8वें वेतन आयोग से 400% तक बढ़ सकती है कर्मचारियों की सैलरी, अगर…

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मुख्य बातें

  • 8th Pay Commission: रेलवे कर्मचारियों के इस संगठन ने कुल पांच फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किए हैं, जो 2.92 से लेकर 4.38 तक हैं
  • अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो कुछ कर्मचारियों के वेतन में 400 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि हो सकती है
8वें वेतन आयोग से 400% तक बढ़ सकती है कर्मचारियों की सैलरी, अगर…

भारतीय रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षक संघ (IRTSA) ने 8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी रिवीजन के नियमों में एक अनोखे बदलाव का प्रस्ताव रखा है। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि सभी स्तरों के कर्मचारियों के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर लागू करने के बजाय, अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर अपनाए जाएं। इस प्रस्ताव का उद्देश्य निचले, मध्यम और वरिष्ठ स्तर के कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर को अधिक संतुलित बनाना है।

रेलवे कर्मचारियों के इस संगठन ने कुल पांच फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किए हैं, जो 2.92 से लेकर 4.38 तक हैं। लेवल 1 से 5 तक के कर्मचारियों के लिए 2.92, लेवल 6 से 8 के लिए 3.50, लेवल 9 से 12 के लिए 3.80, लेवल 13 से 16 के लिए 4.09 और लेवल 17 से 18 के कर्मचारियों के लिए 4.38 का फिटमेंट फैक्टर सुझाया गया है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो कुछ कर्मचारियों के वेतन में 400 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि हो सकती है।

फिटमेंट फैक्टर क्या है?

फिटमेंट फैक्टर एक मैथेमेटिकल मेथड है, जिसका उपयोग केंद्रीय वेतन आयोग कर्मचारियों के पुराने मूल वेतन (या पेंशन) को नए संशोधित मूल वेतन में बदलने के लिए करता है। यह कैलकुलेटर काफी अहम होता है, क्योंकि इस गुणक में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर वेतन, पेंशन, इंक्रीमेंट और बकाया राशि को प्रभावित करता है। इसका फार्मुला कुछ इस तरह से है। वर्तमान मूल वेतन x फिटमेंट फैक्टर = नया मूल वेतन।

प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर से वेतन में कितना उछाल आएगा?

अगर इस सिफारिश को लागू किया जाता है तो विभिन्न स्तरों पर वेतन वृद्धि के आंकड़े कुछ इस प्रकार रहने का अनुमान है। मान लीजिए, एक लेवल 1-5 का कर्मचारी फिलहाल 20,000 रुपये मूल वेतन पा रहा है, तो 2.92 के फिटमेंट फैक्टर से उसका संशोधित वेतन 58,400 रुपये (20,000 × 2.92) हो जाएगा। इसी तरह, लेवल 6-8 के एक कर्मचारी का वर्तमान मूल वेतन 45,000 रुपये है और प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 3.50 है, तो उसका नया वेतन 1,57,500 रुपये (45,000 × 3.50) हो जाएगा।

लेवल 13-16 के कर्मचारी के लिए, जिसका मौजूदा मूल वेतन 1,20,000 रुपये है, 4.09 का फिटमेंट फैक्टर लगने पर यह बढ़कर 4,90,800 रुपये (1,20,000 × 4.09) हो जाएगा। वहीं लेवल 17-18 के कर्मचारी का अगर वर्तमान मूल वेतन 2,50,000 रुपये है और प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 4.38 लगाया जाता है, तो संशोधित मूल वेतन 10,95,000 रुपये (2,50,000 × 4.38) तक पहुंच जाएगा।

फिटमेंट फैक्टर की गणना और इतिहास

फिटमेंट फैक्टर की अवधारणा छठे और सातवें वेतन आयोग के दौरान चर्चा का प्रमुख विषय बनकर उभरी थी। इससे पहले के वेतन आयोग पे रिवीजन के लिए अधिक जटिल प्रक्रियाएं अपनाते थे, जिनमें सैलरी रेसनलाइजेशन, महंगाई भत्ते का मर्जर और आवश्यकता-आधारित सैलरी की गणना जैसी विधियां शामिल थीं।

पहले पांच वेतन आयोगों के संदर्भ में आधुनिक ‘फिटमेंट फैक्टर’ की अवधारणा को लागू करना सटीक नहीं होगा। उन आयोगों ने व्यापक पुनर्गठन विधियों के माध्यम से वेतन संशोधित किया था और पूरे सिस्टम में कोई एक समान गुणक इस्तेमाल नहीं किया गया था। हालांकि, उनका मूल उद्देश्य भी यही रहा कि सरकारी वेतन ढांचे को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाए।

8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार

8वां वेतन आयोग इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका असर 1.1 करोड़ से अधिक लाभार्थियों पर पड़ेगा, जिनमें केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके परिवार शामिल हैं। भारत में अब तक सात वेतन आयोग गठित हो चुके हैं।

पहला वेतन आयोग जनवरी 1946 में स्थापित हुआ था और उसके बाद से आम तौर पर हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग बनता रहा है। 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया, जिसकी सिफारिशों का केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बेसब्री से इंतजार है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

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दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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