सोना गिरकर बड़े रिकॉर्ड बनाने की ओर, ₹1.40 लाख के करीब, चांदी ₹2.20 पर आई
मुख्य बातें
- सोने की कीमतें अक्टूबर 2008 के बाद से अपनी सबसे बड़ी मासिक गिरावट की तरफ बढ़ रही हैं
- वहीं, MCX पर गोल्ड का रेट 1.28% गिरकर ₹1,40,574 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि सिल्वर फ्यूचर 1.04% टूटकर ₹2,20,322 प्रति किलो पर आ गया

MCX पर मंगलवार, 30 जून को सुबह के कारोबार में सोने और चांदी के दाम जोरदार गिरावट के साथ खुले। डॉलर में मजबूती और कमजोर वैश्विक संकेतों की वजह से ऐसा हुआ। ऊपर से अटकलें ये हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरें बढ़ा सकता है। करीब सुबह 9:10 बजे, MCX पर गोल्ड का रेट 1.28% गिरकर ₹1,40,574 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि सिल्वर फ्यूचर 1.04% टूटकर ₹2,20,322 प्रति किलो पर आ गया।
गिरावट की असली वजह क्या है
सोने-चांदी में ये तेज गिरावट डॉलर के मजबूत होने की वजह से आई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि लगातार महंगाई के चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल तीन बार ब्याज दरें बढ़ा सकता है। डॉलर इंडेक्स 101 के ऊपर पहुंच गया है और लगातार दूसरे महीने बढ़त की तरफ है। इससे विदेशी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना और भी महंगा हो जाता है।
ब्याज दरों के संकेत और आने वाले आंकड़े
वैसे तो सोना महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षा कवच माना जाता है, लेकिन जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं तो इस पर दबाव बनता है, क्योंकि इस पर कोई ब्याज या रिटर्न नहीं मिलता। CME फेडवॉच टूल के मुताबिक, कारोबारी इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा तीन बार दरें बढ़ाए जाने की संभावना जता रहे हैं। इसी हफ्ते आने वाले जून के ADP एम्प्लॉयमेंट और नॉनफार्म पेरोल के आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की दिशा को लेकर और संकेत देंगे।
सोना गिरकर बड़े रिकॉर्ड बनाने की ओर
रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, सोने की कीमतें अक्टूबर 2008 के बाद से अपनी सबसे बड़ी मासिक गिरावट की तरफ बढ़ रही हैं। हाजिर सोने का भाव फिलहाल $3,956.92 प्रति औंस चल रहा है और जून में अब तक करीब 13% टूट चुका है। लगातार चौथे महीने गिरने की राह पर है। इतना ही नहीं, ये 2024 के बाद से पहली तिमाही गिरावट और जून 2013 की तिमाही के बाद की सबसे बड़ी गिरावट साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय: महंगाई और ब्याज दर का डर
मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें लगातार चौथे महीने गिर रही हैं क्योंकि लगातार महंगाई की चिंता और अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद ने बाजार की धारणा को कमजोर बनाए रखा है।"
उन्होंने ये भी कहा कि बाजारों को इस बात की भी चिंता है कि ऊंची ऊर्जा लागत और AI की वजह से सेमीकंडक्टर चिप्स की बढ़ती मांग, महंगाई को लंबे समय तक ऊंचा रख सकती है, जिससे निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना कम हो जाती है।
भू-राजनीतिक हालात
भू-राजनीतिक मोर्चे पर, कतर में अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर असमंजस बना हुआ है। खबरों के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघाई ने कहा है कि मंगलवार या आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच कोई बैठक तय नहीं है। दूसरी ओर, कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के दोहा, कतर जाने की खबर है, जबकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी है।
सिंह ने कहा, "हालांकि अमेरिका-ईरान शांति समझौते से कच्चे तेल की कीमतों को ठंडा होने में मदद मिली, लेकिन नए भू-राजनीतिक तनाव और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की उम्मीद, सोने जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों की मांग को सीमित कर रही है।"
सपोर्ट और रेसिस्टेंस के स्तर
जैन के अनुसार, MCX पर सोने को ₹1,41,100 और ₹1,40,000 पर सपोर्ट, और ₹1,43,600 व ₹1,44,800 पर रेसिस्टेंस है, जबकि चांदी को ₹2,16,600 और ₹2,14,000 पर सपोर्ट तथा ₹2,22,400 और ₹2,25,000 पर रेसिस्टेंस है।
और गिरावट की आशंका
सिंह का मानना है कि अगर सोना निर्णायक रूप से ₹1,40,500 के नीचे टूटता है तो गिरावट तेज होकर अगले बड़े सपोर्ट ₹1,36,000 के आसपास तक जा सकती है। ऊपर की तरफ, ₹1,45,700 से ₹1,46,000 अब तुरंत रेसिस्टेंस जोन बन गया है और इस स्तर तक कोई भी रिकवरी ताजा बिकवाली को आकर्षित कर सकती है, जब तक कि भाव इसके ऊपर बंद न हो जाएं। कुल मिलाकर, उठाव पर बिकवाली की रणनीति बनी रहने की संभावना है।
इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी ने कहा, "MCX पर अगस्त सोना वायदा जुलाई में ₹1,36,000 से ₹1,37,000 तक गिर सकता है, उसके बाद अगस्त में शॉर्ट कवरिंग देखने को मिले। इसी तरह, MCX सितंबर चांदी वायदा उछलने से पहले ₹2,00,000 तक फिसल सकता है।
निवेशक अब क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मोड़ पर सोने-चांदी में आक्रामक दांव लगाने से बचना चाहिए और शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग के लिए अहम सपोर्ट और रेसिस्टेंस लेवल पर ध्यान देना चाहिए। पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन ने कहा, "हमारी सलाह है कि कारोबारी फेड चेयरमैन के भाषण से पहले नई पोजीशन लेने से बचें, लेकिन लंबी अवधि के निवेशक गिरते बाजार में SIP के जरिए जोड़ सकते हैं।"


