सोने-चांदी के भाव आज भी गिरे, अब ₹1,44,861 पर आया गोल्ड, सिल्वर ₹2.26 लाख के करीब
मुख्य बातें
- Gold Silver Price Today: आज सुबह एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 0.30% गिरकर 1,44,861 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया
- वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 0.11% टूटकर 2,26,137 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी

भारतीय कमोडहटी मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार, 10 जुलाई की सुबह के कारोबार में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। विदेशी बाजारों से कमजोर संकेत और स्थानीय बाजार में कमजोर मांग के कारण यह स्थिति बनी। आज सुबह 9:30 बजे एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 0.30% गिरकर 1,44,861 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 0.11% टूटकर 2,26,137 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें इस हफ्ते गिरावट के साथ बंद होती दिख रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते महंगाई बढ़ने की आशंका है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरें बढ़ा सकता है। यही वजह है कि सोने पर दबाव बना हुआ है। सिंगापुर में सुबह 8:18 बजे स्पॉट गोल्ड 4,123.22 डॉलर प्रति औंस पर था। इस हफ्ते इसमें 1.3% की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं स्पॉट सिल्वर महज 0.1% ऊपर $59.91 प्रति औंस पर पहुंच गई है।
क्यों गिर रहे सोने के भाव
मिडिल ईस्ट में तनाव का असर: मिडिल ईस्ट में हवाई हमले तेज हो गए हैं। अमेरिका ने कहा है कि ईरान के साथ तकनीकी बातचीत जारी रहेगी। इस बीच सोने की कीमतें गिर रही हैं। बता दें पिछले सत्र में लगातार तीन दिन की गिरावट के बाद सोने ने थोड़ी राहत पाई थी।
होर्मुज संकट: अमेरिका और ईरान के बीच हवाई हमलों के बाद भी बातचीत जारी है। अमेरिका ने ईरान पर तेल प्रतिबंध भी फिर से लागू कर दिए हैं। इन घटनाक्रमों ने पिछले महीने हुए अंतरिम शांति समझौते को खतरे में डाल दिया है और होर्मुज से ऊर्जा संसाधनों और अन्य वस्तुओं की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
महंगाई और ब्याज दरों का गणित: सोने के कारोबारियों के लिए चिंता की बात यह है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ती लड़ाई से फेडरल रिजर्व को महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ सकती हैं। इस हफ्ते जारी फेड की जून बैठक के मिनट्स में कुछ अधिकारियों ने ब्याज दरें बढ़ाने की बात कही थी, हालांकि आखिरकार उन्हें स्थिर ही रखा गया। सख्त मौद्रिक नीति आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक होती है, क्योंकि यह ब्याज नहीं देता।
फेड में बदलाव की तैयारी: अमेरिकी फेड में संभावित बदलावों को देखते हुए नए चेयरमैन केविन वार्श ने पांच टास्क फोर्स की घोषणा की है, जो नीति निर्माण के प्रमुख पहलुओं की जांच करेंगी। इनमें प्रमुख शिक्षाविद, पूर्व केंद्रीय बैंकर और कॉर्पोरेट अधिकारी शामिल हैं।
AI का असर: न्यूयॉर्क फेड के चेयरमैन जॉन विलियम्स ने कहा कि अमेरिका में महंगाई के कारणों में वह AI से पैदा होने वाली मांग पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। अगर यह जारी रहा तो केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।
फरवरी से अब तक की स्थिति
पिछले साल फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने की कीमतें 20 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुकी हैं। मुनाफावसूली ने तीन साल की तेजी को खत्म कर दिया और हाल ही में सोना नवंबर के बाद पहली बार 4,000 डॉलर से नीचे चला गया था। हालांकि अभी इस बात के ज्यादा सबूत नहीं हैं कि निवेशक आगे और गिरावट की उम्मीद में बड़े पैमाने पर शॉर्ट पोजीशन ले रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने के लिए अहम सहारा बनी हुई है। चीन के पीपुल्स बैंक ने जून में अधिक सोना खरीदा, जिससे 2015 के बाद से उसकी सबसे लंबी खरीदारी का सिलसिला जारी रहा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के ताजा सर्वे में कहा गया है कि पहले से कहीं ज्यादा केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में अपने भंडार बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं।
4,560 डॉलर तक पहुंच सकता है भाव: एचएसबीसी के मेटल एनालिस्ट जेम्स स्टील ने कहा कि ब्याज दर बढ़ने की उम्मीदें अब काफी हद तक कीमतों में शामिल हो चुकी हैं, फिर भी यह सोने की तेजी को सीमित कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत अमेरिकी डॉलर भी सोने की तेजी में बड़ी बाधा बन सकता है। एचएसबीसी ने 2026 के लिए सोने की औसत कीमत का अनुमान घटाकर 4,560 डॉलर प्रति औंस कर दिया है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


