दुनिया में पहली बार अरबपतियों की संख्या 3000 के पार
दुनिया में पहली बार अरबपतियों की संख्या तीन हजार से ज्यादा हो गई। वहीं एलन मस्क दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति बन गए हैं, जिनकी व्यक्तिगत संपत्ति आधा ट्रिलियन डॉलर (500 अरब डॉलर) को पार कर गई है। यह स्थिति तब है, जब दुनिया में हर 4 में से 1 व्यक्ति के पास खाने को पर्याप्त भोजन नहीं है।

मानवाधिकार समूह ऑक्सफैम इंटरनेशनल की नई रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के अरबपतियों की संपत्ति और उनकी राजनीतिक ताकत में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया कि एक अरबपति के नेता बनने की संभावना किसी आम आदमी की तुलना में चार हजार गुना अधिक है। वहीं साल 2025 अरबपतियों के लिए अब तक का सबसे सफल साल रहा, क्योंकि उनकी कुल संपत्ति बढ़कर रिकॉर्ड 18.3 ट्रिलियन डॉलर (करीब 1,660 लाख करोड़ रुपये) हो गई। यह पिछले पांच सालों के औसत की तुलना में तीन गुना अधिक है।
ऑक्सफैम ने 'रेजिस्टिंग द रूल ऑफ द रिच' नाम से रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया कि 2020 के बाद से अरबपतियों की दौलत में 81 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वहीं पिछले एक साल में उनकी दौलत 2.5 ट्रिलियन डॉलर (16.5 फीसदी) बढ़ी। यह राशि इतनी है कि दुनिया से चरम गरीबी को 26 बार खत्म किया जा सकता है। बता दें, भारत में देश के शीर्ष 1 फीसदी अमीरों के पास कुल राष्ट्रीय संपत्ति का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है।
तीन हजार से ज्यादा अरबपति पहली बार
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में पहली बार अरबपतियों की संख्या तीन हजार से ज्यादा हो गई। वहीं एलन मस्क दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति बन गए हैं, जिनकी व्यक्तिगत संपत्ति आधा ट्रिलियन डॉलर (500 अरब डॉलर) को पार कर गई है। यह स्थिति तब है, जब दुनिया में हर 4 में से 1 व्यक्ति के पास खाने को पर्याप्त भोजन नहीं है।
राजनीति पर कब्जा
रिपोर्ट में बताया गया कि अमीर लोग न केवल पैसे वाले हैं, बल्कि वे राजनीति को भी नियंत्रित कर रहे हैं। सर्वे में शामिल 66 देशों के लगभग आधे लोगों का मानना है कि उनके देश में अमीर लोग चुनाव खरीद लेते हैं। अधिक असमानता वाले देशों में लोकतंत्र के खत्म होने का खतरा 7 गुना ज्यादा होता है। इसके अलावा, दुनिया की आधी से ज्यादा बड़ी मीडिया कंपनियों और लगभग सभी मुख्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे एक्स, वाशिंगटन पोस्ट) पर अरबपतियों का मालिकाना हक है।
पिछले साल 68 देशों में प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, मीडिया जगत के ऊंचे पदों पर भी असमानता है। दुनिया के शीर्ष पदों में केवल 27% महिलाएं हैं और मात्र 23 फीसदी लोग ही पिछड़े या अल्पसंख्यक सूमह से आते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकारों को वापस लिया जा रहा है या दबाया जा रहा है। पिछले साल 68 देशों में 142 से ज्यादा महत्वपूर्ण सरकार विरोधी विरोध प्रदर्शन हुए, जिनका अधिकारियों ने आमतौर पर हिंसा से जवाब दिया।
भारतीय आरक्षण प्रणाली की मिसाल दी
रिपोर्ट में ऑक्सफैम ने भारत की आरक्षण प्रणाली को आम लोगों को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रगति की एक मजबूत मिसाल बताया। भारत में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य हाशिए पर पड़े समूहों के लिए राजनीतिक आरक्षण (कोटा) आर्थिक रूप से वंचित एवं बहिष्कृत समुदायों को आगे बढ़ाने के अवसर प्रदान करता है।
भारत में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ कुछ अन्य वर्गों के लिए भी विधानसभाओं में जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाता है, जबकि हाल ही में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की गई है। इन श्रेणियों के अलावा, शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में अन्य कमजोर तथा हाशिए पर स्थित समूहों के लिए भी आरक्षण है।
ऑक्सफैम के कार्यकारी निदेशक, अमिताभ बेहर ने बताया, “ अमीरों और बाकी लोगों के बीच बढ़ती खाई एक राजनीतिक कमी पैदा कर रही है, जो बहुत खतरनाक और अस्थिर है। आर्थिक गरीबी भूख पैदा करती है, लेकिन राजनीतिक गरीबी गुस्सा पैदा करती है।”
दुनिया के Top-3 अरबपति (जनवरी,2026 तक)
1 एलन मस्क 727 अरब डॉलर टेस्ला, स्पेसएक्स, एक्स
2 लैरी पेज 263 अरब डॉलर गूगल (अल्फाबेट)
3 जेफ बेजोस 251 अरब डॉलर अमेजन
(स्रोत: ऑक्सफैम)
भारत से शीर्ष तीन अमीर : (जनवरी, 2026 तक)
1 मुकेश अंबानी 104.6 अरब डॉलर रिलायंस इंडस्ट्रीज
2 गौतम अडानी 89.6 अरब डॉलर अदानी समूह
3 सावित्री जिंदल 40.2 अरब डॉलर ओपी जिंदल समूह
(स्रोत: ऑक्सफैम व हारुन)

लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया:-लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 6 साल से बिजनेस टीम का अहम हिस्सा हैं। दृगराज को पत्रकारिता में 21 वर्षों का लंबा अनुभव है। इन्होंने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी स्पेशल खबरों से खास पहचान बनाई है। शेयर मार्केट, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी पर विशेष पकड़। मैथ्स से ग्रेजुएट, मास कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस में पीजी डिप्लोमा। दृगराज, रिसर्च और एनॉलिस के जरिए मार्केट डेटा को आसान भाषा में 'कुछ अलग' पाठकों तक पहुंचाते हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले साढ़े सात साल तक हिन्दुस्तान अखबार में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा सहारा समय, दैनिक जागरण, न्यूज नेशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
और पढ़ें



