
सरकारी बैंकों में बढ़ेगी विदेशी निवेश की लिमिट! मोदी सरकार ने किया साफ
यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी। विपक्ष की ओर से उठे सवालों के बीच सरकार ने दोहराया कि मौजूदा नियमों में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मंगलवार (2 दिसंबर) को साफ कर दिया कि फिलहाल पब्लिक सेक्टर बैंकों में विदेशी निवेश (FDI) की सीमा बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। अभी सरकारी बैंकों में FDI की अधिकतम सीमा 20% तय है। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में दी। विपक्ष की ओर से उठे सवालों के बीच सरकार ने दोहराया कि मौजूदा नियमों में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है।

क्या है डिटेल
मंत्री ने बताया कि बैंकों में विदेशी निवेश का ढांचा ‘बैंकिंग कंपनियां अधिग्रहण और हस्तांतरण अधिनियम 1970/80’ और ‘फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट (नॉन-डेट इंस्ट्रूमेंट्स) रूल्स 2019’ के तहत तय होता है। इन नियमों के मुताबिक, सरकारी बैंकों में 20% FDI की सीमा बनी रहेगी, जबकि निजी बैंकों में 74% तक निवेश की अनुमति है। निजी बैंकों में 49% तक निवेश ऑटोमैटिक रूट से और उससे ऊपर सरकारी मंजूरी के साथ किया जा सकता है। RBI के निर्देशों के तहत किसी भी बैंक में 5% या उससे ज्यादा हिस्सेदारी खरीदने के लिए पहले से मंजूरी लेना जरूरी है।
क्या कहते हैं आंकड़े
सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों में 2020 से 2025 के बीच पब्लिक सेक्टर बैंकों में FDI का साल-दर-साल ब्योरा दिया गया। इसमें सबसे ज्यादा विदेशी निवेश स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में रहा, जो पूरे अवधि में 10% से ऊपर रहा और मार्च 2025 में 11.07% पर पहुंच गया। बैंक ऑफ बड़ौदा में विदेशी हिस्सेदारी मार्च 2024 में 12.75% के उच्च स्तर पर पहुंचकर मार्च 2025 में 9.43% पर आ गई। इसी तरह, केनरा बैंक की विदेशी हिस्सेदारी 3.31% से बढ़कर 10.55% तक पहुंच गई।
इसके अलावा, पंजाब नेशनल बैंक की विदेशी हिस्सेदारी 2.30% से बढ़कर 5.85% हो गई। यूनियन बैंक 1.34% से 7.48% तक पहुंच गया। बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और अन्य बैंकों में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज की गई, हालांकि कई छोटे सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश काफी कम रहा। इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक में FDI 1% के आसपास या उससे भी कम बना रहा। कुल मिलाकर, सरकार ने साफ किया कि सीमा बढ़ाने का सवाल फिलहाल एजेंडा में नहीं है।





