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गिरते रुपये को आरबीआई का मिला सहारा, 7 महीने में सबसे तेज मजबूत

गिरते रुपये को आरबीआई का मिला सहारा, 7 महीने में सबसे तेज मजबूत

संक्षेप:

रुपया 1% तक चढ़ गया, जो 23 मई 2025 के बाद से सबसे बड़ी तेजी है, और 90.0963 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले के सत्र में यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। सौदों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई स्थानीय बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप कर रहा है।

Dec 17, 2025 11:25 am ISTDrigraj Madheshia मिंट
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भारतीय रुपया बुधवार को सात महीने में सबसे तेजी से मजबूत हुआ, जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मुद्रा को सहारा देने के लिए जोरदार तरीके से डॉलर की बिक्री की। शेयरों में भी बढ़त रही।रुपया 1% तक चढ़ गया, जो 23 मई 2025 के बाद से सबसे बड़ी तेजी है, और 90.0963 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले के सत्र में यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। सौदों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई स्थानीय बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप कर रहा है।

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आरबीआई ने हस्तक्षेप क्यों किया?

यह कदम रुपये की हाल की लगातार रिकॉर्ड गिरावट के बाद आया है, जिस पर बहस हो रही थी कि केंद्रीय बैंक मुद्रा को सहारा देने के लिए और सख्ती से क्यों नहीं उतरा। व्यापारियों का कहना है कि शायद आरबीआई ने मंगलवार को विदेशी मुद्रा स्वैप के जरिए 5 अरब डॉलर खरीदने के बाद हस्तक्षेप किया।

बाजार की प्रतिक्रिया

करूर वैश्य बैंक के ट्रेजरी प्रमुख वी.आर.सी. रेड्डी ने कहा, "बाजार में रुपये की तेज गिरावट को हल्के में लेने का भाव था और आज आरबीआई ने उस धारणा को खारिज करने के लिए आक्रामक तरीके से कदम बढ़ाया।" उन्होंने बताया कि केंद्रीय बैंक ने लगभग 91 के स्तर पर डॉलर बेचे।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि केंद्रीय बैंक की इस कार्रवाई से अभी सट्टेबाजी की स्थिति कमजोर होगी।

गिरावट के पीछे कारण

आज की तेजी से पहले, रुपया इस महीने लगभग 2% टूट गया था। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी के कारण स्थानीय शेयरों और बांडों से विदेशी निकासी ने बाजार के मूड को प्रभावित किया था।

आगे की राह

करूर वैश्य बैंक के रेड्डी का मानना है कि जब तक व्यापार समझौता पूरा नहीं हो जाता, तब तक रुपया 90 के स्तर से ज्यादा मजबूत नहीं होगा।

विदेशी निवेशकों की भूमिका

वैश्विक फंडों ने इस साल स्थानीय शेयर बाजार से लगभग 18 अरब डॉलर निकाले हैं। यह निकासी रुपये पर दबाव बढ़ा रही है, वहीं अमेरिका के 50% टैरिफ निर्यातकों के डॉलर प्रवाह को खतरे में डाल रहे हैं। साथ ही, आयात बने रहने से डॉलर की मांग ऊंची बनी हुई है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia
टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल मिलाकर 20 साल का अनुभव। एचटी डिजिटल से पहले दृगराज न्यूज नेशन, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, सहारा समय और वॉच न्यूज एमपी /सीजी में रिपोर्टिग और डेस्क पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। स्पेशल स्टोरीज,स्पोर्ट्स, पॉलिटिक्स, सिनेमा, स्पोर्ट्स के बाद अब बिजनेस की खबरें लिख रहे हैं। दृगराज, लाइव हिन्दुस्तान में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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