EPFO ने दी चेतावनी! PF का पैसा निकाल म्यूचुअल फंड में लगाना पड़ सकता है भारी

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • EPFO ने नौकरीपेशा कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे रिटायरमेंट के लिए जमा EPF का पैसा निकालकर म्यूचुअल फंड में निवेश न करें
  • संगठन का कहना है कि EPF केवल बचत नहीं बल्कि पेंशन, बीमा और टैक्स लाभ देने वाली सामाजिक सुरक्षा योजना है, जबकि म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़ा निवेश विकल्प है
EPFO vs MF
PF का पैसा निकाल म्यूचुअल फंड में लगाने वालों को EPFO ने दी चेतावनी।

अगर आप नौकरीपेशा हैं और सोच रहे हैं कि EPF (Employees' Provident Fund) का पैसा निकालकर उसे म्यूचुअल फंड में निवेश कर दें, तो पहले यह खबर जरूर पढ़ लें। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कर्मचारियों को साफ संदेश दिया है कि EPF और म्यूचुअल फंड दोनों अलग-अलग उद्देश्य के लिए बनाए गए हैं और इन्हें एक-दूसरे का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। EPFO ने अपने पोस्ट में लिखा, "समझदार को EPF काफी है", साथ ही एक जागरूकता वीडियो भी साझा किया। संगठन का कहना है कि रिटायरमेंट की सुरक्षा के लिए EPF सबसे मजबूत आधार है, जबकि म्यूचुअल फंड केवल निवेश का एक विकल्प है। इसलिए, सिर्फ ज्यादा रिटर्न की उम्मीद में PF का पैसा निकालना भविष्य में नुकसानदायक साबित हो सकता है।

EPFO के मुताबिक, EPF केवल बचत योजना नहीं बल्कि एक सामाजिक सुरक्षा (Social Security) योजना है। इसमें हर महीने कर्मचारी के साथ-साथ कंपनी (Employer) भी योगदान करती है, जिससे रिटायरमेंट तक एक बड़ा फंड तैयार हो जाता है। दूसरी ओर म्यूचुअल फंड में केवल निवेशक ही पैसा लगाता है और वहां किसी कंपनी का योगदान नहीं होता। यही वजह है कि EPF लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है।

EPF और म्यूचुअल फंड में अंतर

EPF की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस पर मिलने वाला ब्याज सरकार हर साल तय करती है, यानी निवेशकों को अपेक्षाकृत स्थिर और भरोसेमंद रिटर्न मिलता है। इसके विपरीत, म्यूचुअल फंड का रिटर्न पूरी तरह शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। बाजार अच्छा रहा तो बेहतर कमाई हो सकती है, लेकिन गिरावट आने पर नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। इसलिए दोनों की प्रकृति पूरी तरह अलग है।

रिटायरमेंट के बाद पेंशन

EPFO ने यह भी बताया कि EPF सिर्फ रिटायरमेंट फंड नहीं देता, बल्कि इसके साथ EPS (Employees' Pension Scheme) और EDLI (Employees' Deposit Linked Insurance) का लाभ भी मिलता है। पात्र कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलती है, जबकि कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को 7 लाख रुपये तक का बीमा कवर भी मिल सकता है। म्यूचुअल फंड में इस तरह की पेंशन या बीमा सुविधा सामान्य रूप से उपलब्ध नहीं होती।

टैक्स मामलों में भी फायदेमंद

टैक्स के नजरिए से भी EPF कई मामलों में फायदेमंद माना जाता है। निर्धारित शर्तों के तहत इसमें जमा राशि, ब्याज और निकासी पर टैक्स छूट मिल सकती है। वहीं म्यूचुअल फंड में टैक्स का नियम फंड के प्रकार और निवेश अवधि के अनुसार बदलता रहता है। यानी निवेश से होने वाले लाभ पर कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ सकता है।

EPF बनाम म्यूचुअल फंड: क्या है अंतर?

विशेषताEPF (कर्मचारी भविष्य निधि)म्यूचुअल फंड
उद्देश्यरिटायरमेंट के लिए बचत और सामाजिक सुरक्षालंबी अवधि में धन (Wealth) बनाने के लिए निवेश
प्रकृतिवेतनभोगी कर्मचारियों के लिए सरकारी योजनास्वैच्छिक (Voluntary) निवेश विकल्प
योगदानकर्मचारी और नियोक्ता (Employer) दोनों योगदान करते हैंकेवल निवेशक अपनी इच्छा से निवेश करता है
रिटर्नEPF पर सरकार द्वारा तय वार्षिक ब्याज मिलता हैबाजार (Market) के प्रदर्शन के अनुसार रिटर्न, जो बढ़ या घट सकता है
जोखिमअपेक्षाकृत कम जोखिमबाजार पर निर्भर, इसलिए जोखिम अधिक या कम हो सकता है
टैक्स लाभनियमों के अनुसार निवेश, ब्याज और निकासी पर टैक्स छूट मिल सकती हैफंड के प्रकार और होल्डिंग अवधि के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स लागू हो सकता है
अतिरिक्त लाभपेंशन (EPS) और कर्मचारी बीमा (EDLI) जैसी सुविधाएंसामान्यतः पेंशन या बीमा का लाभ नहीं मिलता

म्यूचुअल फंड और EPFO; कौन क्या चुने?

EPFO ने स्पष्ट किया है कि म्यूचुअल फंड को EPF का विकल्प नहीं समझना चाहिए। अगर किसी निवेशक की जोखिम उठाने की क्षमता ज्यादा है, तो वह अपनी अतिरिक्त बचत को म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकता है। लेकिन, रिटायरमेंट के लिए जमा EPF राशि को समय से पहले निकालकर बाजार आधारित निवेश में लगाना सही रणनीति नहीं मानी जाती।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एक्सपर्ट का भी मानना है कि बेहतर वित्तीय योजना के लिए EPF और म्यूचुअल फंड दोनों का संतुलित इस्तेमाल किया जा सकता है। EPF को रिटायरमेंट की मजबूत नींव बनाए रखें और अतिरिक्त धन को अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता के अनुसार म्यूचुअल फंड में निवेश करें। इससे एक तरफ आपका भविष्य सुरक्षित रहेगा, वहीं दूसरी ओर लंबी अवधि में संपत्ति बनाने का अवसर भी मिलेगा। यही कारण है कि EPFO कर्मचारियों को सलाह दे रहा है कि रिटायरमेंट की सुरक्षा के लिए EPF को प्राथमिकता दें और इसे अपनी वित्तीय योजना की मजबूत नींव बनाए रखें।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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