क्या समुच RBI ने बेच दिया 12 अरब डॉलर का सोना, सरकार ने बताई सच्चाई
आरबीआई के पास सोने की भौतिक मात्रा बढ़ी है। 31 मार्च 2025 को 879.58 मीट्रिक टन सोना था, जो 31 मार्च 2026 को बढ़कर 880.52 मीट्रिक टन हो गया। सबसे अहम बात 22 मई 2026 तक आते-आते सोने की यह मात्रा 880.52 टन पर ही स्थिर रही, जो यह साबित करता है कि बीच में कोई बड़ी बिक्री नहीं हुई।
केंद्र सरकार ने उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि आरबीआई ने विदेशी मुद्रा को बढ़ावा देने के लिए सोना बेचा। बता दें ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट में दावा किया है कि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए आरबीआई ने 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर "अमृत काल में देश का सोना बेचने" का आरोप लगाते हुए हमला बोल दिया।
हाल ही में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट ने दावा किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने करीब 12 अरब डॉलर का सोना बेच दिया है। इस रिपोर्ट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी और विपक्ष ने सरकार पर हमला बोल दिया। लेकिन क्या यह दावा सच है? पीआईबी फैक्ट चेक और आरबीआई ने इसे पूरी तरह झूठा बताया है। आइए, इस पूरे मामले की पड़ताल करते हैं।
ब्लूमबर्ग का दावा : क्या कहा गया था?
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के वरिष्ठ भारतीय अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता ने अपनी एनलिसिस में दावा किया था कि 22 मई 2026 को समाप्त दो हफ्तों के दौरान आरबीआई ने करीब 12 अरब डॉलर का सोना बेचा और लगभग 7.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा खरीदी।
रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम ईरान-अमेरिका युद्ध और मिडिल ईस्ट के बढ़ते संकट के बीच रुपये की गिरावट रोकने और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए उठाया गया। ब्लूमबर्ग ने यह भी कहा कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बावजूद आरबीआई के सोने के भंडार की कीमत में गिरावट आई, जिससे उनका अनुमान और मजबूत हुआ।
सरकार और आरबीआई ने बताई पूरी सच्चाई ?
सरकारी सूत्रों और आरबीआई ने तुरंत इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया। सीएनबीसी-टीवी18 के अनुसार, वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने इस दावे को "पूरी तरह गलत और भ्रामक" बताया।
खुद आरबीआई ने भी स्पष्ट बयान जारी कर कहा कि उसने कोई सोना नहीं बेचा है। रिजर्व बैंक ने कहा, "मीडिया के कुछ वर्गों में आरबीआई द्वारा सोना बेचे जाने की खबरें सामने आई हैं। आरबीआई स्पष्ट करता है कि ये रिपोर्टें सही नहीं हैं।"
आरबीआई के सोने का भंडार बढ़ा, घटा नहीं
आरबीआई के पास सोने की भौतिक मात्रा बढ़ी है। 31 मार्च 2025 को 879.58 मीट्रिक टन सोना था, जो 31 मार्च 2026 को बढ़कर 880.52 मीट्रिक टन हो गया। सबसे अहम बात 22 मई 2026 तक आते-आते सोने की यह मात्रा 880.52 टन पर ही स्थिर रही, जो यह साबित करता है कि बीच में कोई बड़ी बिक्री नहीं हुई।
इतना ही नहीं, वैश्विक सोने की कीमतों में तेजी और रुपये में गिरावट की वजह से आरबीआई की सोने की होल्डिंग की कीमत (Value) भी जबरदस्त बढ़ी। यह 78.18 अरब डॉलर से बढ़कर 115.40 अरब डॉलर हो गई।
भारत कर रहा अपना सोना 'घर वापसी'
सबसे दिलचस्प बात यह है कि सोना बेचने के बजाय, आरबीआई उसे विदेशों से वापस भारत ला रहा है। सितंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच आरबीआई ने 104 मीट्रिक टन सोना भारत के अपने गोदामों में शिफ्ट किया। अब कुल सोने का लगभग 77% हिस्सा (680 मीट्रिक टन) देश के भीतर ही सुरक्षित है। यह कदम दुनिया के केंद्रीय बैंकों के उसी ट्रेंड का हिस्सा है, जहां भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से बचाव के लिए देश अपना सोना घर ला रहे हैं।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


