राहतभरी खबर: इस नए ऑनलाइन सिस्टम से नहीं लगाने पड़ेंगे RTO के चक्कर

Mar 09, 2026 06:51 am ISTDrigraj Madheshia हिन्दुस्तान टीम
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वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब कार या बाइक का लोन चुकाने के बाद आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) से बैंक या फाइनेंस कंपनी का नाम हटवाने के लिए आरटीओ के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

राहतभरी खबर: इस नए ऑनलाइन सिस्टम से नहीं लगाने पड़ेंगे RTO के चक्कर

वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब कार या बाइक का लोन चुकाने के बाद आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) से बैंक या फाइनेंस कंपनी का नाम हटवाने के लिए आरटीओ के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार ने एक नया ऑनलाइन सिस्टम शुरू किया है, जिसके तहत लोन पूरा चुकते ही वाहन की आरसी से हाइपोथिकेशन यानी बैंक का अधिकार अपने-आप हट जाएगा।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने यह व्यवस्था एक मार्च से लागू कर दी है। फिलहाल इसे एक राष्ट्रीयकृत बैंक और पांच गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के साथ जोड़ा गया है। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, चोलामंडलम, श्रीराम फाइनेंस और सुंदरम फाइनेंस जैसी संस्थाएं शामिल हैं। आने वाले समय में इसमें और बैंक व वित्तीय संस्थान भी जोड़े जाएंगे, ताकि यह सुविधा पूरे देश में लागू हो सके।

क्या है नई प्रणाली

सरकारी अधिकारियों के अनुसार यह प्रणाली रिजर्व बैंक के यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (यूएलआई) और परिवहन मंत्रालय के वाहन (Vahan) पोर्टल के बीच डाटा साझा करके काम करती है। जब लोन पूरा चुकता हो जाता है, तो बैंक की तरफ से एनओसी जारी की जाती है और उसी समय सिस्टम आरसी के रिकॉर्ड को अपडेट कर देता है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद वाहन मालिक को वाहन पोर्टल की ओर से एसएमएस भी भेजा जाएगा, जिसमें बताया जाएगा कि आरसी से बैंक का नाम हटा दिया गया है।

पहले यह भी व्यवस्था

अब तक वाहन मालिकों को पहले बैंक से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना पड़ता था, फिर आरटीओ में जाकर आवेदन देना होता था। इसके लिए कई फॉर्म भरने पड़ते थे और दस्तावेज जमा करने पड़ते थे। कई बार लोगों को बार-बार आरटीओ के चक्कर लगाने पड़ते थे और प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। नई व्यवस्था में गाड़ी की आरसी से बैंक का कब्जा अपने आप हट जाएगा।

क्या होता है हाइपोथिकेशन

जब कोई व्यक्ति कार या बाइक लोन पर खरीदता है, तो वाहन की आरसी में बैंक या फाइनेंस कंपनी का नाम दर्ज रहता है। इसका मतलब होता है कि जब तक लोन पूरा नहीं चुकता, तब तक वाहन पर बैंक का कानूनी अधिकार रहता है।

ऐसे काम करेगी नई प्रणाली

नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी। जैसे ही वाहन मालिक लोन की अंतिम किस्त चुका देगा, बैंक डिजिटल सिस्टम में इसकी जानकारी अपडेट कर देगा। इसके बाद सरकारी प्लेटफॉर्म पर वाहन के रिकॉर्ड से बैंक का नाम अपने-आप हट जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में किसी व्यक्ति को मैन्युअल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होगी।

क्या बदलेगा

- लोन चुकाने के बाद बैंक डिजिटल रूप से जानकारी अपडेट करेगा

- सिस्टम खुद आरसी से बैंक का नाम हटा देगा

- वाहन मालिक को आरटीओ जाने की जरूरत नहीं होगी

- अपडेटेड डिजिटल आरसी ऑनलाइन मिल जाएगी

- वाहन बेचने या ट्रांसफर करने में आसानी

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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