डिस्काउंट पर शेयर बेचेगी सरकार, रेलवे से जुड़ी कंपनी में स्टेक कटौती का है प्लान
सरकार भारतीय रेल वित्त निगम (आईआरएफसी) की बिक्री पेशकश के तहत आईआरएफसी के 26.13 करोड़ से अधिक शेयर यानी दो प्रतिशत हिस्सेदारी को बेच रही है। इसके साथ समान संख्या में शेयरों का 'ग्रीन शू' विकल्प भी रखा गया है।

केंद्र सरकार भारतीय रेल वित्त निगम (आईआरएफसी) में चार प्रतिशत तक हिस्सेदारी को बिक्री पेशकश (ओएफएस) के जरिये 104 रुपये प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य पर बेचेगी। आईआरएफसी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि यह ओएफएस बुधवार को संस्थागत निवेशकों के लिए और गुरुवार को खुदरा निवेशकों के लिए खुलेगा। सरकार इस बिक्री पेशकश के तहत आईआरएफसी के 26.13 करोड़ से अधिक शेयर यानी दो प्रतिशत हिस्सेदारी को बेच रही है। इसके साथ समान संख्या में शेयरों का 'ग्रीन शू' विकल्प भी रखा गया है। यदि यह विकल्प पूरी तरह इस्तेमाल होता है तो कुल बिक्री 52.26 करोड़ से अधिक शेयरों यानी चार प्रतिशत हिस्सेदारी तक पहुंच सकती है। सरकार को 104 रुपये प्रति शेयर के भाव पर चार प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री से लगभग 5,430 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
शेयर का हाल
इस बीच, आईआरएफसी के शेयर बीएसई पर पिछले बंद भाव के मुकाबले 2.19 प्रतिशत गिरकर 109.40 रुपये पर बंद हुए। शेयर का इंट्रा-डे ट्रेडिंग रेंज 111.55 रुपये से 109.10 रुपये के बीच रहा। शेयर के 52 हफ्ते का हाई 148.90 रुपये और 52 हफ्ते का लो 108.05 रुपये है। शेयर की वर्तमान कीमत और ओएफएस प्राइस की तुलना करें तो डिस्काउंट में डील होगी।
कैसे रहे कंपनी के नतीजे?
आईआरएफसी ने जनवरी में घोषणा की थी कि उसने वित्तीय वर्ष के पहले नौ महीनों के भीतर ही ₹60,000 करोड़ के अपने पूरे वर्ष के स्वीकृत लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया है। यह अपडेट कंपनी के दिसंबर तिमाही के परिणामों के साथ साझा किया गया था। इस तिमाही में नेट प्रॉफिट पिछले वर्ष की तुलना में 10.5% बढ़कर ₹1,802 करोड़ हो गया, जो कंपनी द्वारा अब तक का उच्चतम तिमाही लाभ है। राजस्व में 1.5% की गिरावट आई और यह एक वर्ष पहले के ₹6,763 करोड़ से घटकर ₹6,661 करोड़ हो गया।
यह गिरावट मुख्य रूप से रेल मंत्रालय द्वारा परियोजना पट्टा समझौते पर दी गई मोहलत के एक वर्ष के विस्तार के कारण हुई, जिससे राजस्व प्रभावित हुई। कंपनी चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज कुमार दुबे ने कहा था कि कंपनी का ₹30,000 करोड़ के वितरण का लक्ष्य सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और तीसरी तिमाही के अंत तक लगभग तीन-चौथाई राशि वितरित की जा चुकी है। कंपनी के प्रबंधन के अंतर्गत एसेट्स बढ़कर रिकॉर्ड ₹4.75 लाख करोड़ हो गईं और कंपनी ने अपने शून्य गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) का दर्जा बरकरार रखा है। दिसंबर तिमाही में कंपनी की ओर से डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया के विश्व बैंक लोन के 9,821 करोड़ रुपये का री-फाइनेंस भी किया गया।
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