सरकार बेच रही इस रेलवे कंपनी के शेयर, OFS के चलते स्टॉक ने पकड़ी रफ्तार
मुख्य बातें
- IRFC Share Price: कंपनी के ऑफर फॉर सेल (OFS) का रिटेल हिस्सा आज खुल रहा है, यानी आम निवेशक आज इस स्टॉक पर अपनी बोली लगा सकेंगे
- कारोबार के दौरान यह स्टॉक 105.30 रुपये के डे हाई पर पहुंच गया

IRFC Share Price: भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC) के शेयर में गुरुवार, 26 फरवरी को करीब एक प्रतिशत की तेजी देखी गई। इसकी वजह यह है कि कंपनी के ऑफर फॉर सेल (OFS) का रिटेल हिस्सा आज खुल रहा है, यानी आम निवेशक आज इस स्टॉक पर अपनी बोली लगा सकेंगे। कारोबार के दौरान यह स्टॉक 105.30 रुपये के डे हाई पर पहुंच गया।
भारत सरकार की ओर से लाए गए इस OFS को बुधवार को संस्थागत निवेशकों से पूरी भागीदारी नहीं मिल पाई। संस्थागत निवेशकों ने लगभग 22.34 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाईं, जो OFS के तहत उनके लिए आरक्षित 23.52 करोड़ से अधिक शेयरों का लगभग 94.98 प्रतिशत है। 104.12 रुपये प्रति शेयर की कीमत के आधार पर, इन बोलियों का मूल्य लगभग 2,326 करोड़ रुपये आंका गया। इस बोली प्रक्रिया के लिए न्यूनतम मूल्य 104 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।
सरकार का ओवरसब्सक्रिप्शन विकल्प का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला
इस बीच, इक्विटी मोर्चे पर सरकार ने मौजूदा OFS में ओवरसब्सक्रिप्शन विकल्प का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया। बुधवार को एक एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि प्रमोटर ने शुरू में 2 प्रतिशत हिस्सेदारी यानी 26,13,70,120 इक्विटी शेयरों तक की पेशकश करने की योजना बनाई थी, साथ ही अतिरिक्त 2 प्रतिशत बेचने का ग्रीनशू विकल्प भी रखा था, लेकिन अब इस ओवरसब्सक्रिप्शन विकल्प का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। प्रस्तावित विनिवेश के बाद भी रेलवे सेक्टर की इस फाइनेंस कंपनी में सरकार की 86.36 प्रतिशत की काफी बड़ी हिस्सेदारी बनी रहेगी।
जापान से समझौता
एक अलग मामले में, बुधवार को बाजार बंद होने के बाद जारी एक बयान में IRFC ने बताया कि उसने 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर जापानी येन जुटाने के लिए एक ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह उधारी एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) मार्ग से ली जाएगी। यह पांच साल का कर्ज असुरक्षित है और टोक्यो ओवरनाइट एवरेज रेट (TONAR) से जुड़ा हुआ है।
कंपनी ने यह भी बताया कि उसने इस लेनदेन के लिए सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (SMBC) और MUFG बैंक की GIFT सिटी शाखाओं वाले बैंकिंग समूह के साथ साझेदारी की है। कंपनी के अनुसार, यह फंड जुटाना दिसंबर 2025 में इसी तरह की गई एक कवायद के बाद हुआ है, तब IRFC ने 300 मिलियन डॉलर के बराबर जापानी येन सफलतापूर्वक जुटाए थे।
कैसे रहे दिसंबर तिमाही के नतीजे
वहीं, दिसंबर तिमाही के नतीजों की बात करें तो कंपनी का नेट प्रॉफिट रिकॉर्ड 1,802 करोड़ रुपये रहा, जबकि उसकी प्रबंधनाधीन संपत्ति (AUM) बढ़कर 4.75 लाख करोड़ रुपये हो गई। कंपनी अपने IRFC 2.0 रोडमैप के तहत रणनीतिक बदलाव से भी गुजर रही है, जिसका उद्देश्य रेल मंत्रालय पर केंद्रित पारंपरिक सिंगल कस्टमर स्ट्रक्चर से हटकर व्यापक रेलवे ईको सिस्टम और एससिएटेड बेसिक फ्रेमवर्क एरिया को कवर करने वाले मल्टी कस्टमर मॉडल की ओर बढ़ना है।
कैसा रहा शेयर का प्रदर्शन
शेयर के प्रदर्शन की बात करें तो यह सरकारी कंपनी का स्टॉक हाल ही में दबाव में रहा है। पिछले एक महीने में इसमें 8 प्रतिशत, तीन महीने में 11 प्रतिशत और एक साल में 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। हालांकि, लंबी अवधि में इसने शानदार रिटर्न दिया है और पिछले पांच वर्षों में यह 325 प्रतिशत उछला है।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


