
जोमैटो का बड़ा फैसला, रेस्टोरेंट्स को ग्राहक का डेटा साझा करेगी कंपनी
इटरनल के स्वामित्व वाले फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने रेस्टोरेंट उद्योग की प्रमुख मांग मानते हुए अब ग्राहकों का डेटा रेस्टोरेंट्स के साथ साझा करने के लिए सहमति दे दी है। इटरनल के शेयर की बात करें तो गुरुवार को मामूली बढ़त के साथ 307 रुपये पर बंद हुआ।
Eternal share price: इटरनल का फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो, रेस्टोरेंट्स के साथ ग्राहकों का डेटा साझा करने के लिए सहमत हो गया है। यह बदलाव एग्रीगेटर कंपनियों और रेस्टोरेंट कारोबारियों के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। हालांकि डेटा तभी साझा किया जाएगा जब ग्राहक इसकी अनुमति देंगे।

क्या-क्या होगा डेटा में?
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अनुसार जोमैटो ऐप पर आज से यूजर्स को एक पॉप-अप दिखना शुरू होगा, जिसमें पूछा जाएगा कि क्या वे रेस्टोरेंट्स को प्रमोशनल गतिविधियों के लिए संपर्क करने की अनुमति देते हैं। इस सहमति में नाम, लोकेशन और ऑर्डरिंग व्यवहार जैसी जानकारी शामिल होगी, जिससे रेस्टोरेंट्स ग्राहक की पसंद और पैटर्न को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। हालांकि, डेटा-साझाकरण प्रक्रिया अभी आधिकारिक रूप से शुरू नहीं हुई है। जोमैटो इस व्यवस्था को औपचारिक रूप देने पर काम कर रहा है।
स्विगी से भी होगी बात
दूसरी ओर, NRAI जल्द ही प्रतिद्वंद्वी प्लेटफॉर्म स्विगी से भी इसी मुद्दे पर मुलाकात करेगा और उम्मीद की जा रही है कि वह भी ऐसा ही कदम उठा सकता है। यह निर्णय जोमैटो और स्विगी के खिलाफ NRAI द्वारा सीसीआई में की गई शिकायत के बाद आया है, जिसमें डेटा मास्किंग और पारदर्शिता की कमी को प्रमुख मुद्दा बताया गया था। जोमैटो ने अभी तक इस घटनाक्रम से संबंधित प्रश्नों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
शेयर का हाल
इटरनल के शेयर की बात करें तो गुरुवार को मामूली बढ़त के साथ 307 रुपये पर बंद हुआ। अक्टूबर में इटरनल के शेयर की कीमत 368.40 रुपये तक पहुंच गई। अप्रैल 2025 में शेयर 189.60 रुपये पर था। यह दोनों भाव शेयर के 52 हफ्ते का हाई और लो है।
डार्क पैटर्न से मुक्त होने की घोषणा
इस बीच, देश की 26 प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों ने उनके मंचों के ‘डार्क पैटर्न’ से मुक्त होने की घोषणा की है। इन 26 ई-कॉमर्स मंचों में जेप्टो, जोमैटो, स्विगी, जियोमार्ट और बिगबास्केट शामिल हैं। डार्क पैटर्न अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आते हैं। सरकार, उपभोक्ताओं को गुमराह करने या उनके साथ छल करने वाली इन प्रथाओं पर अंकुश लगाने के प्रयास कर रही है।





