AI की नकली आवाज ने उड़ा दिए ₹11 करोड़! कंपनी के कर्मचारी से हुई सबसे बड़ी गलती, मामला होश उड़ा देगा
मुख्य बातें
- स्काई गोल्ड & डायमंड की सब्सिडियरी स्टारमंगलसूत्रा प्रा
- को डीपफेक और प्रोफाइल क्लोनिंग के जरिए करीब ₹10.70 करोड़ का नुकसान हुआ है
- ठगों ने कंपनी के एक कर्मचारी के मोबाइल और लैपटॉप से डायरेक्टर की फर्जी पहचान बनाकर करोड़ों दूसरे खातों में ट्रांसफर करा दिए
- आइए पूरा मामला समझने की कोशिश करते हैं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जितनी तेजी से लोगों की जिंदगी आसान बना रही है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराधी भी इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण ज्वेलरी कंपनी स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स लिमिटेड (Sky Gold and Diamonds Ltd.) की सब्सिडियरी SPL (Starmangalsutra Private Limited) में सामने आया है, जहां डीपफेक (Deepfake) तकनीक और प्रोफाइल क्लोनिंग का इस्तेमाल कर कंपनी को करीब ₹10.70 करोड़ (करीब ₹11 करोड़) का चूना लगा दिया गया। यह मामला इस बात का बड़ा सबूत है कि अब साइबर ठगी केवल फर्जी ईमेल या फोन कॉल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि AI आधारित तकनीक से अपराधी किसी की पहचान बनाकर भी करोड़ों रुपये की ठगी कर सकते हैं।
कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया कि यह फ्रॉड कंपनी के एक कर्मचारी के ऑफिशियल मोबाइल फोन और लैपटॉप से जुड़ा है। साइबर अपराधियों ने किसी तरह इन दोनों डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच हासिल कर ली और फिर डीपफेक (Deepfake), प्रोफाइल क्लोनिंग और मनोवैज्ञानिक दबाव (Coercion) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए खुद को कंपनी के एक डायरेक्टर के रूप में पेश किया। कर्मचारी को लगा कि उसे वास्तव में कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश मिल रहे हैं। इसी भरोसे में उसने कंपनी के बैंक खाते से कई फंड ट्रांसफर कर दिए, जो बाद में अज्ञात बैंक खातों में पहुंच गए।
जब पूरे मामले की जांच की गई तो पता चला कि संबंधित डायरेक्टर ने इस तरह के किसी भी ट्रांसफर का निर्देश कभी दिया ही नहीं था। यानी कर्मचारी पूरी तरह AI आधारित फर्जी पहचान और साइबर ठगी का शिकार बन गया। कंपनी के अनुसार, इस घटना से करीब ₹10.70 करोड़ का वित्तीय नुकसान हुआ है।
घटना का पता चलते ही कंपनी ने तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन और संबंधित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। साथ ही जिन बैंक खातों में पैसा भेजा गया, उन्हें ट्रेस और फ्रीज कराने के लिए बैंकों के साथ कार्रवाई शुरू कर दी गई है, ताकि अधिक से अधिक राशि वापस लाई जा सके। कंपनी ने कहा कि वह सभी संबंधित एजेंसियों और बैंकों के साथ मिलकर पैसे की रिकवरी और कानूनी कार्रवाई में पूरी तरह सहयोग कर रही है।
राहत की बात यह है कि कंपनी ने साफ किया है कि इस घटना में उसके आईटी सिस्टम, नेटवर्क, ग्राहक डेटा या कर्मचारियों के डेटाबेस से किसी तरह की छेड़छाड़ या डेटा लीक के संकेत नहीं मिले हैं। शुरुआती जांच के अनुसार मामला केवल कर्मचारी के कंपनी द्वारा जारी किए गए मोबाइल और लैपटॉप के गलत इस्तेमाल तथा कम्युनिकेशन चैनल के दुरुपयोग तक सीमित है। कंपनी का कहना है कि इस घटना का उसके सामान्य कारोबार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है और सभी व्यावसायिक गतिविधियां पहले की तरह जारी हैं।
हालांकि, इस घटना के बाद Sky Gold और उसकी सब्सिडियरी ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है। कंपनी अब कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के प्रति ज्यादा जागरूक बनाएगी, बड़े भुगतान के लिए मल्टी-लेवल वेरिफिकेशन, कॉल-बैक कन्फर्मेशन और आंतरिक नियंत्रण प्रक्रियाओं को और सख्त करेगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी कंपनियों और आम लोगों के लिए एक बड़ा सबक है। AI और Deepfake तकनीक के बढ़ते दौर में केवल किसी कॉल, वीडियो या मैसेज पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। किसी भी बड़े वित्तीय लेन-देन से पहले पहचान की दोबारा पुष्टि करना और मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय अपनाना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई
स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही
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