EPFO ने बदले PF के 8 नियम! पैसा निकालने, नॉमिनेशन और क्लेम पर आया बड़ा अपडेट

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • EPFO New Rules 2026: EPFO ने EPF, EPS और EDLI स्कीम 2026 के तहत PF से जुड़े कई अहम बदलाव किए हैं
  • नए नियमों में नौकरी छोड़ने के बाद पूरा PF निकालने के लिए 12 महीने की बेरोजगारी, ऑनलाइन नॉमिनेशन और PF क्लेम को 20 दिनों में निपटाने जैसे प्रावधान शामिल हैं
  • आइए 8 बदलावों के बारे में जानते हैं
EPFO
EPFO ने बदले 8 जरूरी नियम।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने EPF, EPS और EDLI स्कीम, 2026 के तहत प्रोविडेंट फंड से जुड़े नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। इन बदलावों का मकसद PF खाताधारकों के लिए नियमों को आसान बनाना, निकासी की प्रक्रिया को सरल करना, सेवाओं को डिजिटल बनाना और PF क्लेम का निपटारा तेजी से करना है। नए नियमों में कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान की मौजूदा व्यवस्था को बड़े स्तर पर बरकरार रखा गया है, लेकिन PF से पैसे निकालने की शर्तों, बेरोजगारी के बाद पूरी रकम निकालने की समयसीमा, नॉमिनेशन और क्लेम सेटलमेंट जैसे मामलों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अगर आपका भी EPFO में PF खाता है, तो इन बदलावों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि भविष्य में PF से पैसे निकालने या क्लेम करने पर इनका सीधा असर पड़ सकता है।

1- PF में कर्मचारी और कंपनी का योगदान कितना रहेगा?

नए नियमों के तहत कर्मचारी के लिए वैधानिक PF योगदान बेसिक सैलरी का 12% बना रहेगा। नियोक्ता भी निर्धारित नियमों के अनुसार योगदान करता रहेगा। PF में अनिवार्य योगदान की सीमा फिलहाल ₹15,000 मासिक वेतन तक लागू रहती है। इसका मतलब है कि इस सीमा के आधार पर कर्मचारी का वैधानिक योगदान अधिकतम ₹1,800 प्रति माह होता है। अगर किसी कर्मचारी का वेतन ₹15,000 से ज्यादा है तो उससे ऊपर की राशि पर PF योगदान कुछ परिस्थितियों में स्वैच्छिक हो सकता है। यानी योगदान की मूल व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।

2- PF की ₹15,000 वेतन सीमा बदलना होगा आसान

नए EPF नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव वेतन सीमा को लेकर है। पहले EPF Scheme में सीधे ₹15,000 की वेतन सीमा का उल्लेख था। अब 2026 के नियमों में वेतन सीमा को केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर अधिसूचित सीमा से जोड़ा गया है। इससे भविष्य में सरकार अगर PF के लिए वेतन सीमा में बदलाव करती है तो नियमों में अलग से व्यापक संशोधन करने की जरूरत कम होगी। इससे आगे चलकर PF से जुड़े बदलावों को लागू करना ज्यादा आसान हो सकता है।

3- PF से पैसे निकालने के नियम होंगे आसान

EPFO ने PF निकासी से जुड़े कई अलग-अलग नियमों को सरल बनाने की कोशिश की है। पहले अलग-अलग परिस्थितियों में PF निकालने के लिए कई कैटेगरी और अलग शर्तें थीं। अब पात्र निकासी को तीन बड़े वर्गों में रखने का प्रावधान किया गया है—जरूरी जरूरतें, घर से जुड़ी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां। इससे PF खाताधारकों के लिए यह समझना आसान हो सकता है कि वे किस स्थिति में अपने खाते से पैसा निकाल सकते हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग निकासी नियमों की जटिलता को कम करना और आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाना है।

4- PF खाते में 25% रकम न्यूनतम बैलेंस के रूप में रहेगी

नए नियमों में PF खाते की रकम को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। EPFO खाते में दो हिस्सों की व्यवस्था जारी रखेगा। इसमें 25% PF बैलेंस न्यूनतम बैलेंस के तौर पर बना रहेगा, जबकि पात्र सदस्य निर्धारित शर्तों के तहत 75% तक रकम की आंशिक निकासी कर सकेंगे। यानी सदस्य को जरूरत पड़ने पर अपने PF की बड़ी राशि तक पहुंच मिल सकती है, लेकिन पूरी रकम निकालने की अनुमति हर परिस्थिति में नहीं होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य रिटायरमेंट के लिए PF में कुछ रकम सुरक्षित रखना भी है।

