
EPFO की बड़ी तैयारी, पीएफ खाताधारकों के लिए बदलने वाला है बहुत कुछ
ईपीएफओ के अंशधारक इस साल अप्रैल तक यूपीआई के जरिये अपनी भविष्य निधि से निकासी कर सकेंगे और वह राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच जाएगी। योजना में सदस्यों का कुछ हिस्सा न्यूनतम राशि के रूप में सुरक्षित रहेगा।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े कर्मचारियों के लिए बहुत कुछ बदलने जा रहा है। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ईपीएफओ अपने कामकाज को पूरी तरह मोडिफाई करने वाला है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक EPFO 3.0 पर काम तेज कर दिया गया है। रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि EPFO 3.0 के तहत नया पोर्टल और नया बैकएंड सॉफ्टवेयर विकसित किया जाएगा। इसके जरिए आने वाले 10 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम किया जा रहा है।
कोर बैंकिंग सॉल्यूशन पर फोकस
EPFO 3.0 की सबसे अहम विशेषता कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) होने वाली है। इसके जरिए EPFO भी बैंकों की तरह केंद्रीकृत तरीके से काम करेगा। इसका फायदा यह होगा कि कोई भी सदस्य देश के किसी भी हिस्से से अपनी समस्या का समाधान करा सकेगा। इसका मतलब ये है कि बिना अपने मूल कार्यालय पर निर्भर हुए समाधान होगा। EPFO 3.0 में AI-पावर्ड भाषा टूल्स को शामिल किया जाएगा। इसके लिए सरकार की AI आधारित भाषा अनुवाद प्लेटफॉर्म ‘भाषिणी’ का उपयोग किया जाएगा। इसके जरिए भाषिणी अपनी स्थानीय भाषा में सेवाओं का लाभ उठा सकें। नए लेबर कोड्स के लागू होने के बाद EPFO का दायरा संगठित क्षेत्र के साथ-साथ असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स तक भी बढ़ेगा। भविष्य में EPFO को गिग वर्कर्स के रिटायरमेंट फंड के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी मिल सकती है।
अप्रैल से यूपीआई की सुविधा
ईपीएफओ के अंशधारक इस साल अप्रैल तक यूपीआई के जरिये अपनी भविष्य निधि से निकासी कर सकेंगे और वह राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच जाएगी।इस योजना में सदस्यों का कुछ हिस्सा न्यूनतम राशि के रूप में सुरक्षित रहेगा, जबकि शेष राशि सीधे उनके बैंक खाते में स्थानांतरित की जा सकेगी। ईपीएफओ सदस्य अपनी कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से अपने यूपीआई पिन का इस्तेमाल कर सुरक्षित लेनदेन कर सकेंगे। धनराशि बैंक खाते में आने के बाद इलेक्ट्रॉनिक भुगतान, एटीएम या डेबिट कार्ड से इस्तेमाल की जा सकेगी।
फिलहाल ईपीएफओ सदस्यों को भविष्य निधि से निकासी के लिए आवेदन करना पड़ता है, जो समय लेने वाली प्रक्रिया है। स्वचालित निपटान प्रक्रिया के तहत आवेदन देने के तीन दिन के भीतर धनराशि खाते में आती है। इस तरीके से निकासी की सीमा पहले एक लाख रुपये थी लेकिन उसे बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया है। इससे सदस्य बीमारी, शिक्षा, विवाह और घर खरीद जैसी जरूरतों के लिए तीन दिन के भीतर ही वित्तीय सहायता पा सकेंगे।





