न्यू लेबर कोड में EPFO के नियमों में होगा बड़ा बदलाव, सरकार ने संसद में दी यह जानकारी
EPFO Latest News: केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि नई लेबर कोड व्यवस्था लागू होने के बाद भी फिलहाल कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की मौजूदा व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव करने की योजना नहीं है।

EPFO Latest News: केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि नई लेबर कोड व्यवस्था लागू होने के बाद भी फिलहाल कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की मौजूदा व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव करने की योजना नहीं है। राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी मौजूदा EPF स्कीम कुछ समय तक पहले की तरह ही जारी रहेगी।
क्या है डिटेल
दरअसल, राज्यसभा सांसद सन्दोश कुमार पी ने सरकार से पूछा था कि क्या EPF जमा राशि पर मिलने वाली ब्याज दर बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है और क्या नई लेबर कोड के तहत EPFO स्कीम में कोई बदलाव होगा। इस पर सरकार ने बताया कि EPF पर ब्याज दर तय करने का प्रावधान कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 में पहले से तय है और उसी के अनुसार यह निर्णय लिया जाता है।
EPF जमा पर ब्याज दर तय करती है सरकार
सरकार के अनुसार, EPF जमा पर ब्याज दर तय करने का अंतिम फैसला केंद्र सरकार करती है, लेकिन यह निर्णय केंद्रीय न्यासी बोर्ड से सलाह लेने के बाद लिया जाता है। इस बोर्ड में सरकार, कर्मचारियों और नियोक्ताओं के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। ब्याज दर तय करते समय यह भी देखा जाता है कि EPFO के निवेश से होने वाली कमाई और फंड की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रहे और ब्याज खाते में किसी तरह की कमी या ओवरड्रॉ न हो।
क्या है वर्तमान सिस्टम
नई श्रम सुधार व्यवस्था के तहत लागू होने वाला सामाजिक सुरक्षा पर संहिता, 2020 भी EPF सिस्टम की मूल संरचना को बरकरार रखता है। सरकार ने बताया कि जब यह कोड लागू होगा, तब भी मौजूदा EPF स्कीम एक साल तक या तब तक जारी रहेगी जब तक कि वह नए कानून से टकराव में नहीं आती। यानी शुरुआत में कर्मचारियों को EPF से जुड़े नियमों में अचानक कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा और नई व्यवस्था धीरे-धीरे लागू की जाएगी।
दरअसल, सामाजिक सुरक्षा पर संहिता, 2020 देश के चार बड़े लेबर कोड में से एक है, जिसका उद्देश्य अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा कानूनों को एक साथ लाकर व्यवस्था को आसान बनाना है। इस कोड के तहत कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948, ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 और मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 जैसे कई पुराने कानूनों को एक ढांचे में लाया गया है।
नई व्यवस्था का मकसद
नई व्यवस्था का एक बड़ा मकसद सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना भी है। इसके तहत संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को तो EPF, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं मिलती ही रहेंगी, साथ ही पहली बार गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए भी अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बनाने का रास्ता खुलता है। इन योजनाओं में बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा और रिटायरमेंट से जुड़ी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।
कुल मिलाकर अभी के लिए EPF खाताधारकों को किसी बड़े बदलाव की चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार के मुताबिक मौजूदा EPF व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी और यदि भविष्य में कोई बदलाव किए भी जाते हैं तो उन्हें धीरे-धीरे लागू किया जाएगा। इसलिए संगठित क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों के लिए EPF आने वाले समय में भी रिटायरमेंट सेविंग का एक अहम आधार बना रहेगा।
लेखक के बारे में
Varsha Pathakवर्षा पाठक लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं और पिछले 4 सालों से इस संस्थान से जुड़ी हुई हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें लगभग 8 साल का अनुभव है। उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। बिहार की रहने वाली वर्षा वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के बिजनेस सेक्शन के लिए खबरें लिखती हैं। उन्हें स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, यूटिलिटी, टैक्स, बजट, एक्सप्लेनर, इंटरव्यूज और कॉरपोरेट सेक्टर से जुड़ी खबरों की समझ है। जटिल आर्थिक विषयों को सरल, तथ्यात्मक और पाठकों के लिए उपयोगी भाषा में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की विशेषता है। हिन्दुस्तान से पहले वर्षा दैनिक भास्कर (प्रिंट), मनी भास्कर और नेटवर्क18 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुकी हैं। उन्हें फील्ड रिपोर्टिंग का अनुभव भी है। डिजिटल पत्रकारिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वर्षा को मनी भास्कर में सबसे अधिक UVs-PVs का पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा, लाइव हिन्दुस्तान में भी वर्षा का टॉप परफॉर्मेंस रहा है और इसके लिए पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
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