100% टैरिफ का डर! 4% तक लुढ़के ये इंडियन फार्मा स्टॉक, इस वजह से बढ़ रही निवेशकों की टेंशन
अमेरिका द्वारा दवा कंपनियों पर 100% तक टैरिफ लगाने की संभावित योजना की खबर से भारतीय फार्मा सेक्टर के स्टॉक्स में गिरावट देखी गई। सन फार्मा, Divi's लैब और इप्का जैसे बड़े शेयर 2% से 4% तक टूट गए। यह फैसला अगर लागू होता है, तो भारतीय दवा कंपनियों के एक्सपोर्ट और मुनाफे पर बड़ा असर पड़ सकता है।

ग्लोबल मार्केट से आई एक बड़ी खबर ने भारतीय फार्मा सेक्टर में हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) द्वारा दवाइयों पर भारी टैरिफ लगाने की संभावित योजना की खबर आते ही भारत की दिग्गज फार्मा कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका सरकार उन दवा कंपनियों पर 100% तक टैरिफ लगा सकती है, जो अमेरिकी बाजार में दवाओं की कीमत कम करने के लिए समझौता नहीं करेंगी। इस खबर का असर सीधे भारतीय कंपनियों पर पड़ा, क्योंकि वे अमेरिका में बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट करती हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
किन कंपनियों पर पड़ा असर?
मार्केट के धड़ाम होते ही गिरावट की मार कई बड़ी कंपनियों पर दिखी। इसका असर सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज (Sun Pharmaceutical Industries) पर भी पड़ा, जिसके शेयर में 3% से ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
इसके अलावा डिविस लेबोरेटरीज लिमिटेड (Divi's Laboratories) में 2% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। वहीं, बायोकॉन (Biocon) के स्टॉक करीब 4% तक टूट गए। वहीं, इ्प्का (Ipca के शेयर 1.93% की गिरावट के साथ 1,479.10 रुपये के आसपास थे। वहीं, टोरेंट (Torrent) जैसी कंपनी भी दबाव में दिखी, जिसके शेयर 3.23% की गिरावट के साथ 3,978.70 रुपये पर पहुंच गए।
Divi's Laboratories, Biocon, Torrent
इंडेक्स भी हुआ लाल
फार्मा सेक्टर का प्रमुख इंडेक्स निफ्टी फार्मा (Nifty Pharma) लगातार चौथे दिन गिरा और कुल मिलाकर 5% से ज्यादा टूट चुका है, यानी यह सिर्फ एक-दो शेयर नहीं, बल्कि पूरा सेक्टर दबाव में है।
अमेरिका का प्लान क्या है?
अमेरिका चाहता है कि दवाओं का उत्पादन देश के अंदर (US) हो और दवाओं की कीमतें कम हों। इसी वजह से सरकार कंपनियों पर दबाव बनाने के लिए भारी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रही है। कुछ बड़ी ग्लोबल कंपनियां जैसे Pfizer और Eli Lilly and Company पहले ही सरकार के साथ समझौता कर चुकी हैं, जिससे उन्हें 3 साल के लिए ऐसे शुल्कों से राहत मिल गई है।
प्रस्तावित टैरिफ व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत चल रही जांच से जुड़े हैं। सूत्रों के अनुसार, जिन कंपनियों का प्रशासन के साथ कोई समझौता नहीं है या बातचीत जारी नहीं है, उन्हें 100 प्रतिशत तक के टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।
भारतीय कंपनियों के लिए खतरा क्यों?
भारत की फार्मा कंपनियों का बड़ा हिस्सा अमेरिका को निर्यात होता है। अगर 100% टैरिफ लागू होता है, तो दवाएं महंगी हो जाएंगी और डिमांड घट सकती है। इससे कंपनियों का मुनाफा भी प्रभावित होगा।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
शॉर्ट टर्म में फार्मा स्टॉक्स में वोलैटिलिटी बढ़ सकती है। वहीं, लॉन्ग टर्म में कंपनियां नए मार्केट या स्ट्रेटेजी की तलाश करेंगी, जिससे लॉन्ग टर्म निवेशकों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।
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लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते
हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
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उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
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दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई
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