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निवेशकों के लिए खुशखबरी, म्यूचुअल फंड की फीस घटी, सेबी के नए नियम से इन शेयरों में उछाल

निवेशकों के लिए खुशखबरी, म्यूचुअल फंड की फीस घटी, सेबी के नए नियम से इन शेयरों में उछाल

संक्षेप:

SEBI New Rules: सेबी का यह कदम फंड हाउसों द्वारा लगाए जाने वाले खर्चों की जटिलता को दूर करने, अधिक स्पष्टता लाने और निवेशकों के हितों को मजबूत करने के उद्देश्य से है। SEBI के ताजा ऐलान के बाद HDFC AMC, Nippon Life India AMC और Nuvama Wealth Management के शेयर गुरुवार को 6% तक चढ़े।

Dec 18, 2025 10:07 am ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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भारतीय पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने म्यूचुअल फंड कंपनियों द्वारा निवेशकों से लिए जाने वाले वार्षिक शुल्क (एक्सपेंस रेशियो) को कम कर दिया है। सेबी का यह कदम फंड हाउसों द्वारा लगाए जाने वाले खर्चों की जटिलता को दूर करने, अधिक स्पष्टता लाने और निवेशकों के हितों को मजबूत करने के उद्देश्य से है। SEBI के ताजा ऐलान के बाद HDFC AMC, Nippon Life India AMC और Nuvama Wealth Management के शेयर गुरुवार, 18 दिसंबर को 6% तक चढ़े।

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नए नियम क्या हैं?

सेबी ने कैश मार्केट में म्यूचुअल फंड्स द्वारा ली जाने वाली ब्रोकरेज की सीमा को मौजूदा 12 बेसिस प्वाइंट (0.12%) से घटाकर 6 बेसिस प्वाइंट (0.06%) कर दी है। डेरिवेटिव्स सेगमेंट के लिए यह सीमा मौजूदा 5 बेसिस प्वाइंट (0.05%) से घटाकर 2 बेसिस प्वाइंट (0.02%) कर दी गई है।

नियामक ने एक्जिट लोड (निवेश वापस निकालने पर लगने वाला शुल्क) के ऊपर लगने वाले अतिरिक्त 5 बेसिस प्वाइंट के शुल्क को भी खत्म कर दिया है। क्लोज-एंडेड इक्विटी स्कीम्स के लिए BER 1.25% से घटकर 1% हो गया। सेबी ने इंडेक्स फंड्स और ETFs के लिए 1% से 0.9%, जबकि लिक्विड स्कीम फंड ऑफ फंड्स के लिए भी 0.9% कर दिया है। ये सभी संशोधित प्रावधान अगले वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।

निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?

सरल शब्दों में कहें तो कम खर्च दरों का मतलब है कि म्यूचुअल फंड में निवेश निवेशकों के लिए सस्ता हो जाएगा और उनके लंबे समय के लिए फंड बनाने की संभावनाएं बेहतर होंगी। साथ ही, यह सुधार निवेशकों के लिए अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा, जो म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ाने के लिए एक प्रमुख उत्प्रेरक है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

वर्तमान समय में भारतीय शेयर बाजार की सबसे बड़ी चिंता विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का बड़े पैमाने पर निकासी है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार के अनुसार, "यह बाजार के लिए एक मामूली सकारात्मक खबर है। सेबी की घोषणाएं सकारात्मक विकास हैं, लेकिन बाजार की मुख्य चिंता एफआईआई का निकासी है।"

ब्रोकरेज फर्मों का नजरिया

मॉर्गन स्टेनली: बड़े AMC पर 3 से 3.5 बेसिस प्वाइंट असर, जिसमें 60-70% डिस्ट्रीब्यूटर्स को पास-ऑन हो सकता है। नेट प्रभाव 1-1.5 बेसिस प्वाइंट। HDFC AMC के FY25 के ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर 4% और PBT पर 3.4% असर।

जेफरीज: इक्विटी AUM पर 3 से 5 बेसिस प्वाइंट नेट असर, जिसे AMC इकोसिस्टम से शेयर कर सकते हैं।

CLSA: AMC कमाई पर न्यूट्रल। TER पर -2 से +3 बेसिस प्वाइंट का असर, प्रॉफिटेबिलिटी ज्यादातर अपरिवर्तित।

बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सेबी के इस कदम से बाजार में रिटेल निवेशकों की तरलता बढ़ सकती है और यह उम्मीद करना समझ में आता है कि इन सुधारों से म्यूचुअल फंड में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, सेबी का यह कदम बाजार पर कोई बड़ा प्रभाव डालने वाला नहीं है।

शेयर कीमतों पर क्या पड़ा प्रभाव: HDFC AMC ₹2,644 (+4%), निप्पॉन लाइफ ₹911 (+5.3%), नुवामा ₹7,335 (+2.3%)।

(डिस्‍क्‍लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। यहां सिर्फ शेयर के परफॉर्मेंस की जानकारी दी गई है, यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया:-लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 6 साल से बिजनेस टीम का अहम हिस्सा हैं। दृगराज को पत्रकारिता में 21 वर्षों का लंबा अनुभव है। इन्होंने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी स्पेशल खबरों से खास पहचान बनाई है। शेयर मार्केट, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी पर विशेष पकड़। मैथ्स से ग्रेजुएट, मास कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस में पीजी डिप्लोमा। दृगराज, रिसर्च और एनॉलिस के जरिए मार्केट डेटा को आसान भाषा में 'कुछ अलग' पाठकों तक पहुंचाते हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले साढ़े सात साल तक हिन्दुस्तान अखबार में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा सहारा समय, दैनिक जागरण, न्यूज नेशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

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