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गिग मॉडल के बचाव में उतरे Zomato के CEO दीपिंदर गोयल, जानें क्या-क्या दी दलील

गिग मॉडल के बचाव में उतरे Zomato के CEO दीपिंदर गोयल, जानें क्या-क्या दी दलील

संक्षेप:

गिग कर्मचारियों की कमाई और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर जारी बहस के बीच एटरनल के संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल ने कहा कि यह व्यवस्था डिलीवरी करने वाले कर्मियों पर दबाव नहीं डालती तथा लचीले कार्य घंटे और कल्याणकारी सुविधाएं गिग कार्य को अनेक लोगों के लिए आय का भरोसेमंद साधन बनाती हैं।

Jan 03, 2026 04:05 pm ISTTarun Pratap Singh भाषा
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गिग कर्मचारियों की कमाई और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर जारी बहस के बीच एटरनल (पहले का नाम जोमैटो) के संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल ने कहा कि यह व्यवस्था डिलीवरी करने वाले कर्मियों पर दबाव नहीं डालती तथा लचीले कार्य घंटे और कल्याणकारी सुविधाएं गिग कार्य को अनेक लोगों के लिए आय का भरोसेमंद साधन बनाती हैं। एटरनल के पास खाना पहुंचाने वाली कंपनी जोमैटो और क्विक-कॉमर्स फर्म ब्लिंकिट का मालिकाना है। गोयल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब गिग कर्मियों के संगठन बेहतर भुगतान और कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

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दीपिंदर गोयल ने क्या कुछ कहा है?

गोयल ने सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर लिखा, “वर्ष 2025 में जोमैटो और ब्लिंकिट ने डिलीवरी करने वाले सहयोगियों के लिए बीमा सुरक्षा पर 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। वर्ष 2025 में जोमैटो पर एक डिलीवरी सहयोगी की औसत प्रति घंटे की कमाई (उपदान को छोड़कर) 102 रुपये रही, जबकि वर्ष 2024 में यह 92 रुपये थी। यह वार्षिक आधार पर लगभग 10.9 प्रतिशत की वृद्धि है।” उन्होंने दावा किया कि 10 मिनट में सामान पहुंचाने का वादा गिग कर्मियों पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं डालता।

गोयल ने कहा कि लचीले कार्य समय और कल्याणकारी सुविधाएं गिग कार्य को अनेक लोगों के लिए आय का विश्वसनीय स्रोत बनाती हैं। हालांकि, उनकी इन टिप्पणियों पर सामाजिक माध्यमों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि 10 मिनट की समय सीमा पूरी करने के लिए गिग कर्मी तेज और लापरवाही से वाहन चलाते हैं तथा यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं।

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गिग कर्मियों की क्या मांग है?

गिग एवं मंच आधारित सेवा कर्मी संघ ने पिछले महीने श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर कई मुद्दे उठाए थे। इनमें प्रमुख मांग कर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 10 से 20 मिनट में वस्तु पहुंचाने की अनिवार्यता को तत्काल समाप्त करने की थी।

गोयल ने भारत की गिग अर्थव्यवस्था के लिए कम नियमन की भी पैरवी की और कहा कि इससे अंततः अधिक लोगों को संगठित कार्यबल में लाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा, “हमारे मंच पर डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों से अत्यधिक काम नहीं कराया जाता। वर्ष 2025 में जोमैटो पर एक औसत डिलीवरी कर्मियों ने पूरे वर्ष में 38 दिन और प्रति कार्य दिवस लगभग सात घंटे काम किया। यह तय समय सारिणी के बजाय वास्तविक गिग-शैली की भागीदारी को दर्शाता है। केवल 2.3 प्रतिशत सहयोगियों ने वर्ष में 250 दिनों से अधिक कार्य किया। गिग भूमिकाओं के लिए भविष्य निधि या सुनिश्चित वेतन जैसे पूर्णकालिक कर्मचारी लाभों की मांग इस व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।”

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26500 रुपये हर महीने कमाई का रहता है विकल्प

एटरनल के संस्थापक ने कहा कि अधिकांश डिलीवरी वाले कर्मी महीने में कुछ ही दिनों और कुछ ही घंटों के लिए कार्य करते हैं। उन्होंने कहा, ''यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन 10 घंटे और महीने में 26 दिन कार्य करता है, तो उसकी सकल आय लगभग 26,500 रुपये प्रतिमाह होती है। ईंधन और रखरखाव पर होने वाले खर्च (लगभग 20 प्रतिशत) घटाने के बाद उसकी शुद्ध आय करीब 21,000 रुपये प्रतिमाह रह जाती है।''

नवंबर में केंद्र सरकार ने सभी चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित किया, जिससे गिग कर्मियों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज सहित व्यापक सुधारों का मार्ग प्रशस्त हुआ।

Tarun Pratap Singh

लेखक के बारे में

Tarun Pratap Singh
घर वाले इंजीनियर बनाना चाहते थे, लेकिन सामाजिक विषयों में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। लाइव हिंदुस्तान के लिए खबरें लिखने के साथ समय-समय पर ग्राउंड रिपोर्टिंग करते रहते हैं। बिजनेस, राजनीति, क्रिकेट, धर्म और साहित्य में गहरी रुचि है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से एम.ए. और भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से पत्रकारिता का कोर्स किया है। तरुण, लाइव हिन्दुस्तान में बतौर सीनियर कॉन्टेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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