विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए विदहोल्डिंग टैक्स खत्म या कम करने पर सरकार कर रही विचार
मुख्य बातें
- सरकार और RBI विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए सरकारी बॉन्ड पर withholding tax घटाने या खत्म करने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन क्या टैक्स हटाने के बाद वाकई में निवेश बढ़ेगा? जानिए क्या होता है विदहोल्डिंग टैक्स और एक्सपर्ट की राय…

सोने पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के बाद अब सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई और कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं। इनमें सरकारी बॉन्ड पर लगने वाले विदहोल्डिंग टैक्स को पूरी तरह खत्म करना या कम करना शामिल है। बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में लोगों से सोना न खरीदने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कार-पूलिंग का उपयोग करने, विदेश यात्रा से बचने की अपील की थी, ताकि विदेशी मुद्रा बचाई जा सके।
क्या होता है विदहोल्डिंग टैक्स?
विदहोल्डिंग टैक्स एक तरह का स्रोत पर कटौती वाला टैक्स (TDS) है, जो विदेशी निवेशकों को भारतीय बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज पर लगता है। फिलहाल, अनिवासियों को अपने भारतीय सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाली ब्याज से कमाई पर करीब 20% का विदहोल्डिंग टैक्स देना पड़ता है। यह दुनिया में सबसे ज्यादा है। इससे पहले साल 2023 तक 5% की रियायती दर थी, जो अब खत्म हो चुकी है।
सरकार और RBI की चिंता
सरकार और RBI की चिंता का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से गिरावट और विदेशी निवेशकों की बिकवाली है। पिछले दो महीनों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 38 अरब डॉलर की कमी आई है। वहीं 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय बाजारों से लगभग 22.5 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। रुपये में भी भारी कमजोरी देखने को मिली है। युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 5% टूट चुका है।
द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों से इन प्रस्तावों पर चर्चा चल रही है। नीति निर्माता विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच विदेशी खाते को सुरक्षित रखने के लिए ये कदम उठाना चाहते हैं।
क्या हैं मतभेद
सूत्रों के मुताबिक, नीति निर्माताओं के बीच इस बात पर मतभेद है कि क्या मौजूदा वैश्विक आर्थिक स्थिति में खासकर अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों और बाहरी खतरों के बीच ये कदम वाकई में ज्यादा निवेश ला पाएंगे। एक बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने चर्चा की कि क्या कोई खास विदेशी जमा योजना लानी चाहिए, लेकिन यह प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।
क्या टैक्स हटाने से निवेश आएगा?
अधिकारियों ने सरकारी बॉन्ड पर विदहोल्डिंग टैक्स को पूरी तरह हटाने पर भी विस्तार से चर्चा की है, लेकिन एक जानकार ने बताया कि क्या टैक्स हटाने के बाद वाकई में निवेश बढ़ेगा, इस आशंका के कारण अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल, किफायत (ऑस्टेरिटी) और विदेशी मुद्रा बचत को प्राथमिकता देने पर जोर है।
चीन में सरकारी बॉन्ड पर विदेशी निवेशकों के लिए विदहोल्डिंग टैक्स अस्थायी रूप से खत्म है, जबकि मलेशिया सरकारी बॉन्ड को इस टैक्स से पूरी तरह छूट देता है। वियतनाम में यह टैक्स सिर्फ 5% है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
पूर्व सेबी मेंबर अनंत नारायण ने कहा कि भारत का विदहोल्डिंग टैक्स विदेशी निवेशकों के लिए बहुत फ्रिक्शन पैदा करता है। उनका कहना है, "मैं यह नहीं कह रहा कि इसे हल करते ही पैसा आ जाएगा, लेकिन यह निश्चित रूप से देश में पैसा आने में एक रुकावट है।"
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


