LPG के लिए सरकार ने IOCL, HPCL और BPCL को दिए खास निर्देश
मुख्य बातें
- इस साल अगस्त तक अमेरिका पहले ही भारत का सबसे बड़ा एलपीजी सप्लॉयर बन चुका है, और अमेरिका से अब तक रिकॉर्ड 39 लाख टन गैस भेजी जा चुकी है
- जल्द ही ये कंपनियां संभावित सप्लॉयर्स और उनके ऑफरों का जायजा लेने के बाद अमेरिकी एलपीजी के लिए संयुक्त रूप से एक टेंडर भी जारी करेंगी

सरकार ने इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को स्पष्ट निर्देश दिया है कि साल 2027 में होने वाले कुल एलपीजी आयात का कम से कम 15 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका के लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट के जरिए लाया जाए। इस साल की शुरुआत में ही भारत ने अमेरिका से पहली बार ऐसा लंबी अवधि का सौदा किया था, जिसमें करीब 22 लाख टन (कुल आयात का 10 प्रतिशत) गैस मंगाने का समझौता हुआ था। अभी इन तीनों कंपनियों के शीर्ष अधिकारी अमेरिका में ही मौजूद हैं और सप्लाई के नई डील पर बातचीत कर रहे हैं।
मिडिल ईस्ट से क्यों हट रहा है भारत का ध्यान?
इस कदम के पीछे भारत की मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने की बड़ी योजना है। पहले भारत की 90 प्रतिशत से अधिक एलपीजी जरूरतें खाड़ी देशों से पूरी होती थीं, लेकिन ईरान में जारी युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावटों ने भारी किल्लत पैदा कर दी थी। इस अनुभव ने भारत को सबक सिखाया कि सप्लाई के स्रोतों में विविधता होनी ही चाहिए।
इस साल अगस्त तक अमेरिका पहले ही भारत का सबसे बड़ा एलपीजी सप्लॉयर बन चुका है, और अमेरिका से अब तक रिकॉर्ड 39 लाख टन गैस भेजी जा चुकी है। जल्द ही ये कंपनियां संभावित सप्लॉयर्स और उनके ऑफरों का जायजा लेने के बाद अमेरिकी एलपीजी के लिए संयुक्त रूप से एक टेंडर भी जारी करेंगी।
ट्रेड डील की राह में अड़चनें और ऊर्जा सुरक्षा
यह कदम भारत को अमेरिका के साथ अपना ट्रेड सरप्लस कम करने में भी मदद करेगा, क्योंकि नई दिल्ली फिलहाल वाशिंगटन के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता करने की कोशिश कर रही है। ट्रंप प्रशासन लंबे समय से भारत को अपनी ऊर्जा निर्यात बढ़ाने की मांग करता आया है, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस आयातकों में से एक है। हालांकि, पिछले साल से चल रही व्यापार वार्ता अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है।
आम जनजीवन पर पड़ा भारी संकट
दूसरी तरफ, होर्मुज स्ट्रेट का बना हुआ संकट और अमेरिका-ईरान की रुकी हुई बातचीत भारत की रसोई गैस सप्लाई के लिए लगातार बड़ा खतरा बनी हुई है। इसी कमी का नतीजा है कि पिछले महीने एलपीजी की खपत पिछले साल के मुकाबले 16 प्रतिशत से अधिक गिरकर महज 23.5 लाख टन रह गई। गैस की किल्लत के कारण आम घरों और उद्योगों को PNG का सहारा लेना पड़ रहा है, या फिर उन्हें जैविक ईंधन और मिट्टी के तेल (केरोसिन) जैसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले विकल्पों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
एलपीजी सिलेंडर के 14 अगस्त के रेट
एलपीजी सिलेंडर आज सबसे महंगा लेह में है। यहां घरेलू रसोई गैस की कीमत 1119 रुपये है। जबकि, कमर्शियल सिलेंडर 3376 रुपये। दिल्ली की बात करें तो 14.2 किलो वाला सिलेंडर 942 रुपये और 19 किलो वालो कमर्शियल सिलेंडर 2738 रुपये। रांची में घरेलू सिलेंडर 999.50 रुपये तो कमर्शियल 2922 रुपये। दिल्ली के मुकाबले रांची में घरेलू सिलेंडर 57.50 रुपये और कमर्शियल 184 रुपये महंगा है।
इनपुट: ब्लूमबर्ग


