सोना-चांदी के खरीदारों को झटका, एक बार फिर बिगड़ रहे हालात?
मुख्य बातें
- इस साल जनवरी के महीने में सोना करीब ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था
- वहीं, चांदी ने भी करीब ₹4.25 लाख प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर को टच किया था
- अब एक बार फिर से ऐसे ही हालात बनते नजर आ रहे हैं

अगर आप त्योहारी सीजन के लिए सोने और चांदी की खरीदारी करना चाहते हैं तो ये खबर आपको निराश कर सकती है। दरअसल, सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को एक बार फिर से तूफानी तेजी देखी गई। शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोने का फ्यूचर्स प्राइस ₹1,61,200 प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया। यह पिछली क्लोजिंग से 1,771 रुपये या 1.11% अधिक है।
चांदी के फ्यूचर्स में 3,128 रुपये या 1.29% की बढ़त हुई और वे लगभग 2,46,371 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहे थे। सोने और चांदी की कीमतों में तेजी ऐसे समय में आई है जब इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें लगभग तीन महीने के उच्चतम स्तर पर हैं। बता दें कि इस साल जनवरी में भारत में सोना करीब ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। इसी दौरान चांदी ने भी करीब ₹4.25 लाख प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर देखा था।
क्यों आई है तेजी?
कमजोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों, बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक बार फिर से निवेशकों का सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन एसेट्स की ओर रुख बढ़ा है। एक्सपर्ट बताते हैं कि सोने की कीमतों के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति बेहद अहम है। फिलहाल निवेशकों की नजर अगले महीने फेड द्वारा ब्याज दरों के फैसले पर है। इसके स्थिर रखने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है।
आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं। दूसरी ओर, ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों की तरफ जा सकते हैं। इसके अलावा, अमेरिका की ओर से ईरान पर कड़े प्रतिबंधों की आशंका ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। प्रतिबंधों की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे महंगाई को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
कमजोर हुआ डॉलर
अमेरिकी डॉलर कमजोर हो गया है। डॉलर इंडेक्स करीब 98.8 के आसपास रहा और सप्ताह के दौरान इसमें गिरावट का रुख देखा गया। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर कमजोर होने पर दूसरी मुद्राओं में खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए बुलियन अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। इससे मांग बढ़ सकती है और कीमतों को सहारा मिलता है। कमजोर डॉलर के साथ अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बदलाव ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।


