सोना 9 साल से अक्षय तृतीया पर दे रहा सॉलिड रिटर्न, क्या इस बार भी दोहराएगा इतिहास?

Drigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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Gold Outlook: इस बार अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना क्या मुनाफे का सौदा साबित होगा?  सोने के भाव कहां तक पहुंच सकते हैं? सोना अभी और सस्ता होगा या महंगा? इस खबर के जरिए एक्सपर्ट्स से इन सभी सवालों के जवाब जानिए।

सोना 9 साल से अक्षय तृतीया पर दे रहा सॉलिड रिटर्न, क्या इस बार भी दोहराएगा इतिहास?

सोने की कीमतों में इस साल काफी उतार-चढ़ाव के देखते हुए इस बार अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना क्या मुनाफे का सौदा साबित होगा? बता दें पिछली अक्षय तृतीया (अप्रैल 2025) के बाद से भारतीय स्पॉट मार्केट में सोने की कीमतों में 60% का उछाल आया है, जिससे निवेशकों की संपत्ति में इजाफा हुआ है। यह लगातार नौवां साल है, जब सोने ने निवेशकों को ठोस रिटर्न दिया है।

अक्षय तृतीया 2026 कब है और इस मौके पर सोना खरीदना क्यों होता है शुभ

भारत में सोना खरीदना सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और शुभ संकेत भी है। कुछ खास त्योहारों, जैसे धनतेरस, दिवाली और अक्षय तृतीया पर सोना खरीदा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे समृद्धि, सौभाग्य और स्थायी धन की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया भी ऐसा ही एक पर्व है, इस बार 19 अप्रैल 2026 को पड़ रहा है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, यह त्योहार भारतीयों के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ है।

सोना खरीदना का क्या यह सही समय है?

इस साल जनवरी में सोना 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था। उसके बाद कीमतों में गिरावट आई है और अब यह करीब 1,50,000 रुपये के स्तर पर है। यह हालिया हाई से लगभग 30,000 रुपये सस्ता है। तेजी के बाद मुनाफावसूली और बढ़ती क्रूड कीमतों के कारण महंगाई की चिंताओं के चलते निवेशकों ने खूब मुनाफा कमाया। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा कीमतें निवेश के लिए एक अच्छा अवसर है।

अक्षय तृतीया से पहले मांग का क्या रुझान है?

चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी एक्सपर्ट कावेरी मोरे के अनुसार, इस साल अक्षय तृतीया से पहले भारत में मांग मजबूत बनी हुई है, हालांकि ऊंची कीमतों ने आम ग्राहकों की भारी खरीदारी को सीमित कर दिया है।

वहीं, एक मुंबई-बेस्ड बुलियन डीलर का कहना है कि इस बार सोने-चांदी की खरीदारी भी बहुत कम है। माहौल ऐसा नहीं लग रहा कि त्योहार नजदीक आ रहा हो। ग्लोबल लेवल पर चीन में सोने की मांग कमजोर पड़ी है, लेकिन वहां का केंद्रीय बैंक लगातार 17वें महीने सोना खरीद रहा है, जो बुलियन में लगातार भरोसा दिखाता है।

क्या आपको अक्षय तृतीया से पहले सोना खरीदना चाहिए?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने की कीमतों की रफ्तार धीमी जरूर होगी, लेकिन मौजूदा रुझान जारी रह सकता है। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और जियो-पॉलिटिकल टेशन को देखते हुए सोना एक फायदे का निवेश बना हुआ है।

INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी कहते हैं, "मौजूदा कीमतों पर सोने को रिटर्न के दौड़ वाला निवेश न समझें, बल्कि इसे अपने पोर्टफोलियो को स्थिर करने वाला साधन मानें।" हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पिछले साल जैसा तगड़ा रिटर्न दोहराना मुश्किल हो सकता है।

एक साथ बड़ी रकम लगाने से बचें

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने में एक साथ बड़ी रकम न लगाएं बल्कि थोड़ा-थोड़ा करके निवेश करें । अगर आपके पास पहले से सोना नहीं है, तो थोड़ा निवेश करना उचित रहेगा, लेकिन अगर आप सिर्फ एक साल में तगड़ा रिटर्न चाहते हैं, तो यह बहुत आक्रामक निवेश का सही समय नहीं है।

सोने की कीमत कितनी जा सकती है?

टेक्नीकल एनालिसिस के अनुसार, अगर सोने की कीमतों में तेजी जारी रही तो यह 1,55,000 रुपये और उसके बाद 1,70,000 रुपये तक जा सकता है। आने वाले महीनों में 1,81,000 रुपये के स्तर को फिर से छूने की भी संभावना है। वहीं गिरावट की स्थिति में पहला सपोर्ट 1,36,200 रुपये है और मजबूत आधार 1,27,500 रुपये।

डिस्क्लेमर: यह लेख विशेषज्ञों की राय और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। सोने में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर सलाह लें।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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