इंश्योरेंस क्लेम पाना हुआ मुश्किल, बड़े पैमाने पर हो रहे रद्द, 44% बढ़ीं शिकायतें

Jan 07, 2026 06:32 am ISTDrigraj Madheshia हिन्दुस्तान टीम
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भारतीय बीमा बाजार में 2024-25 में क्लेम न मिलने की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। इरडा की रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य और स्वास्थ्य बीमा में 44% की वृद्धि हुई है, जबकि जीवन बीमा शिकायतों में कमी आई है। बीमा कंपनियों के बढ़ते प्रीमियम और लंबी प्रक्रिया से ग्राहक परेशान हैं। पेश है अरुण चट्ठा की रिपोर्ट…

इंश्योरेंस क्लेम पाना हुआ मुश्किल, बड़े पैमाने पर हो रहे रद्द, 44% बढ़ीं शिकायतें

अरुण चट्ठा

स्वास्थ्य बीमा के सापेक्ष किए गए क्लेम के भुगतान को लेकर शिकायतें बढ़ रही हैं। बीमा कंपनियों द्वारा अनुबंध की शर्तों और नियमों का हवाला देकर बड़े पैमाने पर क्लेम को रद्द किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में अस्पताल पॉलिसीधारक को भर्ती करने से बच रहे हैं। कारण, कैशलेस का दावा करने वाली बीमा कंपनियां समय पर इलाज पर खर्च का पूरा भुगतान नहीं कर रही हैं। इसी का नतीजा है कि स्वास्थ्य व सामान्य बीमा को लेकर होने वाली शिकायतों में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जबकि जीवन बीमा शिकायतों में गिरावट आई है।

आंकड़े बताते है कि बीते वित्तीय वर्ष में सामान्य और स्वास्थ्य बीमा के तौर पर बीमा कंपनियों ने 94,248 करोड़ रुपये के 3.26 करोड़ दावों का भुगतान किया है, लेकिन कुल दावों में से आठ प्रतिशत से अधिक दावों को खारिज कर दिया। जबकि पांच प्रतिशत मामले प्रक्रिया में हैं।

क्या कह रही इरडा की रिपोर्ट

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) की वार्षिक रिपोर्ट से पता चलता है कि बीमा कंपनियों का प्रीमियम से होने वाला संग्रह बढ़ रहा है। वर्ष 2023-24 में सामान्य और स्वास्थ्य बीमा से 1,07,680.74 करोड़ रुपया मिला था जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 1,17,504.82 करोड़ रुपये हो गया। यहां पर दिलचस्प आकंड़ा प्रति व्यक्ति को किए गए भुगतान का है।

वर्ष 2024-25 में प्रति व्यक्ति 29,810 रुपये का भुगतान

अगर कुल भुगतान को प्रति व्यक्ति के हिसाब से देखा जाए वर्ष 2024-25 में प्रति व्यक्ति 29,810 रुपये का भुगतान हुआ, जो उससे पहले वित्तीय वर्ष में 31,086 रुपये का भुगतान किया गया था। इस तरह से प्रति व्यक्ति भुगतान में भी 1276 रुपये की गिरावट आई है।

यह गिरावट ऐसे वक्त पर आई है, जबकि कुल पॉलिसीधारकों की संख्या में वित्तीय वर्ष के आधार पर 1.26 प्रतिशत की गिरावट आई है और बीमा कंपनियों का प्रीमियम संग्रह 9.12 प्रतिशत बढ़ गया है।

दावा भुगतान के लिए भटक रहे लोग

भुगतान को लेकर दर्ज की गई शिकायतें की संख्या के अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी बड़ी संख्या में लोग भुगतान न मिलने से परेशान हैं। बीमा भरोसा पोर्टल पर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2.57 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। जबकि वर्ष 2023-24 में 2.15 लाख शिकायतें दर्ज की गई थीं। जीवन बीमा कंपनियों के खिलाफ होने वाली शिकायतों में गिरावट आई है। जबकि सामान्य और स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के खिलाफ शिकायतों में 44.82 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

दर्ज शिकायतें वित्तीय वर्ष के आधार पर तुलनात्मक

बीमा श्रेणी 2023-24 2024-25

जीवन बीमा 1,20,726 1,20,429

सामान्य व स्वास्थ्य बीमा 94,843 1,37,361

पॉलिसी की संख्या में गिरावट

दावे की स्थिति में भुगतान को लेकर आ रही परेशानियों के बीच सभी श्रेणी की बीमा पॉलिसियों में गिरावट आई है। जबकि उससे पहले वित्तीय वर्ष में पॉलिसी की संख्या में 18.49 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई थी।

यह गिरावट उस वक्त पर देखी जा रही है, जब सरकार ने वर्ष 2047 तक हर नागरिक को स्वास्थ्य बीमा कवरेज के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में लगातार बढ़ता प्रीमियम और दावे की स्थिति में मुश्किल होता भुगतान लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी चुनौती है। इस वर्ष बीमा कंपनियों ने स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में बीते वर्ष की तुलना में 37 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है।

बीते वर्ष में पॉलिसी की संख्या

वर्ष पॉलिसी की संख्या (लाख में)

2022-23 226.42

2023-24 268.29

2024-25 264.29

भुगतान में कटौती, लंबी प्रक्रिया के बीच परेशान लोग

रवि शंकर यादव ने सोशल मीडिया के जरिए शिकायत की कि पहले बीमा कंपनी ने स्वास्थ्य दावा यह कह कर खारिज किया कि आपका सम इंश्योर्ड खत्म हो चुका है, फिर उन्होंने दावा मंजूर कर दिया और अब 80 हजार के दावे में से 15 हजार का भुगतान कर रहे हैं।

बिना यह बताए कि सम इंश्योर्ड कैसे खत्म हुआ और पूरे बिल का भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा। अब भुगतान के लिए आठ जनवरी तक का समय मांगा है जबकि अस्पताल तत्काल पैसा जमा करा रहा है। उन्होंने कहा, इंश्योरेंस लोगों की रक्षा के लिए होना चाहिए। पॉलिसीधारक को थकाने और परेशान करने के लिए नहीं।

कैशलेश इलाज नहीं, भुगतान का लंबा इंतजार

शांतिस्वरूप ने कैशलस पॉलिसी ली लेकिन अस्पताल के पॉलिसी पर इलाज करने से मना करने पर बीमा कंपनी ने कहा कि इलाज के बाद सारे बिल लगाकर अपना पूरा दावा ले सकते हैं। इसके बाद 26 अक्तूबर को सारे बिलों, चिकित्सक के पर्चों और जांच रिपोर्ट के साथ बीमा कंपनी में ऑनलाइन दावा जमा किया लेकिन ढाई महीने बीतने के बाद भी अभी तक बीमा कंपनी ने भुगतान नहीं किया।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया:-लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 6 साल से बिजनेस टीम का अहम हिस्सा हैं। दृगराज को पत्रकारिता में 21 वर्षों का लंबा अनुभव है। इन्होंने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी स्पेशल खबरों से खास पहचान बनाई है। शेयर मार्केट, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी पर विशेष पकड़। मैथ्स से ग्रेजुएट, मास कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस में पीजी डिप्लोमा। दृगराज, रिसर्च और एनॉलिस के जरिए मार्केट डेटा को आसान भाषा में 'कुछ अलग' पाठकों तक पहुंचाते हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले साढ़े सात साल तक हिन्दुस्तान अखबार में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा सहारा समय, दैनिक जागरण, न्यूज नेशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

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