अब FD से होगी शेयर बाजार जैसी कमाई! NRI कमा सकते हैं 27% तक सालाना रिटर्न, समझिए FCNR का गणित
मुख्य बातें
- RBI की FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम NRI निवेशकों के लिए बड़ी कमाई का अवसर बनकर उभरी है
- HDFC Bank और YES Bank जैसे बैंक अब FCNR(B) (Foreign Currency Non-Resident) पर 6% से 6.6% तक ब्याज दे रहे हैं
- आइए समझते हैं कि FCNR(B) में निवेश कर NRI लीवरेज से 27% तक सालाना रिटर्न कैसे कमा सकते हैं?

प्रवासी भारतीय (NRIs) अब अपने ही पैसे का इस्तेमाल करके विदेशों में सस्ती दरों पर कर्ज ले सकते हैं और उस पैसे को भारतीय बैंकों के FCNR(B) डिपॉजिट (Foreign Currency Non-Resident- विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा) में निवेश कर मोटा पैसा कमा सकते हैं। यह एक ऐसी कमाल की तरकीब है, जिससे NRIs को बैंक डिपॉजिट जैसी सुरक्षित स्कीम से भी शेयर बाजार (Equity) जैसा भारी-भरकम रिटर्न पा सकते हैं। हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश में विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ाने के लिए FCNR(B) डिपॉजिट स्वैप योजना में कुछ ढील दी है। इसके बाद भारतीय बैंकों ने इन डिपॉजिट्स पर ब्याज दरें बढ़ाना शुरू कर दिया है। HDFC बैंक ने 3 से 5 साल की जमा राशि पर ब्याज दरों को 2% (200 बेसिस पॉइंट्स) से ज्यादा बढ़ाकर 6% कर दिया है। वहीं, YES बैंक तो 6.5% से 6.6% तक का ऊंचा ब्याज दे रहा है, तो आइए समझते हैं कि FCNR(B) में निवेश कर NRI लीवरेज से 27% तक सालाना रिटर्न कैसे कमा सकते हैं?
FCNR क्या है?
FCNR (Foreign Currency Non-Resident) डिपॉजिट NRI लोगों के लिए एक खास फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) योजना है। इसमें NRI अपने डॉलर, यूरो, पाउंड जैसी विदेशी मुद्रा को भारतीय बैंक में जमा करते हैं और उन्हें उसी विदेशी मुद्रा में ब्याज मिलता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि रुपये के कमजोर या मजबूत होने का असर जमा राशि पर नहीं पड़ता, क्योंकि पैसा और ब्याज दोनों विदेशी करेंसी में ही वापस मिलते हैं। उदाहरण के लिए, अगर कोई NRI 10,000 डॉलर FCNR डिपॉजिट में जमा करता है, तो मैच्योरिटी पर उसे डॉलर में ही मूलधन और ब्याज मिलेगा। इसलिए FCNR उन NRI निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प माना जाता है, जो भारत के बैंकों की बेहतर ब्याज दरों का फायदा उठाना चाहते हैं, लेकिन करेंसी एक्सचेंज के जोखिम से बचना चाहते हैं।
क्या है लेवरेज (Leverage) का पूरा खेल?
