दूध से पनीर तक पर युद्ध का असर, खाली हो सकते हैं खाड़ी देशों के रेफ्रिजरेटर

Mar 12, 2026 06:43 am ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान से इराक, कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई और सऊदी अरब के पूर्वी हिस्सों में समुद्री सप्लाई गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।इन बाजारों की मांग में मुख्य रूप से तीन उत्पाद शामिल हैं, होल मिल्क पाउडर, पनीर और कंडेंस्ड मिल्क।

दूध से पनीर तक पर युद्ध का असर, खाली हो सकते हैं खाड़ी देशों के रेफ्रिजरेटर

ईरान-इजराय में युद्ध और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट में रुकावटों ने पूरी दुनिया में गैस, पेट्रोल-डीजल, एलएनजी, सीएनजी और पीएनजी के लिए संकट तो खड़ा कर ही दिया है। अब इस स्ट्रेट में रुकावटों ने ग्लोबल डेयरी उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। रूरल वायस ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया है कि अगर यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाधित होता है, तो अरबों डॉलर का डेयरी व्यापार प्रभावित हो सकता है। यह संकरा जलमार्ग खाड़ी क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं के लिए मुख्य प्रवेश द्वार है, जो उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से जोड़ता है।

मध्य पूर्व: दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी आयातक क्षेत्र

मध्य पूर्व वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक आयात-निर्भर डेयरी बाजारों में से एक है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 में इस क्षेत्र ने लगभग 13 लाख टन डेयरी उत्पादों का आयात किया, जिसकी कुल कीमत लगभग 4.2 अरब डॉलर रही। यह विशाल आंकड़ा ग्लोबल सप्लाई चेन पर इस क्षेत्र की भारी निर्भरता को बताता है।

कौन से देश सबसे ज्यादा हैं आयात पर निर्भर?

हालांकि, ईरान खुद डेयरी का बड़ा आयातक नहीं है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक स्थिति इसे खाड़ी के कई देशों के लिए जीवनरेखा बनाती है। प्रमुख आयातकों में सऊदी अरब सबसे आगे, हर साल लगभग 2.1 अरब डॉलर के डेयरी उत्पाद आयात करता है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दूसरे स्थान पर, लगभग 1.5 अरब डॉलर का आयात। इराक लगभग 76.3 करोड़ डॉलर के डेयरी उत्पाद आयात करता है। इसके अलावा कुवैत, ओमान, बहरीन और कतर भी करोड़ों डॉलर के डेयरी उत्पादों की खरीद करते हैं।

जीसीसी देशों का दबदबा: यूएई बना सबसे बड़ा बाजार

खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों ने अकेले 2024 में लगभग 2.7 अरब डॉलर के डेयरी उत्पादों का आयात किया। इस कुल आयात का लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा अकेले संयुक्त अरब अमीरात का है, जो इसे क्षेत्र का सबसे बड़ा डेयरी बाजार बनाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएई में प्रति व्यक्ति औसतन लगभग 170 डॉलर मूल्य के डेयरी उत्पाद सालाना आयात किए जाते हैं।

कौन-से उत्पाद हैं सबसे अधिक संवेदनशील?

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान से इराक, कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई और सऊदी अरब के पूर्वी हिस्सों में समुद्री सप्लाई गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।इन बाजारों की मांग में मुख्य रूप से तीन उत्पाद शामिल हैं, होल मिल्क पाउडर, पनीर और कंडेंस्ड मिल्क। ये तीनों मिलकर मध्य पूर्व के कुल डेयरी आयात का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा हैं। अकेले यूएई हर साल लगभग 2 लाख टन होल मिल्क पाउडर आयात करता है, जबकि पनीर उसके कुल डेयरी आयात मूल्य का 28 प्रतिशत है।

वैश्विक निर्यातकों के लिए दोहरी मुसीबत

खाड़ी क्षेत्र में समुद्री मार्गों के बंद होने की स्थिति में सबसे ज्यादा नुकसान प्रमुख निर्यातक देशों को होगा, जिनमें यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड और अमेरिका शामिल हैं। ये देश बड़ी मात्रा में पनीर, दूध पाउडर, मक्खन और कंडेंस्ड दूध की आपूर्ति करते हैं।

स्थिति को और जटिल बनाने वाला एक अन्य कारक बाल-अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास पहले से मौजूद अस्थिरता है, जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है। यदि होर्मुज और लाल सागर दोनों मार्ग एक साथ अस्थिर हो जाते हैं, तो वैश्विक निर्यातकों के सामने गंभीर लॉजिस्टिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

लंबा रास्ता, भारी लागत

ऐसी प्रतिकूल स्थिति में, रेफ्रिजरेटेड डेयरी उत्पादों को ले जाने वाले जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे पर स्थित केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ सकता है। इससे न केवल ट्रांसपोर्टेशन टाइम में भारी वृद्धि होगी, बल्कि मालभाड़ा लागत भी आसमान छू सकती है। यह विशेष रूप से उन डेयरी उत्पादों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, जो तापमान-नियंत्रित कोल्ड चेन पर निर्भर करते हैं।

Drigraj Madheshia

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Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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