व्हाट्सएप से लेकर एंथ्रोपिक तक: दुनिया की बड़ी कंपनियों में भारतीयों का दबदबा
मुख्य बातें
- दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों में सीईओ, सीटीओ, सीएफओ या बोर्ड मेंबर्स के पदों पर भारतीयों का दबदबा है
- इस लिस्ट में अब कुणाल शाह का नाम भी शामिल हो गया है
- क्रेड के फाउंडर शाह, मेटा की ग्लोबल लीडरशिप टीम में शामिल होकर इस बड़ी टेक कंपनी के व्हाट्सएप को संभालेंगे

दुनिया की बड़ी कंपनियों में भारतीयों का दबदबा पहले से ही रहा है, इस लिस्ट में अब कुणाल शाह का नाम भी शामिल हो गया है। फिनटेक प्लेटफॉर्म क्रेड के फाउंडर शाह, मेटा की ग्लोबल लीडरशिप टीम में शामिल होकर इस बड़ी टेक कंपनी के मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को संभालेंगे। इसके साथ ही शाह उन खास प्रोफेशनल्स के ग्रुप में शामिल हो गए हैं जो अरबों यूजर्स और खरबों डॉलर की मार्केट वैल्यू वाली कंपनियों को संभालते हैं। यह नियुक्ति इस बढ़ते ट्रेंड को और मजबूत करती है कि वैश्विक डिजिटल सेवाओं के नेतृत्व के लिए आवश्यक रणनीतिक सोच के मामले में भारतीय टैलेंट की मांग लगातार बढ़ रही है।
सिलिकॉन वैली में भारतीयों की अहम भूमिका
कुणाल शाह से पहले भी कई भारतीय मूल के पेशेवर वैश्विक कॉरपोरेट जगत की सबसे प्रभावशाली कुर्सियों तक पहुंच चुके हैं। इस लीडरशिप के दौर की शुरुआत सत्या नडेला और सुंदर पिचाई जैसी हस्तियों ने की थी। नडेला 2014 में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ बने, उन्हें क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई पर फोकस करके कंपनी को नई दिशा देने और उसे सफल बनाने का श्रेय दिया जाता है।
सुंदर पिचाई ने 2015 में गूगल और बाद में 2019 में इसकी पैरेंट कंपनी, अल्फाबेट की कमान संभाली। इनके साथ शांतनु नारायण जैसे लीडर्स भी शामिल हैं, जो 2007 से एडोब को लीड कर रहे हैं। आईबीएम के सीईओ अरविंद कृष्णा ने अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी में अपने 35 साल के करियर के दौरान कई बड़े बदलाव किए हैं।
हाल में ग्लोबल टेक कंपनियों में नियुक्त हुए भारतीय
वर्ष नाम पद और कंपनी
2026 कुणाल शाह ग्लोबल सीईओ, व्हाट्सएप
2026 आशा शर्मा सीईओ, माइक्रोसॉफ्ट गेमिंग
2025 राहुल पाटिल चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर, एंथ्रोपिक
2023 नील मोहन सीईओ यूट्यूब
2023 रवि कुमार एस सीईओ, कॉग्निजेंट
भारतीयों का दबदबा इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा
टेक्नोलॉजी और एआई
क्लाउड कंप्यूटिंग
साइबर सुरक्षा
सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन
उपभोक्ता वस्तुएं
लग्जरी ब्रांड
वैश्विक परामर्श सेवाएं
बैंकिंग और वित्त
स्वास्थ्य सेवाएं एवं लाइफ साइंसेज
केवल टेक सेक्टर तक सीमित नहीं हैं भारतीय
भारतीयों का प्रभाव केवल तकनीक तक सीमित नहीं है। वित्तीय क्षेत्र में अजय बंगा आज विश्व बैंक का नेतृत्व कर रहे हैं। उपभोक्ता वस्तुओं, चिप डिजाइन, स्वास्थ्य सेवाओं और परामर्श जैसे क्षेत्रों में भी भारतीय मूल के पेशेवरों ने वैश्विक नेतृत्व स्थापित किया है।
उदाहरण के तौर पर लीना नायर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित लग्जरी ब्रांडों में से एक चैनल की वैश्विक मुख्य कार्यकारी हैं। चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर उद्योग में जयश्री उल्लाल का नाम प्रमुख है, जिनकी कंपनी दुनिया के बड़े डेटा सेंटर और क्लाउड नेटवर्किंग समाधानों में अग्रणी मानी जाती है।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में गिरीश ऋषि जैसे भारतीय मूल के पेशेवरों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं, जबकि वैश्विक फार्मा और बायोटेक कंपनियों में भी भारतीय प्रतिभाओं की मजबूत मौजूदगी है।
परामर्श और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में पुनीत रंजन ने वर्षों तक दुनिया की सबसे बड़ी कंसल्टिंग और ऑडिट फर्मों में से एक डेलॉयट का नेतृत्व किया। इसके अलावा निकेश अरोड़ा साइबर सुरक्षा, रेवती अद्वैती विनिर्माण एवं सप्लाई चेन और संजय महरोत्रा मेमोरी चिप उद्योग में शीर्ष पदों पर हैं।
आईआईटी के 54 फीसदी छात्र विदेश में
आईआईटी दिल्ली की इसी साल जारी रिपोर्ट के अनुसार 54 फीसदी पूर्व छात्र भारत से बाहर, मुख्य रूप से अमेरिका, यूरोप और सिंगापुर में बड़े पदों पर जॉब कर रहे हैं। एक हजार से अधिक पूर्व छात्र वैश्विक कंपनियों में सीईओ, सीटीओ, सीएफओ या बोर्ड मेंबर्स के पदों पर कार्यरत हैं। 15 फीसदी छात्र सीनियर पदों पर काम कर रहे हैं।
नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च, अमेरिका की स्टडी के अनुसार आईआईटी के जेईई एडवांस के टॉप 100 रैंकर्स में से लगभग 62% छात्र स्नातक के बाद उच्च शिक्षा या नौकरियों के लिए विदेशों (मुख्य रूप से अमेरिका) का रुख करते हैं। 35% लोग आगे चलकर अमेरिका की टॉप यूनिवर्सिटीज में प्रोफेसर, डीन या रिसर्च हेड के बड़े पदों पर पहुंचते हैं।


