सोने के भाव ने पकड़ी रफ्तार, 4,000 डॉलर के पार लौटा भाव, MCX पर भी रिकवरी
मुख्य बातें
- एमसीएक्स पर भी रात 11:30 बजे गोल्ड 143200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो गुरुवार सुबह 142178 रुपये पर था
- इसी तरह चांदी भी 220940 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई
- सोने के भाव में एक बार फिर लौटी तेजी के पीछे क्या कारण हैं, आइए जानें…

एक दिन पहले ही 4000 डॉलर प्रति औंस के नीचे आने वाला सोना एक बार फिर तेजी की राह पर लौट आया है। गुरुवार रात को सोना 1.1 फीसदी तक उछलकर एक बार फिर 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया। गुरुवार के कारोबार के अंत में हाजिर सोना 0.7 फीसदी की बढ़त के साथ 4,026.73 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। चांदी 0.8 फीसदी चढ़कर 57.86 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई एमसीएक्स पर भी रात 11:30 बजे गोल्ड 143200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो गुरुवार सुबह 142178 रुपये पर था। इसी तरह चांदी भी 220940 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई।
सोने के भाव में क्यों आई तेजी
अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम आने के बाद सोने की कीमतों में जोरदार रिकवरी देखने को मिली। कारोबारियों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं पर अपने अनुमान को कुछ नरम किया, जिससे अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर प्राइस इंडेक्स के मासिक आधार पर अनुमान से कम रहने की वजह से गुरुवार को ट्रेजरी यील्ड में गिरावट दर्ज की गई, हालांकि आय और खर्च के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे।
डॉलर में गिरावट से कीमती धातुओं को मिला सहारा
डॉलर की मजबूती पर लगाम लगने से भी सोने को राहत मिली। डॉलर के प्रदर्शन को मापने वाला ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स लगातार तीन दिन की तेजी के बाद गुरुवार को हल्का नीचे आ गया। डॉलर के कमजोर पड़ने से दूसरी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए डॉलर में तय होने वाली वस्तुएं सस्ती हो जाती हैं, जिससे चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों को भी फायदा पहुंचा।
फेड के तेवरों ने बढ़ाई बाजार की चिंता
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीति निर्माता हाल के दिनों में ऊंची ब्याज दरों के पक्ष में तेजी से सुर मिलाते दिख रहे हैं। नए चेयरमैन केविन वॉर्श ने पिछले हफ्ते अपनी पहली दर-निर्धारण बैठक में ही सख्त रुख अपनाया। सख्त मौद्रिक नीति की आशंका सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों के लिए नकारात्मक होती है, क्योंकि इससे ट्रेजरी जैसी ब्याज देने वाली संपत्तियां अधिक आकर्षक बन जाती हैं।
ओवरसी-चाइनीज बैंकिंग कॉर्प के रणनीतिकार क्रिस्टोफर वोंग का कहना है कि फिलहाल सोने के सामने हॉकिश फेड की रीप्राइसिंग, मजबूत वास्तविक यील्ड और 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के टूटने से अभी हर तेजी पर बिकवाली का दबाव बना रह सकता है।
लंबी तेजी का दौर हुआ खत्म
हाल के महीनों में सोने में आई गिरावट एक लंबी तेजी के दौर के अंत का संकेत देती है। पिछले तीन सालों में से हर साल सोने ने दहाई अंकों में बढ़त दर्ज की थी और इस दौरान इसके दाम दोगुने से भी अधिक हो गए थे। केंद्रीय बैंकों, फंड मैनेजरों और खुदरा निवेशकों ने जमकर इस ट्रेड में हिस्सा लिया।
20 फीसदी से ज्यादा की हो चुकी है गिरावट
यह तेजी जनवरी के आखिर में तब दम तोड़ने लगी, जब सोना 5,600 डॉलर प्रति औंस के करीब अपने ऑल टाईम हाई को छू चुका था। इस महीने तक आते-आते इसमें 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी थी, जिसे आमतौर पर मंदी के बाजार की शुरुआत माना जाता है। सोने के प्रदर्शन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला कारण रहा अमेरिका-ईरान युद्ध, जिसने ऊर्जा की कीमतों को बढ़ाया और महंगाई को हवा दी।


