युद्ध का असर : सोने से सुरक्षित निवेश का दर्जा छीन रहा अमेरिकी डॉलर
आमतौर पर संकट के समय लोग सोने में निवेश करते हैं, लेकिन इस बार बड़ी संख्या में निवेशक डॉलर को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और ब्याज दरें ऊंची रहने से डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि सोने में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। हिन्दुस्तान ब्यूरो की स्पेशल रिपोर्ट…

अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते दुनियाभर में सुरक्षित निवेश की रणनीति में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। आमतौर पर संकट के समय लोग सोने में निवेश करते हैं, लेकिन इस बार बड़ी संख्या में निवेशक डॉलर को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और ब्याज दरें ऊंची रहने से डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि सोने में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है।
सोने की अहमियत कायम
जब तक कच्चे तेल की कीमत ऊंची बनी रहेगी, महंगाई का डर बना रहेगा और बॉन्ड यील्ड ऊंची रहेगी, तब तक डॉलर को सोने पर बढ़त मिल सकती है। लेकिन सोने की अहमियत खत्म नहीं होगी। संभव है थोड़े समय सोना कमजोर रहे, लेकिन लंबे समय में सोना आर्थिक संकट, मुद्रा कमजोरी और वैश्विक अस्थिरता के खिलाफ सुरक्षा देने वाला निवेश बना रहेगा।
सोने ने देखी 40 साल की ऐतिहासिक गिरावट
युद्ध शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में पहले तेज उछाल आया था लेकिन बाद में 40 साल की ऐतिहासिक गिरावट भी देखी गई। सोना उच्चतम स्तर से अब तक करीब 15% टूट चुका है।
इस साल इसने 5,595.51 डॉलर के ऑल टाइम हाई को छुआ था। अब फिसलकर 4700 डॉलर के करीब बना हुआ है। गिरावट ने कई निवेशकों को हैरान कर दिया है, क्योंकि खासकर वे लोग जो ऊंचे दाम पर निवेश करने आए थे, अब उन्हें खासा नुकसान हुआ है।
सुरक्षित निवेश क्यों बना?
डॉलर की मजबूती का सबसे बड़ा कारण पेट्रो-डॉलर प्रणाली है। दुनिया में कच्चे तेल का अधिकांश व्यापार डॉलर में होता है। तनाव ने तेल की आपूर्ति को बाधित किया है, खासकर होर्मुज जलमार्ग में लगातार रुकावट के कारण इसकी कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।
इससे डॉलर की मांग काफी ज्यादा बढ़ गई है और यह महंगा हो गया है। इसका सीधा असर सोने की खरीदारी पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो गया है, जिससे इसकी मांग घटी है और और कीमतों में तेज गिरावट आई है।
अमेरिकी डॉलर फिलहाल सबसे मजबूत
वर्ष 2025 में लगभग 10 प्रतिशत गिरने के बाद मार्च 2026 में डॉलर सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। अनिश्चितता के समय डॉलर अब भी दुनिया की सबसे मजबूत मुद्रा बना हुआ है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि इस समय निवेशक सोने की बजाय नकद और डॉलर में पैसा रखना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं।
इसके अलावा एक और कारण अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें हैं। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक सोने की बजाय ब्याज देने वाली संपत्तियों और डॉलर में निवेश करना पसंद करते हैं। सोना ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची ब्याज दर के समय सोने की मांग कम हो जाती है।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


