Dabur के CEO को लगा बड़ा झटका! 50% काट दिया गया बोनस, जानिए वजह
मुख्य बातें
- डॉबर इंडिया (Dabur India) ने FY26 में अपने ग्लोबल CEO मोहित मल्होत्रा और अन्य टॉप अधिकारियों के परफॉर्मेंस बोनस में 50% की कटौती की है
- हालांकि, फिक्स्ड सैलरी बढ़ने के बावजूद CEO का कुल वेतन 3.1% घट गया
- आइए इसके पीछे की वजह समझते हैं

देश की प्रमुख एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों में शामिल डॉबर इंडिया (Dabur India) से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में अपने टॉप अधिकारियों को मिलने वाले परफॉर्मेंस बोनस (Performance-Linked Incentive) में करीब 50% की कटौती कर दी है। सबसे बड़ा असर कंपनी के ग्लोबल CEO मोहित मल्होत्रा पर पड़ा, जिनका बोनस पिछले साल के मुकाबले आधा कर दिया गया। हालांकि, उनकी फिक्स्ड सैलरी बढ़ी, लेकिन, कुल सालाना वेतन में गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में निवेशकों और कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कंपनी ने इतना बड़ा फैसला क्यों लिया?
कंपनी की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, मोहित मल्होत्रा का परफॉर्मेंस बोनस FY25 में ₹3.25 करोड़ था, जिसे FY26 में घटाकर ₹1.63 करोड़ कर दिया गया, यानी बोनस में सीधे 50% की कटौती हुई। हालांकि, इस दौरान उनकी फिक्स्ड सैलरी और अन्य भत्ते बढ़कर ₹12.92 करोड़ हो गए, जो एक साल पहले ₹11.82 करोड़ थे। इसके बावजूद उनका कुल सालाना वेतन ₹15.84 करोड़ से घटकर ₹15.35 करोड़ रह गया, यानी करीब 3.1% की कमी आई।
सिर्फ CEO ही नहीं, बल्कि कंपनी के होल-टाइम डायरेक्टर पी. डी. नारंग के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनका परफॉर्मेंस इंसेंटिव ₹3.54 करोड़ से घटकर ₹1.77 करोड़ रह गया। हालांकि, उनकी फिक्स्ड सैलरी बढ़ने के कारण कुल वेतन में केवल मामूली गिरावट आई और यह ₹17.46 करोड़ से घटकर ₹17.09 करोड़ रहा।
दिलचस्प बात यह है कि डॉबर (Dabur) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बोनस घटाने की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई है। कंपनी की रिम्यूनरेशन पॉलिसी के मुताबिक, नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमिटी हर साल कंपनी के कार्यकारी निदेशकों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है और उसी के आधार पर वेतन व बोनस की सिफारिश बोर्ड को करती है, यानी बोनस पूरी तरह प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
एक्सपर्ट का मानना है कि FY26 डॉबर के लिए कारोबार के लिहाज से चुनौतीपूर्ण साल रहा। कंपनी के हेल्थकेयर और फूड्स एंड बेवरेज कारोबार पर पूरे साल दबाव बना रहा। वहीं, चौथी तिमाही में मिडिल ईस्ट के बाजार में कमजोरी का असर कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर भी पड़ा। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद डॉबर (Dabur) ने लागत पर कंट्रोल रखते हुए अच्छा प्रदर्शन किया। कंपनी का नेट प्रॉफिट 7.4% बढ़कर ₹1,869 करोड़ पहुंच गया, जबकि कुल राजस्व 5% बढ़कर ₹13,193 करोड़ हो गया।
शेयर बाजार में भी डॉबर (Dabur) का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। 15 जुलाई 2026 तक कंपनी का शेयर निफ्टी FMCG इंडेक्स (निफ्टी FMCG इंडेक्स) की तुलना में करीब 5% कमजोर रहा। यही वजह है कि निवेशकों की नजर अब कंपनी की भविष्य की रणनीति पर है।
हालांकि, आने वाले वित्त वर्ष FY27 को लेकर बाजार की उम्मीदें सकारात्मक हैं। कई ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि घरेलू कारोबार में लगभग दो अंकों (Near Double Digit) की ग्रोथ और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाई-टीन्स ग्रोथ से कंपनी की कमाई में सुधार हो सकता है। खासकर हेल्थकेयर और बेवरेज सेगमेंट में रिकवरी डॉबर (Dabur) के लिए सबसे अहम होगी।
डॉबर (Dabur) द्वारा अपने टॉप अधिकारियों का बोनस घटाना यह दिखाता है कि अब कंपनियां केवल पद नहीं, बल्कि प्रदर्शन के आधार पर इनाम देने की नीति को और सख्ती से लागू कर रही हैं। आने वाले महीनों में कंपनी का कारोबार कैसा रहता है, उसी पर यह तय होगा कि भविष्य में बोनस और वेतन में फिर से बढ़ोतरी होती है या नहीं।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
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स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही
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