काम की खबर: जल्द बदलवा लें अपनी चेकबुक, अब पुरानी वाली नहीं आएगी काम; क्यों बदला गया नियम

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मुख्य बातें

  • एक जनवरी से अल्फा न्यूमेरिक वाली चेकबुक अनिवार्य की जा रही है
  • ऐसे में नई चेकबुक लेने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया गया है
  • संभव है कि पुरानी चेकबुक नया साल लगते ही बेकार हो जाए

Checkbook
1 जनवरी से बेकार हो सकती है आपकी पुरानी चेकबुक

बैंकिंग प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एक जनवरी 2027 से चेकबुक पर अल्फा न्यूमेरिक कोड अनिवार्य कर दिया गया है। ग्राहकों को चेकबुक बदलवाने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया गया है। कई बैंकों ने नई चेकबुक जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जबकि बाकी भी जल्द प्रक्रिया शुरू करने जा रहे हैं।

जल्द बदलवा लें चेकबुक

नए नियमों के तहत बैंक ऑफ इंडिया ने अपने ग्राहकों को सूचित किया है कि 31 दिसंबर 2026 के बाद 50 हजार और उससे अधिक राशि के ऐसे चेक स्वीकार नहीं किए जाएंगे, जिन पर अल्फा-न्यूमेरिक कोड नहीं है। बैंक ने ग्राहकों को नई चेकबुक के लिए जल्द आवेदन करने की सलाह दी है, जिससे भुगतान के समय किसी तरह की परेशानी न हो। इसी तरह सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के अन्य बैंकों ने भी अल्फा न्यूमेरिक कोड वाली चेकबुक जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है। बैंक ग्राहकों को ई-मेल और एसएमएस के जरिए नई चेकबुक लेने की सूचना दे रहे हैं।

हर बैंक में शुल्क भिन्न

नई चेकबुक पर शुल्क बैंक और खाते के प्रकार के हिसाब से अलग हो सकता है। जैसे, बैंक ऑफ इंडिया में बचत खाते के लिए 25 पन्ने का एक चेकबुक सालाना मुफ्त है। इसके बाद प्रत्येक चेक पन्ने के लिए पांच रुपये शुल्क लगेगा। बाकी बैंकों में शुल्क अलग-अलग हो सकते हैं।

चेक भुगतान में लगने वाला समय घट जाएगा

आरबीआई का जोर चेक क्लीयरिंग व्यवस्था को अधिक तेज और सुरक्षित बनाने पर है। अब चेक ट्रंकेशन और लगातार क्लीयरिंग के जरिए पेपर चेक भुगतान करने वाली शाखा में भेजने के मामलों में कटौती आई है। इससे चेक क्लीयरिंग का समय घट जाता है। ट्रंकेशन चेक क्लीयरिंग सिस्टम का ही एक रूप है। यह भौतिक पेपर चेक को इलेक्ट्रॉनिक रूप में डिजिटाइज करता है। यह प्रक्रिया चेक पर उल्लेखित राशि का भुगतान करने वाले बैंक को डिजिटल चेक भेजने के लिए अपनाई जाती है। इस व्यवस्था से चेक भुगतान में लगने वाला समय बहुत ही कम हो गया है।

ये हैं अल्फा-न्यूमेरिक कोड

● अल्फा-न्यूमेरिक कोड में अक्षर और अंक दोनों का इस्तेमाल होते हैं। इससे चेक की पहचान और सत्यापन सुरक्षित बनते हैं।

● चेक में छेड़छाड़ या फर्जी चेक के जरिए भुगतान का जोखिम कम हो जाता है।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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