अनिल अंबानी से एक बार फिर होगी पूछताछ, ईडी ने 14 नवंबर को बुलाया
इससे पहले जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उद्योगपति अनिल अंबानी से अगस्त में पूछताछ की थी। एजेंसी ने हाल ही में अंबानी की समूह कंपनियों के खिलाफ जांच के तहत 7,500 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है।

अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब एक बार फिर से जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी को पूछताछ के लिए बुलाया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के सूत्रों ने बताया कि अनिल अंबानी को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 14 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इससे पहले जांच एजेंसी ने उद्योगपति अनिल अंबानी से अगस्त में पूछताछ की थी। एजेंसी ने हाल ही में अंबानी की समूह कंपनियों के खिलाफ जांच के तहत 7,500 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है।
कुर्क का कारोबार पर असर नहीं
हालांकि, 7500 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की से अनिल अंबानी के रिलायंस समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के कारोबार पर प्रभाव नहीं पड़ा है। समूह की सूचीबद्ध कंपनियों ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कुर्क की गई अधिकांश संपत्तियां रिलायंस कम्युनिकेशंस की हैं, जो कि समाधान पेशेवर और भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) के नियंत्रण में हैं।
कंपनियों ने कहा- रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर यह स्पष्ट करना चाहती हैं कि दोनों कंपनियों के संचालन, प्रदर्शन या भविष्य की संभावनाओं पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा है। दोनों ही कंपनियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं। दोनों कंपनियां वृद्धि, परिचालन उत्कृष्टता और सभी संबंधित पक्षों, विशेष रूप से 50 लाख से अधिक शेयरधारक परिवार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर ध्यान दे रही हैं।
31 अक्टूबर को ईडी का आदेश
बता दें कि जांच एजेंसी ने 31 अक्टूबर को धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 42 संपत्तियों को कुर्क करने के लिए चार अलग-अलग अस्थायी आदेश जारी किए। इसमें अनिल अंबानी के मुंबई के पाली हिल स्थित पारिवारिक घर के अलावा उनकी समूह कंपनियों की अन्य आवासीय और कॉमर्शियल संपत्तियां भी शामिल हैं। यह कुर्की रिलायंस कम्युनिकेशंस और उससे संबंधित कंपनियों से जुड़े मामलों से जुड़ी है। ये मामले 2017 और 2019 के बीच यस बैंक से लिए गए ऋण का कथित रूप से दुरुपयोग से संबंधित हैं।





