एथेनॉल का असर: अंडे की कीमतें ₹9 तक पहुंची, क्या चिकन भी होगा महंगा?

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

मुख्य बातें

  • Eggs Price Hiked: पिछले एक साल में अंडों की कीमतों में करीब 35 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है
  • अब पोल्ट्री फार्म पर एक अंडे की कीमत करीब ₹7 हो गई है, जबकि खुदरा बाजार में यह ₹8.50 से ₹9.00 तक मिल रहा है

egg price surge
एथेनॉल के चलते अब अंडा हुआ महंगा, ₹9 तक पहुंचा

चीनी की कीमतें बढ़ने के पीछे सरकार भले ही एथेनॉल का हाथ नहीं मान रही हो, लेकिन लोगों में यह भ्रम अभी भी मजबूती से बैठा है। इस बीच अब एथेनॉल का साइड इफेक्ट अंडे पर पड़ना शुरू हो गया है और आने वाले दिनों में चिकन पर भी दिखने लगेगा। दरअसल, मुर्गियों के दाने यानी पोल्ट्री फीड में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले मक्का का अब एथेनॉल बनाने के काम आ रहा है। इससे दाने की लागत बढ़ गई है और इसका सीधा असर अंडों के दाम पर हुआ है।

नेशनल एग को-ऑर्डिनेशन कमिटी (NECC) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में अंडों की कीमतों में करीब 35 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अब पोल्ट्री फार्म से बिक्री पर एक अंडे की कीमत करीब ₹7 हो गई है, जबकि खुदरा बाजार में यह ₹8.50 से ₹9.00 तक मिल रहा है। पोल्ट्री उद्योग के अधिकारियों को उम्मीद है कि सर्दियों के आने पर, जब अंडों की मांग और बढ़ जाती है, तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।

द इकनॉमिक टाइम्स को NECC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुल मक्का उत्पादन का करीब 37 फीसदी हिस्सा अब एथेनॉल बनाने वाली डिस्टिलरीज को चला जाता है। पिछले एक साल में अंडों के दाम करीब 40 फीसदी बढ़े हैं और आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं।

दरअसल, सरकार के एथेनॉल मिश्रण अनिवार्यता (ब्लेंडिंग मैंडेट) के तहत तेल कंपनियों को पेट्रोल में जैव ईंधन मिलाकर बेचना होता है। अब जब पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20 फीसदी तक पहुंच गई है तो गन्ना और मक्का दोनों का एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल बढ़ गया है, जिससे चीनी बनाने और पशु आहार के लिए इनकी उपलब्धता घट गई है।

₹14,000 से ₹26,500 प्रति टन पहुंचा मक्के का दाम

मक्का की कमी ने उसके दाम भी आसमान छू लिए हैं। तीन साल पहले जहां मक्का ₹14,000 प्रति टन था, वहीं अब यह ₹26,500 प्रति टन के करीब पहुंच गया है। अकेले पिछले पांच महीनों में इसकी कीमत में करीब 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। NECC अधिकारी के अनुसार, मक्का ही पोल्ट्री किसानों का सबसे बड़ा खर्च है, जो कुल उत्पादन लागत का 65-70 फीसदी हिस्सा बनाता है। ऐसे में मक्का के दामों में लगातार बढ़ोतरी उद्योग के लिए बेहद मुश्किल खड़ी कर रही है।

भारत में कितना होता है उत्पादन

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कुल मक्का उत्पादन करीब 43.4 मिलियन टन है, जिसमें से अब लगभग 17 मिलियन टन एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रहा है। इससे पोल्ट्री फीड और दूसरे जरूरतों के लिए मक्का की सप्लाई काफी कम हो गई है। उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मक्का और सोयाबीन के दामों का सीधा असर पोल्ट्री फीड की लागत पर पड़ता है, और अगर यह लागत लगातार बढ़ती रहे तो अंततः यह अंडे और चिकन के उत्पादन मूल्य में दिखती है।

हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अंडे के दाम केवल एथेनॉल की वजह से नहीं बढ़ रहे हैं बल्कि गर्मी का तनाव, मुर्गियों की मृत्यु दर, मौसम में बदलाव, और आयातित चारे की उपलब्धता और कीमतें भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं।

मक्का से एथेनॉल उत्पादन तेजी से बढ़ा

मक्का से एथेनॉल उत्पादन तेजी से बढ़ा है। 2022 में यह करीब 1 मिलियन टन था, जो 2024 में बढ़कर 6 मिलियन टन और अब 17 मिलियन टन पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक यह 25 मिलियन टन तक जा सकता है। पोल्ट्री उद्योग देश के कुल मक्का का करीब 60 फीसदी हिस्सा इस्तेमाल करता है, जिससे वह एथेनॉल उद्योग के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा में है।

मक्का आयात करने पर मजबूर हुआ भारत

इस बढ़ती मांग ने भारत की वैश्विक मक्का बाजार में स्थिति भी बदल दी है। पहले भारत बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों को मक्का निर्यात करता था, लेकिन अब घरेलू मांग ने निर्यात योग्य बचत को खत्म कर दिया है और भारत को मक्का आयात करने पर मजबूर कर दिया है। वित्त वर्ष 2025 में भारत का मक्का आयात 1 मिलियन टन के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, और अब भी करीब आधा मिलियन टन आयात हो रहा है। उद्योग को डर है कि अगर घरेलू उत्पादन तेज नहीं बढ़ा, तो यह आयात और बढ़ सकता है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

बिजनेस न्यूज, आज के पेट्रोल और डीजल के दाम, शेयर बाजार की ताज़ा खबरें, आईटीआर न्यूज से जुड़ी जरूरी जानकारी पढ़ने के लिए Live Hindustan App अभी डाउनलोड करें।
Hindi Newsबिज़नेस न्यूज़एथेनॉल के चलते अब अंडा हुआ महंगा, आगे चिकन की बारी