
दीवाली पर शॉपिंग का नया रिकॉर्ड, सरकारी खर्च से भी भारी, 6.05 लाख करोड़ की सेल
दीवाली पर हुई शॉपिंग का नया रिकॉर्ड बन गया है। लोगों ने इस साल दीवाली पर कुल 6.05 लाख करोड़ रुपये किए, जो पिछले साल के मुकाबले 42 फीसदी अधिक है। यह आंकड़ा इसलिए खास है क्योंकि केंद्र सरकार का बजट 50 लाख करोड़ रुपये के करीब है।
देश में दीवाली पर हुई शॉपिंग का नया रिकॉर्ड बन गया है। लोगों ने इस साल दीवाली पर कुल 6.05 लाख करोड़ रुपये किए, जो पिछले साल के मुकाबले 42 फीसदी अधिक है। यह आंकड़ा इसलिए खास है क्योंकि केंद्र सरकार का बजट 50 लाख करोड़ रुपये के करीब है। केवल वित्त और रक्षा मंत्रालय का बजट छह लाख करोड़ से अधिक है, बाकी मंत्रालयों के बजट से दीवाली पर खर्च की गई रकम आगे निकल गई है।

पांच लाख करोड़ से अधिक के उप्ताद बिके
व्यापारियों के संगठन कैट ने मंगलवार को त्योहारी सीजन पर खरीद-बिक्री की रिपोर्ट जारी की। इसके अनुसार इस साल दीवाली पर 6.05 लाख करोड़ रुपये की बिक्री हुई है, जिसमें से 5.40 लाख करोड़ रुपये उत्पादों की बिक्री, जबकि 65,000 करोड़ रुपये सेवाओं से आए। पिछले साल दिवाली पर बिक्री 4.25 लाख करोड़ रुपये रही थी। कैट ने यह आंकड़ा देशभर के 60 प्रमुख वितरण केंद्रों में किए गए सर्वेक्षण के आधार पर जारी किया। इनमें राज्यों की राजधानियां और दूसरी एवं तीसरी श्रेणी के शहर शामिल हैं।
जीएसटी कटौती का दिखा असर
कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) कैट के मुताबिक, हाल ही में जीएसटी दरों में की गई कटौती का साफ असर उपभोक्ताओं के रुझान पड़ा है। जरूरी सामान के दाम घटने से उपभोक्ता त्योहार के दौरान अधिक खर्च के लिए प्रोत्साहित हुए। सर्वे में शामिल 72 % व्यापारियों ने दैनिक उपयोग की वस्तुओं, जूते, परिधान, कन्फेक्शनरी, घरेलू साजसज्जा और टिकाऊ उपभोक्ता उत्पादों पर जीएसटी की दरों में कटौती को उच्च बिक्री का मुख्य कारण बताया।
स्थानीय दुकानों पर उमड़ी भीड़
आंकड़ों के अनुसार, मुख्यधारा की खुदरा बिक्री में 85 % योगदान गैर-कॉरपोरेट और पारंपरिक बाजारों का योगदान रहा। यह ऑनलाइन खरीदारी के दौर में छोटे व्यापारियों और स्थानीय बाजारों की मजबूत वापसी को दर्शाता है।
ग्रामीण बाजार ने दी मजबूती
दीवाली की कुल खरीदारी में ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों का योगदान 28% रहा, जो बताता है कि आर्थिक गतिविधियां केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। इस दौरान लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और रिटेल सर्विसेज की वजह से लगभग 50 लाख अस्थायी रोजगार भी बने।
क्षेत्रवार बिक्री के आंकड़े
राशन सामग्री और रोजमर्रा के सामान 12 %
सोना एवं आभूषण 10 %
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं बिजली उपकरण 08 %
टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद 07 %
रेडिमेड कपड़े 07 %
उपहार 07 %
घरेलू सजावट 05 %
फर्निशिंग एवं फर्नीचर 05 %
मिठाई और नमकीन 05 %
कपड़ा एवं वस्त्र 04 %
पूजा सामग्री 03 %
फल एवं सूखे मेवे 03 %
किस मंत्रालय का कितना बजट
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय 2,87,333
रेल मंत्रालय 2,55,445
गृह मंत्रालय 2,33,210
उपभोक्ता मामले 2,15,767
ग्रामीण विकास मंत्रालय 1,90,405
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय 1,61,965
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय 1,37,756
संचार मंत्रालय 1,08,105
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय 99,858
(2025-26 के लिए बजट आवंटन के अनुसार, राशि करोड़ रुपये में)





