क्या एशिया में 1970 के तेल संकट जैसा बड़ा बदलाव आने वाला है? पेट्रोल-डीजल से दूरी बढ़ी

Drigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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भारत में LPG की कमी के चलते लोग इंडक्शन चूल्हों की ओर जा रहे हैं। एशिया के कई देशों में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की मांग तेजी से बढ़ी है। थाईलैंड और सिंगापुर जैसे बाजारों में EV की हिस्सेदारी 50% तक पहुंच गई है।

क्या एशिया में 1970 के तेल संकट जैसा बड़ा बदलाव आने वाला है? पेट्रोल-डीजल से दूरी बढ़ी

पश्चिम एशिया संकट और तेल की कीमतों में उछाल का असर अब धीरे-धीरे एशिया की अर्थव्यवस्थाओं और आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह बदलाव वैसा ही हो सकता है जैसा 1970 के दशक के तेल संकट के बाद यूरोप में देखने को मिला था, जब पूरी ऊर्जा व्यवस्था ही बदल गई थी।

1970 का सबक: कैसे यूरोप ने तेल पर निर्भरता घटाई

1973 और 1979 के तेल संकट के बाद शुरुआत में अनुमान था कि यूरोप पहले की तरह ही तेल पर निर्भर रहेगा। लेकिन हुआ इसका उल्टा। महंगे कच्चे तेल ने यूरोप को गैस और परमाणु ऊर्जा की ओर धकेल दिया। नतीजा यह हुआ कि 1980 के दशक तक तेल की खपत गिर गई और गैस का इस्तेमाल दोगुना हो गया।

अब एशिया में दिख रहे वही संकेत

आज एशिया भी उसी मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। दुनिया का 80% से ज्यादा तेल-गैस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर एशिया जाता है, लेकिन इस रूट पर तनाव और सप्लाई बाधित होने से कीमतें बढ़ रही हैं और देशों की निर्भरता संकट बनती जा रही है।

जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देश पहले से ही आयात पर निर्भर हैं, जबकि वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देश भी अब नेट इंपोर्टर बन चुके हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश और थाईलैंड में घरेलू गैस उत्पादन घट रहा है, जिससे महंगे आयात पर निर्भरता बढ़ रही है।

आम लोगों पर सीधा असर

ऊर्जा महंगी होने का असर सीधे आम आदमी पर दिख रहा है। जापान और दक्षिण कोरिया में खाने-पीने की चीजें महंगी हो रही हैं। कई देशों में हवाई यात्रा महंगी हो गई है, एयरलाइंस ने उड़ानें कम कर दी हैं।

इस्लामाबाद में एक गैसोलीन स्टेशन पर ग्राहकों की कतार। पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतें बढ़ा दीं।

पाकिस्तान, श्रीलंका और फिलीपींस में फ्यूल बचाने के लिए चार दिन का वर्क वीक लागू किया गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भी किसानों पर असर दिख रहा है, जहां फर्टिलाइजर महंगे हो रहे हैं और लागत बढ़ रही है।

क्लीन एनर्जी की ओर तेज रुख

इस संकट का सबसे बड़ा असर यह है कि अब क्लीन एनर्जी की ओर तेजी से रुख बढ़ रहा है। भारत में LPG की कमी के चलते लोग इंडक्शन चूल्हों की ओर जा रहे हैं। एशिया के कई देशों में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की मांग तेजी से बढ़ी है। थाईलैंड और सिंगापुर जैसे बाजारों में EV की हिस्सेदारी 50% तक पहुंच गई है। सोलर एनर्जी में भी बूम देखने को मिल रहा है। फिलीपींस, इंडोनेशिया और पाकिस्तान में सोलर इंस्टॉलेशन तेजी से बढ़ रहे हैं।

Induction

OPEC से UAE का बाहर होना बना नया ट्रिगर: ओपेक से यूएई के बाहर होने का फैसला तेल बाजार में अस्थिरता को और बढ़ा सकता है। इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ेगा और आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ेगा।

क्या तेल की मांग घटने की शुरुआत हो चुकी है: एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर यह संकट लंबा चलता है, तो एशिया में तेल की मांग पर बड़ा असर पड़ सकता है। जैसे यूरोप में 1970 के बाद तेल की मांग कभी पहले जैसी नहीं रही, वैसे ही एशिया में भी बड़ा बदलाव संभव है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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