वेतन आयोग होगा लागू लेकिन DA पर फैसला नहीं, इन कर्मचारियों की सरकार पर नजर
ऐसा माना जा रहा है कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को अगले साल की पहली छमाही तक सौंप सकता है। इस माहौल के बीच पश्चिम बंगाल की सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी है।

DA news: केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है। यह वेतन आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपने के लिए एक्शन मोड में आ चुका है। वेतन आयोग लगातार बैठकों का दौर चला रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को अगले साल की पहली छमाही तक सौंप सकता है। इस माहौल के बीच पश्चिम बंगाल की सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी है। हालांकि, इसमें डीए यानी महंगाई भत्ते का जिक्र नहीं किया गया है। अब सवाल है कि राज्य की नई सरकार कैसे सातवें वेतन आयोग को लागू करेगी। बता दें कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद सातवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी जाएगी।
क्या हुआ फैसला?
राज्य की महिला, बाल एवं सामाजिक कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में संशोधन के लिए सातवें राज्य वेतन आयोग के गठन को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। उन्होंने, इसकी पुष्टि भी की कि राज्य कर्मचारियों को बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता (डीए) देने का मुद्दा कैबिनेट बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं था। उन्होंने बताया कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन के लिए सातवें राज्य वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि इसका दायरा नगर निकायों, स्थानीय निकायों, शिक्षा बोर्ड और राज्य संचालित शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों तक भी बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आयोग के गठन का विवरण जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा। हालांकि इसके लागू होने की तारीख स्पष्ट नहीं की गई। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी अभियान में वादा किया था कि नया वेतन आयोग राज्य में सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर लागू किया जाएगा।
अर्थशास्त्रियों और प्रशासनिक विशेषज्ञों के मुताबिक, सातवें वेतन आयोग को लागू करने से राज्य के कर्मचारियों की सैलरी के ढांचे में बड़े बदलाव आने की उम्मीद है। इसमें बेसिक सैलरी के साथ-साथ महंगाई भत्ता (डीए), मकान किराया भत्ता और दूसरे फायदों में भी बदलाव शामिल है। इस कदम से स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों, पेंशनरों और सरकारी मदद से चलने वाली संस्थाओं के कर्मचारियों को भी सैलरी, पेंशन और सेवानिवृत्ति के फायदों में बदलाव के जरिए फायदा होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार के कर्मचारियों के कुछ वर्गों ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि इस फैसले से उनकी लंबे समय की आर्थिक सुरक्षा और खरीदने की क्षमता में काफी सुधार हो सकता है। प्रशासनिक क्षेत्र के अधिकारियों ने कहा कि एक नया वेतन आयोग न केवल मासिक वेतन और पेंशन को प्रभावित करता है, बल्कि इसका सेवानिवृत्ति की योजना, घरेलू वित्त और समग्र आर्थिक गतिविधियों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है।
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