अडानी को अमेरिका से मिली खुशखबरी, SEC के खिलाफ अर्जी मंजूर; उछल पड़े शेयर
US प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग(SEC) के धोखाधड़ी मामले में गौतम अडानी की अर्जी मंजूर कर ली गई है। न्यूयॉर्क की एक अदालत ने अपने आदेश में कहा- दोनों पक्ष प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस का समय तय करें। इस पॉजिटिव खबर के बीच अडानी समूह के शेयरों में तूफानी तेजी देखने को मिली।
उद्योगपति गौतम अडानी को बड़ी राहत मिली है। दरअसल, अमेरिका की एक अदालत ने अडानी की उस अर्जी को मंजूर कर लिया है, जिसमें उन्होंने US प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग(SEC) के धोखाधड़ी मामले को खारिज करने की अपील की थी। इस पॉजिटिव खबर के बीच बुधवार को अडानी ग्रुप के शेयरों में तूफानी तेजी आई। इसमें प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी पोर्ट्स शामिल हैं। इन कंपनियों के शेयर में 15% तक की तेजी देखी गई।
अदालत ने क्या कहा?
न्यूयॉर्क की Eastern डिस्ट्रिक कोर्ट ने अपने आदेश में कहा- अदालत को प्रतिवादियों का एक पत्र मिला है, जिसमें उन्होंने शिकायत को खारिज करने के लिए अपनी संभावित अर्जी पर 'प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस' आयोजित करने का अनुरोध किया है। अदालत इस अनुरोध को मंजूर करती है और दोनों पक्षों को निर्देश देती है कि वे इस प्री-मोशन कॉन्फ्रेंस का समय तय करें। अदालत के इस फैसले के बाद अब अडानी समूह 30 अप्रैल, 2026 तक मामले को पूरी तरह खारिज करने के लिए अपना पक्ष मजबूती से पेश कर सकेगा। बता दें कि इस मामले में गौतम अडानी का प्रतिनिधित्व सुलिवन एंड क्रॉमवेल एलएलपी ने किया, जबकि सागर अडानी की पैरवी निक्सन पीबॉडी एलएलपी और हेकर फिंक एलएलपी कर रही हैं।
अडानी की क्या है दलील?
अडानी परिवार के वकीलों की तरफ से दलील दी गई है कि यह मामला अमेरिकी क्षेत्राधिकार से बाहर है और इसमें किसी भी तरह का गलत कार्य सिद्ध नहीं होता है। अडानी के वकीलों ने कहा कि कथित रिश्वत योजना को साबित करने वाला कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने दलील दी कि जिन बयानों को आधार बनाकर यह मामला बनाया गया है, वे कानून की नजर में सजा देने या कार्रवाई करने योग्य नहीं हैं।
अडानी समूह के वकीलों ने अदालत को बताया कि 75 करोड़ डॉलर के बॉन्ड की बिक्री अमेरिका के बाहर की गई थी और इसमें अमेरिकी नियमों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। याचिका में यह भी कहा गया कि इस मामले में किसी भी निवेशक को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि 2024 में बॉन्ड की अवधि पूरी होने पर सभी निवेशकों को मूलधन और ब्याज का पूरा भुगतान कर दिया गया था। अडानी की कानूनी टीम का कहना है कि चूंकि पूरा मामला भारतीय प्रतिवादियों, भारतीय कंपनी और भारत में हुए आचरण से संबंधित है, इसलिए यह अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों के दायरे से बाहर है।
नवंबर 2024 में शुरू हुआ मामला
यह मामला नवंबर, 2024 में शुरू हुआ था। इसमें अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप लगाया गया था कि गौतम अडानी समूह ने भारत में सौर बिजली के ठेके लेने के लिए भारतीय अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर से ज्यादा की रिश्वत देने की कोशिश की। आरोप यह भी है कि जब उन्होंने इसके लिए पैसे जुटाते समय अमेरिकी निवेशकों और बैंकों को इस पूरी योजना की जानकारी नहीं दी। अडानी समूह ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।
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