एक्सपर्ट की चेतावनी! 21000 तक गिर सकता है निफ्टी, कच्चे तेल ने बढ़ाई टेंशन
Stock Market Updates: अगर कच्चा तेल अगले तीन-चार महीने तक 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है तो निफ्टी 50 सीधा 21,000 के स्तर तक लुढ़क सकता है। यह चेतावनी एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के रणनीतिकार शेषाद्री सेन ने दी है।

भारतीय शेयर मार्केट में मौजूदा गिरावट और गहरी हो सकती है और अगर कच्चा तेल अगले तीन-चार महीने तक 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है तो निफ्टी 50 सीधा 21,000 के स्तर तक लुढ़क सकता है। यह चेतावनी एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के रणनीतिकार शेषाद्री सेन ने दी है। उनका कहना है कि अमेरिका-ईरान के बीच लंबा खिंचता युद्ध इसकी सबसे बड़ी वजह बन सकता है।
हालांकि, सेन का यह भी मानना है कि यह सुधार अस्थायी होगा। एक बार जब कच्चे तेल की कीमतें घटकर 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ जाएंगी, तो भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई में सुधार होगा। ऐसे में एक साल या उससे ज्यादा के नजरिए से देखने वाले निवेशकों के लिए यह शानदार मौका हो सकता है।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
अमेरिका-ईरान के बीच जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जो खाड़ी देशों से कच्चे तेल और गैस के निर्यात का सबसे अहम रास्ता है। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर के करीब पहुंच गया है।
कैसे आएगी बाजार में तेजी
हालांकि, बातचीत से समाधान की गुंजाइश अभी भी है, लेकिन विश्लेषकों को डर है कि दोनों पक्षों के बातचीत की मेज पर आने से पहले हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल तो एक छोटी सी सीजफायर की खबर भी क्रूड की कीमतों में गिरावट और बाजार में तेजी ला सकती है।
भारत पर क्या होगा असर?
खाड़ी क्षेत्र में लंबा चलने वाला यह टकराव कच्चे तेल को लंबे समय तक महंगा बनाए रख सकता है। शेषाद्री सेन के मुताबिक, तीन-चार महीने तक 100 डॉलर प्रति बैरल तेल रहना अब कोई मुश्किल संभावना नहीं लग रही है। इसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई नकारात्मक असर होंगे।
इससे भारत की विकास दर, आर्थिक स्थिरता और कंपनियों के मुनाफे पर सीधा झटका लगेगा। सबसे बड़ी दिक्कत एलपीजी की कमी के रूप में सामने आ सकती है, जो आम आदमी की रसोई तक को प्रभावित करेगी। साथ ही, वैश्विक स्तर पर विकास और महंगाई के जो झटके लगेंगे, उससे भी नई चुनौतियां पैदा होंगी।
निफ्टी में अभी और 10% की गिरावट हो सकती है
सेन ने कहा कि बाजार ने अभी इस पूरे संकट की कीमत पूरी तरह से नहीं आंकी है। अगर जल्द कोई समझौता नहीं होता है, तो निफ्टी में अभी और 10% की गिरावट आ सकती है। उन्हें उम्मीद है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान जैसा असर देखने को मिला था, उसी तर्ज पर निफ्टी 50 की कमाई प्रति शेयर (ईपीएस) में करीब 1.7% की कटौती हो सकती है। वैश्विक स्तर के दूसरे असर से इसमें 1-2% और गिरावट आ सकती है, जिसमें मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियां ज्यादा प्रभावित होंगी।
वित्तीय बाजारों पर खतरा
लंबा चलने वाला यह टकराव भारत के वित्तीय बाजारों पर भी दबाव बना सकता है। रिजर्व बैंक ने अभी तक विदेशी मुद्रा और बॉन्ड बाजारों में दखल देकर नुकसान सीमित रखा है, लेकिन सेन का कहना है कि अगर हालात लंबे खिंचे तो यह उपाय टिकाऊ नहीं रहेंगे।
ऐसे में डोमिनो इफेक्ट देखने को मिल सकता है, यानी एक के बाद एक कई संकट खड़े हो सकते हैं। चालू खाते का घाटा बढ़ेगा, विदेशों से भेजी जाने वाली रकम (रिमिटेंस) पर असर पड़ेगा, शेयर और बॉन्ड बाजारों से विदेशी पैसा निकल सकता है और बाजार में नकदी की किल्लत हो सकती है।
डॉलर के मुकाबले रुपया 95 तक गिर सकता है
सेन ने आगाह किया कि रुपया 95 प्रति अमेरिकी डॉलर तक कमजोर हो सकता है, जबकि 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड बढ़कर 7% के आसपास जा सकती है। कंपनियों के बॉन्ड पर भी ब्याज दरों का अंतर बढ़ेगा।
किन कंपनियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
एमके ग्लोबल के मुताबिक, महंगा कच्चा तेल कंपनियों की कमाई पर दो तरह से असर डालेगा। एक तो घरेलू और वैश्विक बाजारों में डिमांड घटेगी और दूसरा, कच्चे माल की बढ़ी कीमतों से मुनाफे पर दबाव बनेगा।
कोई भी सेक्टर पूरी तरह से अछूता नहीं रहेगा, लेकिन टेक्नोलॉजी, फार्मा, मेटल और पावर सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत बने रह सकते हैं। वहीं, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, यूटिलिटीज, एयरलाइंस और वाहन निर्माता कंपनियों पर इसकी मार सबसे ज्यादा पड़ेगी।
दिलचस्प बात यह है कि सेन का मानना है कि बैंकों और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) को इस गिरावट में अन्यायपूर्ण तरीके से बेचा गया है। उनके मुताबिक, तेल की कीमतों के सामान्य होने से पहले ही ये निवेश के लिए अच्छे अवसर पैदा कर रहे हैं।
मौका कहां है?
शेषाद्री सेन का मानना है कि एक बार जब कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर हो जाता है, तो भारत की आर्थिक वृद्धि और कंपनियों की कमाई में सुधार होगा। एक साल या उससे अधिक के निवेश क्षितिज को देखते हुए, उन्होंने कुछ ऐसे शेयरों को आकर्षक अवसर बताया है, जिनमें हालिया बाजार गिरावट में भारी कटौती हुई है।
इनमें इटरनल, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट जैसे नाम शामिल हैं। उन्होंने इन्हें 'फॉलन एंजल्स' यानी वे शेयर करार दिया है जो कभी ऊंचाइयों पर थे, लेकिन अब बाजार की बिकवाली के चलते सस्ते हो गए हैं और इनमें निवेश का सुनहरा मौका है।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


