कच्चे तेल की महंगाई के बावजूद ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी नहीं कर पाएगा आरबीआई

Mar 13, 2026 01:00 pm ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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नेटिक्सिस इमर्जिंग एशिया की वरिष्ठ अर्थशास्त्री त्रिन्ह गुयेन के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फिलहाल ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी करने की संभावना नहीं है, भले ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई का दबाव बना हुआ है।

कच्चे तेल की महंगाई के बावजूद ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी नहीं कर पाएगा आरबीआई

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फिलहाल ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी करने की संभावना नहीं है, भले ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई का दबाव बना हुआ है। एक अर्थशास्त्री का कहना है कि मौजूदा स्थिति डिमांड के बजाय सप्लाई के झटके (सप्लाई-साइड शॉक) की वजह से पैदा हुई है।

सप्लाई का झटका बनाम डिमांड पक्ष की महंगाई

नेटिक्सिस इमर्जिंग एशिया की वरिष्ठ अर्थशास्त्री त्रिन्ह गुयेन ने न्यूज एजेंसी एएनआई से एक विशेष बातचीत में स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट के बावजूद, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया तत्काल दरें बढ़ाने की प्रतिक्रिया नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि अभी यह स्थिति बहुत शुरुआती दौर में है और यह स्पष्ट नहीं है कि यह संकट कितने समय तक रहेगा।

गुयेन ने समझाया कि ब्याज दरें बढ़ाने का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, खासकर रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों पर, जो ब्याज दरों के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं, लेकिन इस कदम से मौजूदा सप्लाई की समस्या का समाधान नहीं होगा।

महंगाई पर लंबे संघर्ष का असर

अर्थशास्त्री ने कहा कि नीति निर्माता ब्याज दरों को मुख्य हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय कोविड-19 अवधि के दौरान अपनाए गए अन्य उपायों पर भरोसा कर सकते हैं। गुयेन ने आगाह किया कि अगर संघर्ष लंबा चलता है, तो ऊर्जा झटका धीरे-धीरे पूरी अर्थव्यवस्था में फैल सकता है। इससे परिवहन लागत, हवाई किराए और अंततः खाद्य कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ जाएगा।

मौजूदा राहत और भविष्य की संभावनाएं

हालांकि, गुयेन ने यह भी कहा कि फिलहाल महंगाई की दर कई कारकों की वजह से अपेक्षाकृत कम है, जैसे अच्छा मॉनसून सीजन और महंगाई मापने के तरीके में बदलाव। कम आधार (लो बेस) का मतलब है कि महंगाई निचले स्तर से शुरू हो रही है। उन्होंने कहा कि RBI का अगला नीतिगत कदम संभवतः ब्याज दरों में बढ़ोतरी ही होगी, लेकिन यह फिलहाल नहीं होगा।

क्षेत्र के अधिकांश केंद्रीय बैंकों की तरह, RBI भी संभवतः स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करेगा। गुयेन ने यह भी सुझाव दिया कि यदि रुपये में अत्यधिक गिरावट आती है या बाजार में भारी बिकवाली का दौर चलता है, तो मौद्रिक नीति का इस्तेमाल अस्थिरता को कम करने और निवेशकों का भरोसा बहाल करने के लिए किया जा सकता है।

फरवरी में रेपो रेट में नहीं हुआ था बदलाव

बता दें रिजर्व बैंक ने फरवरी में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा गया। RBI ने 2025-2026 के लिए महंगाई के अनुमान को 2% से बढ़ाकर 2.1% कर दिया, जबकि पहले Q4 के लिए यह 3.2% रहने का अनुमान था।

रेपो रेट कम होने से लोन कैसे सस्ता होता है?

जिस ब्याज दर पर RBI बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अकसर इसका फायदा कस्टमर को देते हैं। यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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