
सबसे ज्यादा जोखिम... ग्लोबल प्राइवेट क्रेडिट मार्केट पर रघुराम राजन की बड़ी चेतावनी
सिंगापुर में क्लिफर्ड कैपिटल इन्वेस्टर डे कार्यक्रम में बोलते हुए राजन ने बताया कि प्राइवेट सेक्टर की मजबूत कमाई और AI सेक्टर की बड़ी सफलता की कहानियों ने एक ऐसा माहौल बना दिया है मानो लेंडिंग का यह तेज दौर बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा।
Raghuram Rajan on global private credit market: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने वैश्विक प्राइवेट क्रेडिट मार्केट को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया भर में जो अतिरिक्त लिक्विडिटी बनी हुई है, वह आने वाले समय में बड़े वित्तीय जोखिम पैदा कर सकती है। सिंगापुर में क्लिफर्ड कैपिटल इन्वेस्टर डे कार्यक्रम में बोलते हुए राजन ने बताया कि प्राइवेट सेक्टर की मजबूत कमाई और AI सेक्टर की बड़ी सफलता की कहानियों ने एक ऐसा माहौल बना दिया है मानो लेंडिंग का यह तेज दौर बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा। लेकिन उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि “जब बाजार में क्रेडिट भरपूर हो और फेडरेट रिजर्व ब्याज दरें कम कर रहा हो, उसी समय सबसे ज्यादा जोखिम पनपते हैं।”
क्या है डिटेल
रघुराम राजन ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि मौजूदा समय में फाइनेंशियल सिस्टम को लेकर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में कई हाई-प्रोफाइल कंपनियों के दिवालिया होने ने प्राइवेट क्रेडिट मार्केट की सेहत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगभग $1.7 ट्रिलियन का यह प्राइवेट क्रेडिट उद्योग, पारंपरिक बैंकों की तुलना में काफी कम रेगुलेटेड है और अब तक किसी बड़े वित्तीय दबाव या स्ट्रेस टेस्ट से नहीं गुज़रा है। इसी वजह से कई विशेषज्ञ इसे अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ते खतरे के रूप में देख रहे हैं।
डबललाइन कैपिटल की भी चेतावनी
राजन की चेतावनी से पहले, डबललाइन कैपिटल के संस्थापक जेफ्री गंडलाख ने भी कहा था कि प्राइवेट क्रेडिट ही अगला बड़ा वित्तीय संकट पैदा कर सकता है। उन्होंने कुछ कर्जों को “गार्बेज लेंडिंग” बताते हुए कहा कि ऐसी डील्स से एसेट्स इतने खराब हो जाते हैं कि उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। वहीं, JPMorgan के CEO जेमी डाइमोन ने भी अक्टूबर में टिप्पणी की थी—“जब आपको एक तिलचट्टा दिखता है, तो समझिए और भी कहीं छिपे हैं।” इन बयानों से साफ है कि बड़े वित्तीय दिग्गज भी इस सेक्टर को लेकर चिंतित हैं।
प्राइवेट क्रेडिट कंपनियां बैंकों जितनी सुरक्षित नहीं
रघुराम राजन ने यह भी बताया कि प्राइवेट क्रेडिट कंपनियां बैंकों जितनी सुरक्षित नहीं हैं, क्योंकि उनके पास केंद्रीय बैंक से सीधे मदद लेने का विकल्प नहीं होता। यानी अगर कभी लिक्विडिटी की कमी या हाई लीवरेज की स्थिति पैदा होती है, तो उन्हें खुद ही संभालना पड़ता है। राजन ने कहा, “जब उधार देने वाले बिना सोचे-समझे चेकबुक खोल देते हैं, तभी असली जोखिम बढ़ता है। इसलिए यही समय है जब सभी को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।” उनकी यह चेतावनी ऐसे वक्त में आई है जब दुनिया भर में निवेशक प्राइवेट क्रेडिट मार्केट को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपना रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ बार-बार इसके छिपे हुए खतरों पर ध्यान दिला रहे हैं।





