांकि, नए कानूनों के बावजूद ग्रेच्युटी की मूल व्यवस्था पहले जैसी ही बनी हुई है। कर्मचारियों को अब भी कम से कम पांच साल की निरंतर सेवा पूरी करने पर ही ग्रेच्युटी मिलेगी। यह राशि रिटायरमेंट, इस्तीफा, नौकरी छोड़ने, मृत्यु या विकलांगता जैसी स्थितियों में दी जाती है। कैलकुलेशन का आधार भी लास्ट सैलरी और टोटल सर्विस पीरियड ही रहेगा।
फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत
नए नियमों के तहत अब निश्चित अवधि यानी फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। अगर ऐसा कर्मचारी कम से कम एक साल की सर्विस पूरी करता है, तो उसे उसके कार्यकाल के अनुपात में ग्रेच्युटी दी जाएगी। इससे कॉन्ट्रैक्ट और प्रोजेक्ट आधारित नौकरियों में काम करने वाले कर्मचारियों को बड़ा फायदा होगा, जो पहले इस लाभ से वंचित रहते थे।
ग्रेच्युटी की गणना कैसे होगी
ग्रेच्युटी की गणना का फॉर्मूला पहले जैसा ही रखा गया है, लेकिन वेतन की नई परिभाषा के कारण इसकी राशि में अंतर आएगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी की लास्ट सैलरी 52,000 रुपये है और उसने 10 साल काम किया है, तो उसकी ग्रेच्युटी लगभग 3 लाख रुपये के आसपास होगी।
क्यों बढ़ सकती है आपकी ग्रेच्युटी
नए नियमों में यह तय किया गया है कि बेसिक सैलरी कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत होनी चाहिए। पहले कई कंपनियां बेसिक सैलरी कम और अलाउंस ज्यादा रखती थीं, जिससे ग्रेच्युटी कम बनती थी। अब अगर भत्ते ज्यादा होंगे, तो उन्हें बेसिक सैलरी में जोड़ा जाएगा। इससे ग्रेच्युटी की गणना का आधार बढ़ेगा और कर्मचारियों को ज्यादा भुगतान मिलेगा। कई मामलों में ग्रेच्युटी 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
कर्मचारियों और कंपनियों पर क्या होगा असर
इन नए नियमों से कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि उनकी रिटायरमेंट सुरक्षा मजबूत होगी और सैलरी स्ट्रक्चर अधिक पारदर्शी बनेगा। वहीं कंपनियों के लिए यह बदलाव लागत बढ़ाने वाला साबित हो सकता है, क्योंकि उन्हें अपनी सैलरी स्ट्रक्चर को नए नियमों के अनुसार ढालना होगा।
नए लेबर कोड्स ने ग्रेच्युटी को अधिक व्यापक और कर्मचारी हित में बना दिया है। खासतौर पर वे कर्मचारी जिनकी सैलरी में पहले ज्यादा अलाउंस शामिल होते थे, उन्हें अब सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


