कब सोना बन जाता है बेहतर विकल्प? क्या चांदी फिर पकड़ सकती है रफ्तार?
Gold-Silver Ratio: जब अमेरिका और इजराइल ईरान पर हमला कर रहे हैं और ईरान पूरी ताकत से जवाब दे रहा है, ऐसे में सोने की चमक बरकरार है, जबकि चांदी कमजोर पड़ती दिख रही है। चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है और इसका इस्तेमाल उद्योगों में भी होता है, इसलिए निवेशक इसे कम पसंद करते हैं।

पिछले साल चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया था, लेकिन जब मुश्किल वक्त आता है, तो सोना ही सबसे आगे आती है। मध्य पूर्व में हाल में शुरू हुए संघर्ष ने इस बात को साफ कर दिया है। जब अमेरिका और इजराइल ईरान पर हमला कर रहे हैं और ईरान पूरी ताकत से जवाब दे रहा है, ऐसे में सोने की चमक बरकरार है, जबकि चांदी कमजोर पड़ती दिख रही है। दोनों ही कीमती धातुओं को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है और इसका इस्तेमाल उद्योगों में भी होता है, इसलिए निवेशक इसे कम पसंद करते हैं। सोने और चांदी के बीच इस खिंचाव को समझने के लिए कारोबारी हमेशा एक आसान पैमाना ‘गोल्ड-सिल्वर रेशियो’ पर नजर रखते हैं।
क्या है गोल्ड-सिल्वर रेशियो
गोल्ड-सिल्वर रेशियो बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की जरूरत होगी। कीमती धातुओं के बाजार में सोने और चांदी की कीमत और प्रदर्शन को परखने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर, पिछले 10 सालों में यह रेशियो औसतन 80:1 के आसपास रहा है। व्हाइटओक कैपिटल के एक विश्लेषण के मुताबिक, जब यह 50:1 से नीचे आता है, तो चांदी सस्ती नहीं रह जाती।
मौजूदा समय में यह रेशियो क्या संकेत दे रहा है?
अमेरिका में सोने की कीमत 5,166.11 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 84.35 डॉलर प्रति औंस के हिसाब से यह रेशियो अब 62 के करीब पहुंच रहा है। साल की शुरुआत में जहां यह 45 के स्तर से नीचे था, वहीं अब इसमें तेजी से उछाल आया है। इसकी वजह चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा गिरावट रही।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी विश्लेषक मानव मोदी के मुताबिक, अब यह रेशियो एक नए दायरे में दिख रहा है। उनका कहना है कि 55 से 60 निचला स्तर और 75 से 80 या अधिकतम 85 ऊपरी स्तर हो सकता है।
बोनांजा के वरिष्ठ कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के साथ यह रेशियो 62 पर स्थिर हो गया है और फिर ऊपर जाने के संकेत दे रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ता हुआ रेशियो आमतौर पर यही दिखाता है कि निवेशक सुरक्षा के लिहाज से सोने को ज्यादा पसंद कर रहे हैं और विकास की उम्मीदें कमजोर हो रही हैं।
क्या चांदी फिर पकड़ सकती है रफ्तार?
इतिहास देखें तो यह रेशियो उतार-चढ़ाव भरे चक्रों में चलता है। जब भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक दबाव बढ़ता है, तो सोना ही असली सुरक्षित निवेश बनकर उभरता है। हालांकि, जब कीमती धातुओं में तेजी का दौर शुरू होता है, तो चांदी भी पीछे नहीं रहती। आईएनवीएसेट पीएमएस के हर्षल दासानी का कहना है कि अगर हालात सोने-चांदी के पक्ष में रहे, जैसे वैश्विक नीतियों में नरमी और लगातार अनिश्चितता, तो चांदी प्रदर्शन के मामले में सोने की बराबरी कर सकती है।
अब सोने और चांदी में कैसे करें निवेश?
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का कोई अंत नजर नहीं आ रहा। ऐसे में अगर तनाव और बढ़ता है तो सोना ही बेहतर प्रदर्शन करता रहेगा। इसीको देखते हुए, मानव मोदी सुझाव देते हैं कि कीमती धातुओं में अपने कुल निवेश का 10-15% हिस्सा रखना चाहिए। इस हिस्से में से 70-75% सोने में और बाकी 25-30% चांदी में निवेश करना फिलहाल सही रणनीति हो सकती है।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