वैसे तो 6% का रिटर्न भी अमेरिकी बैंकों के 4.2% से काफी बेहतर है, लेकिन असली मुनाफा 'लेवरेज' यानी उधार की ताकत से आता है। फाइनेंस की दुनिया में लेवरेज का सीधा मतलब अपने मुनाफे को कई गुना बढ़ाने के लिए उधार के पैसे का इस्तेमाल करना होता है। अगर आपके पास $1 है और आप $2 उधार लेते हैं, तो यह 2x लेवरेज है। अगर आप $10 उधार लेते हैं, तो यह 10x लेवरेज है।
उदाहरण से समझें-
मान लीजिए अमेरिका में रहने वाला कोई NRI भारतीय बैंक में 3 साल के लिए $1 मिलियन (10 लाख डॉलर) जमा करना चाहता है। सीधा जमा करने पर उसे हर साल 6% ब्याज मिलेगा। लेकिन, वह NRI चाहे तो अमेरिकी बैंक से बहुत कम ब्याज दर पर $10 मिलियन का लोन ले सकता है और उस पूरे पैसे को भी भारतीय बैंक के FCNR(B) अकाउंट में डाल सकता है। वर्तमान में अमेरिका में 3 साल का लोन करीब 4.5% ब्याज पर मिल जाता है।
गणित समझिए-
पहले साल की कमाई:- कुल $11 मिलियन (खुद का $1 मिलियन + लोन का $10 मिलियन) पर 6% के हिसाब से $660,000 का ब्याज मिलेगा।
लोन का खर्च:- उधर अमेरिकी बैंक को $10 मिलियन के लोन पर 4.5% के हिसाब से $450,000 का ब्याज देना होगा।
शुद्ध मुनाफा (Net Profit):- पहले ही साल में बैठे-बिठाए $210,000 का शुद्ध मुनाफा हाथ में आएगा।
| डिटेल्स | लीवरेज: 5x | लीवरेज: 10x |
|---|---|---|
| NRI की अपनी पूंजी | $1 मिलियन | $1 मिलियन |
| NRI द्वारा लिया गया लोन | $5 मिलियन | $10 मिलियन |
| उधार की लागत (ब्याज दर) | 4.5% | 4.5% |
| FCNR(B) डिपॉजिट राशि | $6 मिलियन | $11 मिलियन |
| FCNR(B) डिपॉजिट ब्याज दर | 6% | 6% |
| 3 वर्ष बाद अमेरिकी लोन चुकाने की राशि | $5.7 मिलियन | $11.4 मिलियन |
| 3 वर्ष बाद FCNR(B) डिपॉजिट का मूल्य | $7.1 मिलियन | $13.1 मिलियन |
| NRI का कुल लाभ (रिटर्न) | $1.4 मिलियन | $1.7 मिलियन |
| चक्रवृद्धि वार्षिक रिटर्न (CAGR) | 11.9% | 19.3% |
3 साल पूरे होने पर भारतीय बैंक में जमा पैसा बढ़कर करीब $13.1 मिलियन हो जाएगा। इसका मतलब है कि अमेरिकी बैंक का लोन चुकाने के बाद भी उस NRI के पास अपने $1 मिलियन की मूल पूंजी पर कुल $1.7 मिलियन का शुद्ध लाभ होगा, यानी सालाना चक्रवृद्धि ब्याज (Compounded Return) के हिसाब से यह 19.3% का रिटर्न बनता है। दिग्गजों का मानना है कि इस तरीके से NRI सालाना 17% से 27% तक का रिटर्न आसानी से कमा सकते हैं।
इस बंपर मुनाफे की दो मुख्य शर्तें
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा खेल मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करता है।
1- ब्याज दरों का अंतर (Spread):- भारतीय बैंक के FCNR(B) डिपॉजिट की ब्याज दर और विदेशी बैंक के लोन की दर के बीच जितना ज्यादा अंतर होगा, मुनाफा उतना ही बड़ा होगा।
2-लेवरेज की मात्रा:- आप अपनी पूंजी पर जितना ज्यादा लोन (7x या 10x) उठाएंगे, आपका रिटर्न उतना ही बढ़ता जाएगा और यह शेयर बाजार के रिटर्न को भी पीछे छोड़ देगा।
आपको बता दें कि इससे पहले साल 2013 में भी जब ऐसी योजना आई थी, तब NRIs ने इस लेवरेज का फायदा उठाकर भारत में $26 बिलियन का निवेश किया था।
यह कैसे संभव होता है?
आप सोच रहे होंगे कि अमेरिकी बैंक इतनी आसानी से लोन क्यों दे देंगे? इसका कारण लेटर ऑफ क्रेडिट (Letter of Credit) है। आमतौर पर भारतीय बैंकों को इस तरह के लोन के लिए गारंटी देने की अनुमति नहीं होती, लेकिन RBI ने इस खास योजना के लिए नियमों में ढील दी है।
भारतीय बैंक उस NRI के डिपॉजिट के बदले एक 'लेटर ऑफ क्रेडिट' (गारंटी) जारी करता है। इसे दिखाकर NRI अमेरिकी बैंक से आसानी से सस्ता लोन ले लेता है, क्योंकि अमेरिकी बैंक को पता है कि उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है और समय पर लौट आएगा। इस पूरे चक्र में NRI, अमेरिकी बैंक, भारतीय बैंक और भारत की अर्थव्यवस्था सभी के लिए यह फायदे का सौदा साबित होता है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते
हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई
स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही
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नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।


