बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका! सरकार बढ़ाने जा रही महीने का इलेक्ट्रिक बिल? इस नए प्रस्ताव से मचा हड़कंप
मुख्य बातें
- देश में बिजली बिल का तरीका जल्द बदल सकता है
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिसमें बिजली कंपनियों की फिक्स मासिक फीस बढ़ाने की बात कही गई है
- इसका मतलब यह हो सकता है कि कम बिजली इस्तेमाल करने पर भी लोगों को ज्यादा बिल देना पड़े

अगर आप अपने घर का बिजली बिल कम करने के लिए पंखे, AC और लाइटें बंद करके बचत करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। आने वाले समय में आपकी यह रणनीति शायद काम न करे। जी हां, क्योंकि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (Central Electricity Authority - CEA) ने देश भर में बिजली टैरिफ (Tariff) के ढांचे में एक बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस नए प्रस्ताव के अनुसार आपके बिजली बिल में लगने वाला 'फिक्स्ड चार्ज' (Fixed Charge या स्थायी शुल्क) काफी बढ़ा दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि भले ही आप कम बिजली खर्च करें या बिल्कुल न करें, आपको हर महीने एक तय मोटी रकम तो चुकानी ही होगी। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
क्यों लिया जा रहा है यह फैसला?
सरकारी बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। वर्तमान में बिजली कंपनियां अपना ज्यादातर खर्च आपके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली प्रति-यूनिट बिजली (Variable Charges) से वसूलती हैं। टाइम्स नाऊ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीईए (CEA) का कहना है कि बिजली कंपनियों का ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, कर्मचारियों की सैलरी, ग्रिड का मेंटेनेंस और बिजली बनाने वाली कंपनियों को किया जाने वाला भुगतान कुल खर्च का 38% से 56% तक होता है। लेकिन, वर्तमान में फिक्स्ड चार्ज के जरिए वे केवल 9% से 20% खर्च ही वसूल पाती हैं। जब देश में बिजली की मांग घटती है, तो इन कंपनियों को भारी घाटा होने लगता है।
रूफटॉप सोलर लगाने वालों ने बढ़ाई टेंशन
बिजली कंपनियों के घाटे का एक बड़ा कारण यह भी है कि अमीर परिवार और बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज अब अपने घरों और फैक्ट्रियों में रूफटॉप सोलर सिस्टम या खुद के पावर प्रोजेक्ट्स लगा रहे हैं।
ये लोग सीधे ग्रिड से बिजली खरीदना तो कम या बंद कर देते हैं, जिससे कंपनियों की प्रति-यूनिट से होने वाली कमाई घट जाती है। लेकिन, ये उपभोक्ता बैकअप या इमरजेंसी के लिए सरकारी बिजली ग्रिड से जुड़े रहते हैं। अब ग्रिड को चालू रखने और तारों का जाल बनाए रखने का खर्च तो कंपनियों को उठाना ही पड़ता है। इसीलिए, कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
नए प्रस्ताव से आपकी जेब पर क्या होगा असर?
CEA (Central Electricity Authority) ने चरणबद्ध तरीके से फिक्स्ड चार्ज बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया है।
घरेलू और कृषि उपभोक्ता:- साल 2030 तक आपके कुल बिजली बिल में फिक्स्ड कॉस्ट की वसूली को बढ़ाकर 25% करने का प्रस्ताव है।
इंडस्ट्रियल और कमर्शियल उपभोक्ता:- फैक्ट्रियों, दुकानों और संस्थानों के लिए इसे सीधे 100% करने की सिफारिश की गई है।
सोलर यूजर्स के लिए अलग नियम:- अपने घर पर सोलर पैनल लगाने वाले या नेट-मीटरिंग का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए एक अलग बिलिंग ढांचा तैयार किया जाएगा, यानी उन्हें भी ज्यादा फिक्स्ड चार्ज देना पड़ सकता है।
इस नए नियम के लागू होने के बाद, बिजली बिल का एक बड़ा हिस्सा 'नॉन-वेरिएबल' (जिसे बदला न जा सके) हो जाएगा। आम जनता के पास बिजली बचाकर बिल कम करने का विकल्प बहुत सीमित रह जाएगा। यह प्रस्ताव अब 'फोरम ऑफ रेगुलेटर्स' के पास विचार और मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते
हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई
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