सोने में ऐतिहासिक गिरावट! 2008 के बाद पहली बार इतना बड़ा क्रैश, जानिए अभी खरीदें या करें इंतजार?
मुख्य बातें
- जून 2026 में सोने की कीमतों में 12% की बड़ी गिरावट दर्ज हुई है, जो 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट है
- गोल्ड $4,000 के नीचे पहुंच चुका है
- आइए इसके पीछे की वजह, एक्सपर्ट की राय और आगे सोना खरीदना फायदे का सौदा होगा या नहीं, इसके बारे में जरा विस्तार से जानते हैं

सोना निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। जून 2026 गोल्ड मार्केट के लिए बेहद खराब महीना साबित हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे फिसल गई है और जून महीने में इसमें करीब 12% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह अक्टूबर 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सोने की सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब सोना और गिरेगा या फिर यहां से तेज वापसी देखने को मिल सकती है?
पिछले 3 महीनों में सोने में लगभग 20% की गिरावट
स्पॉट गोल्ड बुधवार को लगभग 3,975 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि एक दिन पहले यह 3,943 डॉलर तक लुढ़क गया था, जो पिछले साल नवंबर के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 4,000 डॉलर के नीचे फिसलकर करीब 3,988 डॉलर पर पहुंच गए। पिछले तीन महीनों में सोने में लगभग 20% की गिरावट आ चुकी है, जबकि 6 महीनों में यह करीब 8% कमजोर हुआ है। हालांकि, पिछले एक साल की बात करें तो सोना अभी भी करीब 20% की बढ़त पर बना हुआ है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट के अनुसार सोने की इस तेज गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी है। जब बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशक सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्ति से पैसा निकालकर बॉन्ड में निवेश करना शुरू कर देते हैं। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर भी लगातार मजबूत हो रहा है। डॉलर मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना महंगा पड़ता है, जिससे मांग कमजोर होती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना भी निवेशकों को डरा रही है। CME FedWatch Tool के मुताबिक सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 67% तक पहुंच चुकी है। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने पर और दबाव बन सकता है। दूसरी ओर, ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव तथा मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचा बनाए रखा है। महंगा तेल महंगाई बढ़ाता है और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं, जिसका सीधा असर सोने पर पड़ता है।
जून 2013 के बाद सबसे बड़ी तिमाही गिरावट
जून 2026 सोने के लिए केवल मासिक ही नहीं बल्कि तिमाही आधार पर भी बेहद कमजोर साबित हुआ है। यह 2024 के बाद पहली तिमाही गिरावट है और जून 2013 के बाद सबसे बड़ी तिमाही कमजोरी भी मानी जा रही है। उस समय भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ब्याज दरों में बदलाव ने गोल्ड मार्केट को झटका दिया था।
हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। टाटा म्यूचुअल फंड का कहना है कि निकट भविष्य में सोने में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के लिए इसके फंडामेंटल अब भी मजबूत बने हुए हैं। उनका मानना है कि अगर कीमतों में और गिरावट आती है, तो यह निवेशकों के लिए खरीदारी का अच्छा मौका साबित हो सकता है। भारतीय निवेशकों के लिए रुपये की कमजोरी भी राहत दे सकती है, क्योंकि इससे घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार जितनी बड़ी गिरावट नहीं दिखाई देती।
ऑगमोंट की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी के अनुसार सोने ने 4,000 डॉलर का महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर तोड़ दिया है। अगर यह कमजोरी जारी रहती है, तो कीमतें 3,600 डॉलर तक भी जा सकती हैं। हालांकि, बाजार फिलहाल ओवरसोल्ड स्थिति में है, इसलिए यहां से 4,100 से 4,165 डॉलर तक की तेज रिकवरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
अब निवेशकों की नजर अमेरिका के रोजगार संबंधी आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अगले फैसलों पर रहेगी। अगर आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं या ब्याज दरों को लेकर राहत मिलती है, तो सोने में दोबारा तेजी लौट सकती है। लेकिन अगर डॉलर और बॉन्ड यील्ड मजबूत बने रहे तो निकट भविष्य में गोल्ड मार्केट में अस्थिरता जारी रह सकती है। ऐसे में एक्सपर्ट लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखने और गिरावट के दौरान चरणबद्ध निवेश की सलाह दे रहे हैं।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते
हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
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