टाटा संस के इतिहास में पहली बार रद्द हो सकती है AGM, ऐसा होने की क्या है वजह?

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मुख्य बातें

  • Tata Sons AGM: अगर बैठक कोरम के अभाव में रद्द होती है तो यह टाटा संस के इतिहास में पहली ऐसी घटना हो सकती है
  • वहीं, टाटा संस के बोर्ड में छह निदेशक हैं
  • इनमें ट्रस्ट के नामित निदेशक और चेयरमैन शामिल हैं
  • चंद्रशेखरन के जाने के मुद्दे पर बोर्ड में वोटिंग को लेकर राय बंटी हुई है
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टाटा संस के इतिहास में पहली बार रद्द हो सकती है AGM

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के दोबारा कार्यकाल नहीं लेने के फैसले ने कंपनी के भीतर हलचल बढ़ा दी है। बोर्ड के कुछ निदेशक चाहते हैं कि चंद्रशेखरन अपने फैसले पर पुनर्विचार करें, जबकि कुछ का मानना है कि उनके फैसले को स्वीकार कर अब नए चेयरमैन की तलाश शुरू करनी चाहिए।

मामले से जुड़े द इकनॉमिक टाइम्स के सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड के भीतर इस बात पर भी मतभेद है कि चंद्रशेखरन के फैसले पर औपचारिक रूप से वोट कराया जाए या नहीं।

टाटा संस के दो प्रमुख ट्रस्ट शेयरधारकों में से एक सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने बोर्ड को पत्र लिखकर चंद्रशेखरन के फैसले को नोट करने और उनके उत्तराधिकारी की तलाश के लिए चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का सुझाव दिया है।

ट्रस्ट से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, जब चेयरमैन खुद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने की इच्छा बता चुके हैं तो अब बोर्ड की प्राथमिकता उत्तराधिकार की योजना पर होनी चाहिए।

बोर्ड में वोटिंग को लेकर असमंजस

टाटा संस के बोर्ड में छह निदेशक हैं। इनमें ट्रस्ट के नामित निदेशक और चेयरमैन शामिल हैं। चंद्रशेखरन के जाने के मुद्दे पर बोर्ड में वोटिंग को लेकर राय बंटी हुई है। कुछ लोगों का मानना है कि उन्हें दोबारा कार्यकाल लेने के लिए मनाने की कोशिश की जानी चाहिए। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला उनका व्यक्तिगत निर्णय है और ऐसे मामले में वोटिंग की कोई जरूरत नहीं है।

कानूनी विशेषज्ञ आशीष के. सिंह के अनुसार, अगर कंपनी के आर्टिकल्स में विशेष प्रावधान नहीं है तो कंपनी कानून के तहत चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति नहीं लेने के फैसले को स्वीकार करने के अलावा बोर्ड के पास बहुत सीमित विकल्प हैं।

आज टाटा संस की AGM, कोरम पर संकट

टाटा संस की वार्षिक आम बैठक 18 अगस्त को प्रस्तावित है। हालांकि, बैठक में अन्य शेयरधारक ऑनलाइन शामिल हो सकते हैं, लेकिन सर रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से प्रतिनिधि नामित न किए जाने के कारण कोरम पूरा होने पर सवाल खड़ा हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, अगर बैठक कोरम के अभाव में रद्द होती है तो यह टाटा संस के इतिहास में पहली ऐसी घटना हो सकती है।

चंद्रशेखरन ने क्यों लिया पीछे हटने का फैसला?

चंद्रशेखरन ने बोर्ड को बताया था कि वह दोबारा नियुक्ति के लिए आवश्यक सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने की स्थिति में दूसरा कार्यकाल नहीं लेना चाहते। उनके तीसरे पांच साल के कार्यकाल को लेकर काफी समय से मतभेद चलने की बात सामने आ रही थी। ऐसे में उनका अचानक पीछे हटने का फैसला टाटा संस के कुछ बोर्ड सदस्यों के लिए अप्रत्याशित माना जा रहा है।

क्या चंद्रशेखरन अपने फैसले पर पुनर्विचार करेंगे

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चंद्रशेखरन अपने फैसले पर पुनर्विचार करेंगे या टाटा संस नए चेयरमैन की तलाश शुरू करेगा। फिलहाल दो बातें साफ हैं। पहली चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी को लेकर प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत सामने आ गई है और दूसरी बोर्ड के भीतर इस नेतृत्व परिवर्तन को लेकर पूरी तरह सहमति नहीं दिख रही है। हालांकि, चंद्रशेखरन के कार्यकाल, उत्तराधिकारी या संभावित नए चेयरमैन को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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