5- PF निकासी के लिए 12 महीने की सर्विस जरूरी

नए नियमों में PF निकासी के लिए सर्विस अवधि को भी एक समान करने की कोशिश की गई है। पहले अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग-अलग सेवा अवधि और शर्तें लागू होती थीं। अब सामान्य तौर पर पात्र निकासी के लिए कम से कम 12 महीने की सेवा पूरी करना जरूरी होगा। मेडिकल जरूरतों के मामले में भी न्यूनतम 12 महीने की सेवा की शर्त रखी गई है। इससे अलग-अलग निकासी कैटेगरी के लिए मौजूद अलग-अलग सेवा अवधि की जटिलता कम हो सकती है।

6- नौकरी छोड़ने के बाद पूरा PF निकालने के लिए अब 12 महीने इंतजार

सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक नौकरी छोड़ने के बाद PF की पूरी रकम निकालने से जुड़ा है। पहले नौकरी छोड़ने के बाद लगातार 2 महीने तक बेरोजगार रहने पर पूरी PF रकम निकालने की सुविधा थी। नए नियमों के तहत पूरी रकम निकालने के लिए अब 12 महीने की बेरोजगारी का इंतजार करना होगा। हालांकि, पात्रता होने पर आंशिक निकासी की सुविधा बनी रहेगी। आंशिक निकासी के लिए भी प्रतीक्षा अवधि को बढ़ाकर 36 महीने किया गया है। इसलिए नौकरी बदलने या नौकरी छूटने की स्थिति में PF का इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों के लिए यह बदलाव खासा महत्वपूर्ण है।

7- PF नॉमिनेशन अब पूरी तरह डिजिटल

EPFO ने नॉमिनेशन प्रक्रिया को भी डिजिटल बनाने पर जोर दिया है। नए नियमों के तहत फिजिकल नॉमिनेशन फॉर्म को चरणबद्ध तरीके से हटाकर ऑनलाइन नॉमिनेशन को औपचारिक मान्यता दी गई है। इससे कर्मचारियों को कागजी फॉर्म भरने और जमा करने की जरूरत कम होगी। ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए नॉमिनी की जानकारी अपडेट करना और रिकॉर्ड बनाए रखना आसान हो सकता है। खासकर ऐसे मामलों में जहां कर्मचारी के परिवार को भविष्य में PF या पेंशन से जुड़े लाभ प्राप्त करने हों, सही नॉमिनेशन काफी महत्वपूर्ण होता है।

8- PF क्लेम अब 20 दिन में निपटाना होगा

नए नियमों में PF क्लेम के निपटारे की समयसीमा को भी कम किया गया है। अब EPFO को PF क्लेम का निपटारा 20 दिनों के भीतर करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही देरी होने पर जवाबदेही बढ़ाने के लिए पेनल्टी का प्रावधान भी किया गया है। अगर बिना वैध कारण के क्लेम के निपटारे में देरी होती है तो EPFO को 12% की दर से पेनल इंटरेस्ट देना होगा। नियमों के अनुसार यह राशि संबंधित क्षेत्रीय PF आयुक्त के वेतन से वसूल की जा सकती है। इसका उद्देश्य अधिकारियों को समय पर क्लेम निपटाने के लिए जवाबदेह बनाना और कर्मचारियों को PF की रकम जल्द उपलब्ध कराना है।

EPFO के 2026 के नए नियमों में एक तरफ PF निकासी और डिजिटल सेवाओं को सरल बनाने पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ रिटायरमेंट बचत को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की कोशिश भी दिखाई देती है। कर्मचारी के लिए सबसे अहम बदलाव नौकरी छोड़ने के बाद पूरी PF रकम निकालने की अवधि का 2 महीने से बढ़कर 12 महीने होना, आंशिक निकासी के लिए सेवा और प्रतीक्षा अवधि में बदलाव, ऑनलाइन नॉमिनेशन और 20 दिन में क्लेम सेटलमेंट हैं। हालांकि, PF से पैसा निकालने से पहले कर्मचारी को अपनी पात्रता और लागू शर्तों की जांच जरूर करनी चाहिए, क्योंकि अलग-अलग परिस्थितियों में नियम अलग हो सकते हैं।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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